19 फरवरी तो जेनेवा में अमेरिका और ईरान एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर अंतिम मुहर लगाने वाले हैं. लेकिन युद्ध समाप्ति के लिए इस एमओयू पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने नाराजगी जाहिर की है.
अपने देशवासियों को संबोधित करते हुए पीएम नेतन्याहू ने कहा है कि संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है. हमने इजरायल को विनाश से बचा लिया है लेकिन हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. समझौता हो या न हो, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे. हम क्षेत्र में मौजूद खतरों को विफल करने की अपनी कार्रवाई जारी रखेंगे.
चाहे समझौता हो या न हो, ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे: नेतन्याहू
बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, चाहे अमेरिका-ईरान के बीच समझौता हो या नहीं
इजरायली पीएम नेतन्याहू का ये कड़ा बयान ऐसे वक्त में आया है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी स्पीकर गालिबफ ने शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और इसी सप्ताह अमेरिका-ईरान के फाइनल समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले है. पीएम नेतन्याहू ने इस समझौते पर नाराजगी जताई है.
नेतन्याहू ने कहा, “कभी-कभी मेरी और ट्रंप की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं होती. ट्रंप और मैं साझेदार हैं. हम अक्सर एक-दूसरे से सहमत होते हैं और कभी-कभी असहमत भी होते हैं. वह अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और मैं इजरायल का प्रधानमंत्री हूं. मैं इजरायल की सुरक्षा से जुड़े हितों के लिए जिम्मेदार हूं और यह काम समझदारी से करना जरूरी है. मेरा पूरा राजनीतिक जीवन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लक्ष्य पर केंद्रित रहा है और ये मेरी जीवनभर की जिम्मेदारी है.”
ईरान और उनके सहयोगियों के खिलाफ इजरायली अभियान समाप्त नहीं: नेतन्याहू
ईरान के बीच समझौते के सार्वजनिक होने के बाद नेतन्याहू ने कहा कि “अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान ने परमाणु विनाश के खतरे को समाप्त कर दिया है. लेकिन अभी भी बहुत चुनौतियां बाकी हैं.”
जनता को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा, मैं लोगों को पूछते सुनता हूं कि “हमने युद्ध से क्या हासिल किया है? और उनसे मेरा जवाब है: “हमने क्या हासिल किया है”!
“हमने विनाश के तत्काल खतरे को टाल दिया है, अपने अमेरिकी मित्रों के साथ मिलकर हमने इजराइल के इतिहास का सबसे बड़ा आक्रामक हवाई अभियान शुरू किया. हमने ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों को निष्क्रिय किया, आतंकवादी शासन के नेताओं को खत्म किया, परमाणु सुविधाओं को ध्वस्त किया, मिसाइलों और उन्हें बनाने वाले अधिकांश कारखानों को नष्ट किया, अनगिनत सैन्य उद्योगों और बुनियादी ढांचों पर हमला किया, उनकी नौसेना, उनकी वायु सेना को तबाह किया, ईरानी लोगों का नरसंहार करने वाले बसिज कमांडरों को निष्क्रिय किया, और भारी नुकसान पहुंचाया.”
“हम इसका अनुमान सैकड़ों अरब डॉलर में लगाते हैं, और कुछ लोग तो इसे एक ट्रिलियन डॉलर के करीब भी आंकते हैं – ईरान की अर्थव्यवस्था को जबरदस्त नुकसान जो बनाने में उन्हें दशकों लग गए थे. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है: हमने इजरायल को परमाणु विनाश के खतरे से बचा लिया है.”
हमें अपनी रक्षा के लिए दृढ़ होना होगा: नेतन्याहू
नेतन्याहू ने देशवासियों को अलर्ट किया और कहा, मैं आपसे कहता हूं, इजरायल के नागरिकों, यह संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है. हमें अपनी सतर्कता बनाए रखनी होगी, मजबूत रहना होगा और जरूरत पड़ने पर अपनी रक्षा के लिए दृढ़ रहना होगा. यह बात सिर्फ ईरान के मामले में ही सच नहीं है. यह ईरान के उन आतंकी सहयोगियों के मामले में भी सच है, जिन पर हमने अभूतपूर्व तरीके से हमला किया है. हमने गाज़ा में ऐसा किया, लेबनान में किया, सीरिया में, यमन में किया, हमने जूडिया और सामरिया के शरणार्थी कैंपों में भी ऐसा किया, हमने हर जगह ऐसा किया.”
लेबनान में हमारा एक्शन जारी रहेगा: नेतन्याहू
लेबनान के बारे में नेतन्याहू ने कहा, कि “जब तक आवश्यक होगा, हम बफर जोन में बने रहेंगे. हम हमलों को रोकने के लिए कार्रवाई की अपनी स्वतंत्रता बनाए रखेंगे. हमारी जंग अभी खत्म नहीं हुई है. इजरायली सेना ने उन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नियंत्रण कर लिया है, जिनका उपयोग पहले हिजबुल्लाह द्वारा इजरायल को खतरा पहुंचाने के लिए किया जाता रहा है. हम किसी भी कीमत पर इन सुरक्षा क्षेत्रों में बने रहेंगे. हम इस समझौते के बावजूद ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेंगे.”

