मॉस्को की रिफाइनरी को भारी नुकसान करने के बाद यूक्रेन ने रूस के खिलाफ जबरदस्त प्रोपेगेंडा वॉरफेयर शुरु कर दिया है. यूक्रेन ने जंग के दौरान रूस के कब्जा किए टैंक, तोप, मिसाइल और मिलिट्री व्हीकल की टेक्नोलॉजी का डाटा-बैंक तैयार कर इंटरनेट पर बोली लगा दी है. रिवर्स-इंजीनियरिंग के लिए अगर जरूरत पड़ी तो यूक्रेन इन हथियारों की भी बोली लगाने के लिए तैयार है.
यूक्रेन ने रूसी टैंक और मिसाइल के लिए इंटरनेट प्लेटफॉर्म को ट्रॉफी-लैब नाम दिया है. क्योंकि, जंग में दुश्मन के जीते हथियारों को वॉर-ट्रॉफी के नाम से जाना जाता है. यूक्रेन ने इस प्लेटफॉर्म को जारी करने के दौरान कहा कि “युद्ध के मैदान से जब्त हर मिसाइल, ड्रोन और वाहन अब स्वतंत्र दुनिया के लिए ज्ञान का स्रोत होगा रिवर्स इंजीनियरिंग के लिए.” इस ट्रॉफीलैब के जरिए यूक्रेन कब्ज़े में ली गई रूसी हथियार तकनीक को दुनिया तक पहुंचाने की जुगत में जुट गया है.
यूक्रेन के मुताबिक, इस सुरक्षित प्लेटफॉर्म के ज़रिए मित्र देशों की सरकारें, लैब्स और डिफेंस टेक निर्माताओं को गहन तकनीकी डेटा, रिपोर्ट्स और कमज़ोरियों तक पहुंच मिलेगी. यूज़र्स परीक्षण के लिए फिजिकल उपकरण भी मांग सकते हैं, जिससे काउंटरमेज़र्स का डेवलपमेंट साइकिल काफी छोटा हो जाएगा.
फरवरी 2022 से रूस-यूक्रेन चल रहा है. पिछले चार सालों में रूस ने यूक्रेन के डोनबास प्रांत पर कब्जा कर रशियन फेडरेशन में मिला लिया है. लेकिन अमेरिका और दूसरे नाटो दशों की मदद से यूक्रेन ने रूस को जबरदस्त टक्कर दे रखी है. ऐसे में यूक्रेन ने रूस को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है और बड़ी संख्या में हथियार और दूसरे सैन्य साजो सामना को जब्त किया है. यूक्रेन का दावा है कि पिछले चार सालों में रूस के 14 लाख सैनिकों की मौत हो चुकी है. हालांकि, सामरिक जानकार भी मानते हैं कि यूक्रेन इस संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर बता रहा है, लेकिन रूस को नुकसान जरूर हुआ है. कुछ महीने पहले यूक्रेन ने राजधानी कीव में रूस के कब्जे किए टैंक, रॉकेट, रडार सिस्टम और मिसाइलों की प्रदर्शित किया था.
शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि जंग की शुरूआत में अगर रूस के एक जनरल (कमांडर) ने गलती नहीं की होती तो यूक्रेन को हार का सामना करना पड़ सकता था. ट्रंप के मुताबिक, जनरल ने कीव पर कूच करते वक्त अपने टैंकों को सड़क के बजाए जंगल और खेत के रास्ते ले गया था. ऐसे में टैंक, कीचड़ और दलदल में फंस गए थे. बाद में रूसी सेना इन टैंकों और मिलिट्री व्हीकल्स को छोड़कर भाग गई थी और यूक्रेन ने जब्त कर लिया था.
जेलेंस्की ने भी यूरोप दौरे के दौरान कहा है कि पुतिन जानबूझकर अपनी सेना को युद्ध के मोर्चा से वापस नहीं बुलाना चाहते. क्योंकि बिना जीते अगर ऐसा किया तो रूसी सेना पुतिन पर भारी पड़ जाएगी. जेलेंस्की ने कहा कि लेकिन हम पुतिन को जीतने नहीं देंगे. शुक्रवार को इंग्लैंड और जर्मनी सहित यूरोप के करीब एक दर्जन देशों ने यूक्रेन को 04 बिलियन डॉलर के हथियार और दूसरी मदद देने का ऐलान किया था. ऐसे में रूस के लिए यूक्रेन के खिलाफ निर्णायक जीत के लिए नाको चने चबाने पड़ रहे हैं.

