By Nalini Tewari
भारतीय एनएसए अजीत डोवल की फोन पर ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से फोन पर बात करने से पाकिस्तान की बेचैनी इस कदर बढ़ गई कि घबराए पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर तेहरान दौड़ गए. मक्का पैक्ट के तहत सऊदी अरब की ओर सैन्य मदद को लेकर ईरान के सामने मुंह छिपाते छिपाते मुनीर ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और ईरानी एनएसए से मुलाकात की. लेकिन ईरान के जवाब ने बिचौलिए पाकिस्तान को जोरदार झन्नाटा दिया है.
ईरान के सामने अमेरिका से बातचीत की पैरवी करने वाले असीम मुनीर से साफ-साफ कह दिया गया है कि एक ग्राम यूरेनियम भी ईरान से बाहर नहीं जाएगा और अमेरिका से बातचीत तभी होगी जब सारी शर्तें मान ली जाएगी.
ईरान के कड़े रुख से साफ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहे कितने भी दावे करें कि ईरान बातचीत के लिए गिड़गिड़ा रहा है, ये बातें झूठ हैं. और वहीं ट्रंप के प्यादे असीम मुनीर की सारी बातों को तेहरान तभी मानेगा जब अमेरिका शर्ते मानने को मंजूर हो जाए.
यूरेनियम ईरान से बाहर नहीं जाएगा, मुनीर को कड़ा संदेश
मक्का पैक्ट के तहत सऊदी अरब की तरफ से ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य मदद और मिलिट्री एक्शन से दोनों देशों के बीच संबंधों में दरार आने की आशंका के बीच असीम मुनीर ने ईरान का दौरा किया है. लेकिन इस दौरे के बीच ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है.
देश की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रेजाई ने एक्स पर लिखा है कि “यूरेनियम का एक भी ग्राम ईरान से बाहर नहीं भेजा जाएगा. ईरान की परमाणु सामग्री ईरानी लोगों के लिए एक बड़ी संपत्ति और राष्ट्रीय संपदा है, जिसका इस्तेमाल देश के भीतर ही किया जाना है. अमेरिका विश्वास बहाली के लिए कदम उठाए बिना बातचीत नहीं होगी. यह प्रक्रिया ईरान की सभी शर्तों को पूरी तरह पूरा करने से शुरू होनी चाहिए.”
बताया जा रहा है कि मोहसिन रेजाई ने यही रुख असीम मुनीर के साथ बातचीत में भी अपनाया है.
अजीत डोवल और रेजाई के बीच सीक्रेट बातचीत
असीम मुनीर की बेचैनी इसलिए ज्यादा बढ़ी हुई है कि क्यों हाल ही में भारतीय एनएसए डोवल और मोहसिन रेजाई के बीच लंबी बातचीत की गई थी. ईरानी दूतावास की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में इस बात की पुष्टि की गई है कि डोवल और ईरान के टॉप सिक्योरिटी चीफ के बीच फोन पर गंभीर चर्चा हुई है. हालांकि, दोनों देशों ने बातचीत के विषयों को सीक्रेट रखा, लेकिन ये कोई सामान्य या औपचारिक बातचीत नहीं मानी जा रही है.
ईरानी दूतावास के बयान के मुताबिक, “दोनों सुरक्षा प्रमुखों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के साथ-साथ भारत और ईरान के आपसी हितों के कई अहम मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया.”
अजीत डोवल और रेजाई के बीच सीक्रेट बातचीत
असीम मुनीर की बेचैनी इसलिए ज्यादा बढ़ी हुई है कि क्यों हाल ही में भारतीय एनएसए डोवल और मोहसिन रेजाई के बीच लंबी बातचीत की गई थी. ईरानी दूतावास की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में इस बात की पुष्टि की गई है कि डोवल और ईरान के टॉप सिक्योरिटी चीफ के बीच फोन पर गंभीर चर्चा हुई है. हालांकि, दोनों देशों ने बातचीत के विषयों को सीक्रेट रखा, लेकिन ये कोई सामान्य या औपचारिक बातचीत नहीं मानी जा रही है.
ईरानी दूतावास के बयान के मुताबिक, “दोनों सुरक्षा प्रमुखों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के साथ-साथ भारत और ईरान के आपसी हितों के कई अहम मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया.”
पहले की 07 शर्तों को माना जाए, फिर सोचेंगे: ईरानी स्पीकर
असीम मुनीर ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और ईरानी स्पीकर मोहम्मद गालीबाफ से भी क्षेत्रीय घटनाक्रम और मध्यस्थता के प्रयासों पर चर्चा की.
ईरानी स्पीकर गालीबाफ ने भी कड़ा रुख अपनाया है. गालीबाफ ने कहा है कि “अमेरिका ईरान का भरोसा तब तक हासिल नहीं कर सकता, जब तक वह पिछले महीने ईरान की ओर से रखी गई सात शर्तों को पूरा नहीं करता. ये शर्तें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने से जुड़ी हैं. इनमें ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी खत्म करना, ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र के सभी मोर्चों दुश्मनी रोकना शामिल है.”
हूती-सऊदी अरब मुद्दे पर चर्चा, मक्का पैक्ट बना पाकिस्तान की फांस
बताया जा रहा है कि असीम मुनीर के ईरान यात्रा का उद्देश्य सऊदी अरब पर हो रहे हूती विद्रोहियों के हमलों को रोकना भी है. यमन के हूती विद्रोहियों को ईरान का पूरा समर्थन है और अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध के दौरान हूतियों ने ही ईरान की ओर से एक फ्रंट संभाला हुआ था. इस युद्ध के बीच है हूती और सऊदी अरब में तनातनी है, जिसके बाद सऊदी अरब के एक्शन के खिलाफ हूतियों ने रियाद और मक्का तक में हमले करके गहरी चोट दी है.
पिछले कुछ दिनों में हूतियों ने सऊदी अरब पर दर्जनों घातक हमले किए हैं. जिसके बाद सऊदी अरब को अपने मक्का समझौते वाले सहयोगियों यानि पाकिस्तान और तुर्किए को गुहार लगानी पड़ी. पाकिस्तान की दुविधा ये है कि अगर वो हूतियों के खिलाफ नहीं जाता है कि तो अपने रक्षा सहयोगी सऊदी अरब की नाराजगी झेलेगा और वहीं अगर हूतियों पर एक्शन लेता है तो अपने पारंपरिक मित्र ईरान से फटकार खाएगा.
बहरहाल पाकिस्तान ने घोषणा की है कि वो सऊदी अरब की मदद के लिए तैयार है, लेकिन इस बीच मुनीर ने तेहरान पहुंचकर अपनी सफाई पेश करने की कोशिश की है. लेकिन इस जुगत का कोई असर नहीं है, ईरान ने कह दिया है कि वो हूती के साथ हैं, वहीं हूतियों ने भी पाकिस्तान को धमकाया है कि अगर वो सऊदी अरब के साथ रहेगा तो इस्लामाबाद में जाकर मिसाइल गिराई जाएगी.


Leave feedback about this