By Nalini Tewari
भारत के दौरे पर है अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो. मार्को रुबियो ने पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों पर सफाई दी, बताया कि आखिर अमेरिका को बार-बार क्यों पाकिस्तान से बात करनी पड़ती है. अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ है लेकिन बावजूद इसके क्यों पाकिस्तान से बातचीत उसकी मजबूरी बन जाती है.
रुबियो ने कहा, पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि उससे बातचीत जरूरी है. रुबियो ने भारत-ईरान के रिश्तों का उदाहरण देते हुए अमेरिका का पक्ष रखा और कहा, कि जैसे भारत-ईरान के रिश्ते हैं, ठीक वैसे ही पाकिस्तान और अमेरिका भी बातचीत करते हैं. अमेरिका को उन देशों के साथ भी राजनयिक संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे उसके मतभेद हैं.
पाकिस्तान-अमेरिका के संबंधों पर मार्को रुबियो ने बताई मजबूरी
मार्को रुबियो संबंधों को मजबूत करने के लिए भारत में मौजूद हैं. पिछले साल (2025) में पहलगाम नरसंहार और फिर भारतीय सेना के पराक्रम की कहानी पूरी दुनिया जानती है. ऐसे में रुबियो भारत पहुंचकर पाकिस्तान की बात न करें, ये हो नहीं सकता. लेकिन बातचीत में रुबियो ने अमेरिका की कमजोरी गिना डाली.
रुबियो ने कहा, पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जिसके साथ हमें संबंध रखना ही होगा. इस देश के पास परमाणु हथियार हैं. भौगोलिक नजरिए से भी, हमें इस देश के साथ संवाद कायम रखना है, ठीक वैसे ही जैसे भारत सरकार के ईरान के साथ रिश्ते हैं और वहां के नेताओं से मिलते-जुलते हैं.
रुबियो बोले, “मैं अमेरिका का विदेश मंत्री हूं और उन्हें वह भूमिका निभानी है, जो उनके पद के लिए जरूरी है. अपने नए रोल में, मैं अब सीनेटर नहीं हूं इसलिए विदेश मंत्री के रूप में मुझे अमेरिका की विदेश नीति मैनेज करनी है और इसमें हमारे लिए जरूरी है कि हम देशों के साथ रिश्ते बनाकर रखें, इसमें वो भी हैं, जिनके साथ कुछ असहमति है.”
अमेरिका आतंकवादी समर्थकों के खिलाफ, रुबियो ने की दोगली बात
हद है, मार्को रुबियो की कैसी विदेश नीति है, ये इसी बात से पता लगाया जा सकता है कि एक ओर से वो कहते हैं कि अमेरिका आतंकवाद का कट्टर विरोधी है, आतंकवादी के समर्थक देशों के खिलाफ हैं, वहीं डबल स्टैंडर्ड दिखाते हुए पाकिस्तान के साथ रिश्तों को जरूरी बताते हैं.
रूबियो ने कहा कि “अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ है. अगर भारत के पाकिस्तान से संबंध हैं और दोनों देश आपस में बात कर सकते हैं, तो इससे भारत की चिंताओं वाली गतिविधियों को रोकने में मदद मिल सकती है.”
रुबियो ने भारत पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि “21वीं सदी कैसी होगी – अच्छी या बुरी – यह इस बात से तय होगा कि इस क्षेत्र में क्या होता है.”
न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग से नहीं डरता है भारत
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी परमाणु धमकी या ‘ब्लैकमेलिंग’ के आगे झुकने वाला नहीं है. संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजनयिकों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान की तरफ से दी जाने वाली परमाणु धमकियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सशस्त्र बलों को खुली छूट दी है. पीएम मोदी अपने बयान में कह चुके हैं कि भारत अब पाकिस्तान की ओर से किसी भी प्रकार की न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग को बिल्कुल नहीं सहेगा. देश परमाणु धमकियों के आगे न कभी झुका है और न ही भविष्य में झुकेगा.
पीएम मोदी ने भारत की नीति स्पष्ट करते हुए ने यह भी कह चुके हैं कि “यदि भविष्य में कोई शत्रु परमाणु धमकी देने की कोशिश करता है, तो भारतीय सेनाओं को अपने निर्णय स्वयं लेने और उचित व कड़ा जवाब देने की पूरी छूट दी गई है.”
भारत के टारगेट पर थे पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने: सिपरी
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान पर हुए हमले और भारत के परमाणु हथियारों को लेकर ग्लोबल थिंक टैंक सिपरी ने इसी साल बड़ा खुलासा किया था. सिपरी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि भारत ने पाकिस्तान के जिन मिसाइल और एयरबेस पर अटैक किए थे, वे पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से जुड़े थे.
दरअसल 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम नरसंहार का बदला लेने के लिए भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था. 7 से 10 मई 2025 के बीच, भारत ने पाकिस्तान में आतंकियों ठिकानों के साथ-साथ पाकिस्तान के 11 मिलिट्री ठिकाने और एयरबेस पर भी ब्रह्मोस मिसाइल से हमला किया गया था. इन हमलों से घबराए पाकिस्तान ने पहले अमेरिका के सामने और फिर भारत से युद्ध रोकने की मिन्नत की थी. तब जाकर भारत ने हमले रोके थे.
ऑपरेशन सिंदूर में हमले के दौरान कुछ ऐसे वीडियो सामने आए थे, जिनमें पाकिस्तान के किराना हिल्स पर मिसाइल अटैक दिखाई दिया था. किराना हिल्स में माना जाता है कि पाकिस्तान का सीक्रेट न्यूक्लियर बेस है. बाद में ये बात सामने आई थी कि भारत ने किराना हिल्स में पाकिस्तान के न्यूक्लियर बेस के मुहाने पर हमला किया था यानी बेहद ‘कैलकुलेटेड’ हमला. ऐसा हमला कि न्यूक्लियर रेडिएशन का खतरा भी ना रहे और पाकिस्तान किसी भी तरह से अपनी परमाणु हथियारों को इस बेस से बाहर भी ना निकाल पाए.
भारतीय वायुसेना की सुखोई फाइटर जेट ने रावलपिंडी में पाकिस्तानी वायुसेना के नूर खान बेस पर भी अटैक किया था. हालांकि, जैसा कि कोई देश अपने न्यूक्लियर बेस के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं करता है, पाकिस्तान ने भी नहीं की थी, लेकिन ये माना जाता है कि नूरखान बेस पर पाकिस्तान का न्यूक्लियर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर है. ऐसे में इसे तबाह कर भारत ने पाकिस्तान के हाथ-पैर काट दिए थे. यही वजह है कि पाकिस्तान और अमेरिका, हमले रोकने के लिए भारत के सामने गिड़गिड़ाए थे.
खास बात है कि ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ तौर से कहा था कि हमलों के दौरान पाकिस्तान के परमाणु ब्लफ यानी ब्लैकमैलिंग को भारत की सेनाओं के तबाह कर दिया था. उस वक्त, कम ही लोग पीएम मोदी के इस बयान को ठीक से समझ पाए थे. लेकिन सिपरी की रिपोर्ट से साफ हो गया कि पीएम मोदी ने ये बयान क्यों दिया था.
परमाणु हथियारों को लेकर भारत की नो फर्स्ट यूज की पॉलिसी है यानी युद्ध के दौरान भारत, अपने परमाणु हथियारों को कभी भी पहले इस्तेमाल नहीं करेगा. लेकिन पिछले कुछ सालों से इस पॉलिसी को बदलने की मांग भारत के स्ट्रेटेजिक-सर्कल में उठाई जा रही है.


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