चीन और पाकिस्तान से चल रहे सीमा विवाद के बीच, पहली बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जमीन पर लड़ने जाने वाली जंग से जुड़ी ‘लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन’ जारी करेंगे. मौका होगा, आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (एससीसी) का, जो बुधवार को राजधानी दिल्ली में शुरु हुआ है (21-23 अक्टूबर).
23 अक्तूबर यानी सम्मेलन के समापन पर सीडीएस, जनरल एन एस राजा सुब्रमणि और थलसेना प्रमुख, जनरल धीरज सेठ और सेना के सभी टॉप कमांडर्स की मौजूदगी में इस बेहद खास डॉक्ट्रिन को रिलीज किया जाएगा. भारतीय सेना ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि, “यह डॉक्ट्रिन, भारतीय सेना को युद्ध के बदलते स्वरूप और भविष्य के संघर्षों से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क प्रदान करेगी.”
थलसेना प्रमुख की अध्यक्षता में होने वाले भारतीय सेना का सर्वोच्च स्तरीय द्विवार्षिक सम्मेलन, टॉप कमांडर्स को बदलते सुरक्षा परिवेश, ऑपरेशनल तैयारियों, क्षमता और भविष्य के लिए तैयार परिवर्तनकारी पहलों पर विचार-विमर्श करने का प्लेटफार्म प्रदान करता है.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एलओसी पर बन गए थे युद्ध के हालात
हाल के दिनों में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जबरदस्त विद्रोह देखने का मिला था. पीओके के स्थानीय लोगों ने (पाकिस्तानी) सेना और सरकार के खिलाफ जमकर उग्र प्रदर्शन किए थे और भारत में विलय की मांग की थी. जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाने के दौरान भी मोदी सरकार ने पीओके में भारत में शामिल करने का संकल्प दोहराया था. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी समय-समय पर पीओके को भारत में शामिल करने का ऐलान किया है.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी पाकिस्तान की सेना ने जम्मू कश्मीर से सटी नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर जबरदस्त फायरिंग कर युद्धविराम का उल्लंघन किया था. हालांकि, भारतीय सेना ने पाकिस्तान के युद्धविराम का मुंहतोड़ जवाब दिया था. लेकिन दोनों देशों की थल-सेनाओं के बीच कभी भी युद्ध जैसी स्थिति बन सकती थी. ऐसे में थलसेना के लिए लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन बेहद अहम मानी जा रही है.
लद्दाख से सटी एलएसी पर चीन से जारी है तनातनी
इस महीने के शुरुआत में चीन के विदेश मंत्रालय ने भी पूर्वी लद्दाख के 28 इलाकों के जब भारतीय नाम जारी कर आधिकारिक नक्शे में शामिल करने का विरोध जाहिर किया था. वर्ष 2024 में चीन के साथ हुए डिसएंगेजमेंट करार के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा था कि दोनों देशों के बीच सामान्य संबंध हो सकते हैं. लेकिन चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों के चीनी नाम देकर पहले अपने नक्शे में शामिल किया और फिर पूर्वी लद्दाख में भारतीय नामों का विरोध किया. ऐसे में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सामान्य स्थिति आने में अभी वक्त लग सकता है.
गलवान घाटी की झड़प के दौरान, भारत और चीन की सेनाएं, पूर्वी लद्दाख में आमने-सामने की स्थिति में थी और एक चिंगारी बड़े युद्ध में तब्दील हो सकती थी. ऐसे में गुरुवार को जारी होने वाली डॉक्ट्रिन में एलएसी पर युद्ध जैसे हालात से निबटने के सिद्धांत भी शामिल किए जा सकते हैं.
भारतीय सेना के मुताबिक, “अपने व्यापक एजेंडे के साथ एसीसी सम्मेलन, टॉप कमांडर्स के लिए चल रही पहल की समीक्षा करने, भविष्य के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करने और एक प्रगतिशील, अनुकूलनीय, तकनीकी रूप से सक्षम तथा भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना के निर्माण की दिशा में उचित नीतिगत दिशानिर्देश तैयार करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा.”
आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में यूएन पीस कीपिंग फोर्स से जुड़ी पत्रिका का होगा विमोचन
भारतीय सेना के मुताबिक, कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की वार्षिक पत्रिका का भी विमोचन करेंगे और संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक (यूएनपीकेएफ) के रूप में सेवा करते हुए उल्लेखनीय योगदान देने वाले भारतीय सेना के कर्मियों को सम्मानित करेंगे. उनकी अनुकरणीय सेवा, व्यावसायिकता और संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में उनके योगदान को मान्यता देंगे.


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