अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आखिरी अल्टीमेटम को लेकर ईरान में कूटनीतिक हलचल शुरु हो गई है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बार फिर से भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से फोन पर बात की है. इस बातचीत के बाद अराघची ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से बात की है. ये बातचीत अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर की गई है.
ईरानी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयानों के अनुसार, दो अलग-अलग फोन कॉल में विदेश मंत्री अराघची ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ पश्चिम एशिया की ताजा स्थिति और अमेरिका व इजरायल के हमलों के सुरक्षा और आर्थिक असर पर चर्चा की.
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर ईरान को फाइनल अल्टीमेटम दिया है, कि होर्मुज खोला जाए, नहीं तो वो होगा जो ईरान ने नहीं सोचा होगा. वहीं संवाद के जरिए युद्ध रोकने की कोशिशें तेज हो गई हैं. अमेरिका की ओर से ईरान को प्रस्ताव दिया गया है कि अगर वो अमेरिका को न्यूक्लियर हथियार दे देता है तो उसपर लगे सारे प्रतिबंध खत्म कर दिए जाएंगे.
जयशंकर ने की ईरान, कतर और यूएई से बात
ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के शीर्ष नेतृत्व के साथ टेलीफोन पर बातचीत की है. जयशंकर ने ईरान की मार झेल रहे खाड़ी देश यूएई के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति पर चर्चा की. जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी से फोन पर संपर्क किया दोनों नेताओं ने चल रहे संघर्ष पर टेलीफोन पर बातचीत की.
इस बातचीत के बाद जयशंकर को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया. जयशंकर ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बातचीत की जानकारी दी और कहा, कि हमने वर्तमान स्थिति पर चर्चा की.
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के प्रयासों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत युद्ध को रोकने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही कोशिशों का समर्थन करता है.
ईरानी जनता देश की रक्षा के लिए तैयार, दुनिया अमेरिका के खिलाफ उठाए आवाज: अराघची
ईरानी विदेश मंत्रालय की मुताबिक अब्बास अरागची ने इस बातचीत के दौरान बताया, कि “पिछले 37 दिनों में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के लोगों के खिलाफ कई हमले किए हैं. इनमें औद्योगिक ढांचे, फैक्ट्रियों, अस्पतालों, स्कूलों, रिहायशी इलाकों और परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया गया है.”
अराघची ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़े प्रभावशाली देशों से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर जिम्मेदार रवैया अपनाएं.
अराघची ने कहा, “ईरान की जनता और उसकी सेना अपने देश के हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं. अमेरिका और इजरायल के हमलों का असर पूरे क्षेत्र और दुनिया की स्थिरता और सुरक्षा पर पड़ सकता है.”
बुशहर पर अटैक से भड़का रूस, लावरोव बोले अस्वीकार्य
अराघची ने जयशंकर के बाद रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से की चर्चा की. दरअसल हाल ही में अमेरिका ने ईरान के बुशहर के संयंत्रों पर हमला किया है, जो रूस की मदद से चलाया जाता है. बुशहर में रूसी इंजीनियर्स-कर्मचारियों की भी मौजूदगी रहती है. पिछले साल हुए अटैक में अमेरिका ने बुशहर को छुआ तक नहीं था, लेकिन इस बार प्रचंड युद्ध में बुशहर पर एक-दो बार नहीं बल्कि 4 बार हवाई हमले किए गए हैं.
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के नागरिक इलाकों पर हो रहे गैरकानूनी हमलों को तुरंत रोकने को कहा है. लावरोव ने दक्षिणी ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमलों का जिक्र करते हुए कहा, “इस संघर्ष को फैलने से रोकने के लिए हर संभव कोशिश की जानी चाहिए.”

