आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में इंडियन आर्मी एक डेटा-सेंट्रिक, एआई-इनेबल्ड फोर्स में अपने बदलाव को तेजी से आगे बढ़ा रही है, जो टेक्नोलॉजिकल आत्मनिर्भरता और सुरक्षित डिजिटल क्षमता के राष्ट्रीय संकल्प के साथ खुद को तैयार कर रही है.
इंडिया एआई समिट में, भारतीय सेना ने इस्तेमाल में आने वाले स्वदेशी एआई एप्लिकेशन को पेश किया है. जो शिक्षा, आपदा प्रतिक्रिया, साइबर सिक्योरिटी, ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा में मजबूती देगी.
डुअल-यूज यानि सेना के साथ-साथ सिविलियन (नागरिकों) को भी इसका लाभ मिलेगा. यानि ये स्वदेशी एआई सिस्टम देश की रक्षा की तैयारी को मजबूत करते हुए आम लोगों की सुरक्षा, आपदा से लड़ने की क्षमता, डिजिटल सुरक्षा और देश की सुरक्षा में योगदान देता है.
खास बात ये है कि स्वदेशी एआई को सेना ने इन हाउस यानि खुद ही विकसित किया है. इंडिया एआई समिट में पेश की गई इंडियन आर्मी की एआई पहल एक सुरक्षित, नेटवर्क वाले इकोसिस्टम की ओर एक बड़ा बदलाव दिखाती है.
भारतीय सेना के एआई एप्लिकेशन्स को जानिए
1. एआई एग्ज़ामिनर:
ये एक एआई-इनेबल्ड ऑटोमेटेड इवैल्यूएशन सिस्टम है जिसे असेसमेंट बनाने, सबमिशन का एनालिसिस करने, स्कोर बनाने और ट्रेनी को स्ट्रक्चर्ड फ़ीडबैक देने के लिए किसी भी लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम में इंटीग्रेट किया जा सकता है.
2. एसएएम यून (सिचुएशनल अवेयरनेस मॉड्यूल फॉर यूएन):
ये एक वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है, जो जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस, स्ट्रक्चर्ड रिपोर्टिंग और एआई एनालिटिक्स को एक साथ जोड़ता है. इससे अधिकारियों को मिशन की योजना बनाने, निगरानी, समन्वय और तेज प्रतिक्रिया के लिए रियल-टाइम में एकीकृत जानकारी मिलती है. यह प्लेटफॉर्म खास तौर पर आपदा प्रबंधन केंद्रों, इमरजेंसी कोऑर्डिनेशन हब और स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम के लिए बहुत उपयोगी है. स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम के लिए कारगर है.
3. ईकेएएम (एकम): एज़-ए-सर्विस:
ये एक सिक्योर, मॉड्यूलर देसी एयर गैप्ड क्लाउड प्लेटफॉर्म है जो चैट, डॉक्यूमेंट और प्रेजेंटेशन जेनरेशन, अलग-अलग भाषाओं का ट्रांसलेटर, मल्टीमीडिया जेनरेशन के लिए स्पेशल बॉट्स तक यूनिफाइड एक्सेस देता है. यह कंप्यूट और फुल डेटा सॉवरेनिटी तक एक्सेस पक्का करता है.
4. प्रक्षेपण (मिलिट्री क्लाइमेटोलॉजी और डिजास्टर प्रेडिक्शन सिस्टम):
प्रक्षेपण भारत का पहला हाइब्रिड मिलिट्री क्लाइमेटोलॉजी डिसीजन-सपोर्ट सिस्टम है जो भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन जैसी आपदाओं का 3 से 7 दिन पहले तक पूर्वानुमान कर सकती है. यह संवेदनशील ऑपरेशनल क्षेत्रों के लिए सटीक और स्थान-विशिष्ट खतरे का पूर्वानुमान देती है.इस देसी एआई सिस्टम से डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, बॉर्डर एरिया कम्युनिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानर और इमरजेंसी रिस्पॉन्स एजेंसियों को जल्दी चेतावनी देने की क्षमता देता है, आपदाओं से निपटना आसान हो जाता है.
5. एक्स फेस (फेशियल रिकग्निशन सिस्टम):
इंस्टॉलेशन सिक्योरिटी, सर्विलांस और आइडेंटिटी वेरिफिकेशन में मदद के लिए तेज़ी से इमेज और वीडियो-बेस्ड वेरिफिकेशन के लिए एआई-पावर्ड आइडेंटिफिकेशन और ऑथेंटिकेशन सिस्टम है. ये सिस्टम लॉ एनफोर्समेंट, एयरपोर्ट सिक्योरिटी और गुमशुदा लोगों की पहचान के लिए उपयोगी हैय
6. नभ दृष्टि:
एक डिस्ट्रिब्यूटेड मोबाइल-इनेबल्ड टेलीमेट्री रिपोर्टिंग सिस्टम जो पोजिशनल डेटा, इमेजरी, ओरिएंटेशन पैरामीटर और टाइम-स्टैम्प्ड ऑब्जर्वेशन कैप्चर करता है, जिसे रियल-टाइम विज़ुअलाइज़ेशन के लिए एआई बैकएंड के ज़रिए प्रोसेस किया जाता है. ऑपरेश्नल माहौल में तेज़ी से रिपोर्टिंग और कोऑर्डिनेटेड रिस्पॉन्स देता है. नागरिकों द्वारा डिज़ास्टर रिपोर्टिंग, एनवायरनमेंटल मॉनिटरिंग और इमरजेंसी सर्च कोऑर्डिनेशन में भी मदद करता है.
7. ड्राइवर फटीग डिटेक्शन:
इस सिस्टम से रियल टाइम में ड्राइवर की नींद का पता लगाने में सक्षम है और अलर्ट जेनरेट करता है. अंधेरे, ऊबड़-खाबड़ इलाकों और लंबी ड्राइविंग कंडीशन में भरोसेमंद तरीके से काम करता है.
8. एआई-इन-ए-बॉक्स (पोर्टेबल एज एआई प्लेटफॉर्म):
यह एक छोटा, आसानी से तैनात किया जा सकने वाला हाई-कंप्यूट प्लेटफॉर्म है, जो सुरक्षित या बिना इंटरनेट वाले वातावरण में भी लोकल स्तर पर एआई मॉडल चला सकता है. यह संवेदनशील ऑपरेशनल क्षेत्रों में एआई के उपयोग को संभव बनाता है.
9. व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम:
जीपीएस टेलीमेट्री, एनालिटिक्स और रियल-टाइम डैशबोर्ड को मिलाकर एआई-इनेबल्ड फ्लीट मॉनिटरिंग सिस्टम है. काफिले की मॉनिटरिंग, लॉजिस्टिक्स विज़िबिलिटी और उनके रास्तों को सपोर्ट करता है.
10. डीपफेक वीडियो डिटेक्शन सिस्टम:
आज के वक्त में जब डीपफेक फोटो और वीडियो के जरिए इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर चल रहा है. ऐसे में भारतीय सेना का ये स्वदेशी एआई सिस्टम इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर और झूठी बातों का मुकाबला करने के लिए एडवांस्ड फेशियल और सिग्नल-पैटर्न एनालिसिस का इस्तेमाल करके सिंथेटिक या मैनिपुलेटेड मीडिया का पता लगाता है.
11. प्रोएक्टिव मोबाइल सिक्योरिटी सिस्टम:
ये एक मोबाइल प्रोटेक्शन सॉल्यूशन है, जो असामान्य व्यवहार, मैलवेयर खतरों और संदिग्ध डेटा ट्रांसमिशन पैटर्न की पहचान करता है. ऑपरेशनल कम्युनिकेशन के लिए एंडपॉइंट सिक्योरिटी को मजबूत करता है. एंटरप्राइज़ डिवाइस सिक्योरिटी, बैंकिंग प्रोटेक्शन और इंस्टीट्यूशनल साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क को सपोर्ट करता है.
12. मशीन लर्निंग बेस्ड वेब एप्लीकेशन फ़ायरवॉल:
ये उभरते साइबर खतरों का रियल टाइम में पता लगाता है ताकि ज़रूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को साइबर वॉरफेयर अटैक से बचाया जा सके. इस एप्लिकेशन से बैंकिंग, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स और सिटिजन सर्विस प्लेटफॉर्म को सुरक्षित किया जा सकता है.

