अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी के बीच लॉस एंजिल्स में ईरानी समर्थकों को एक ट्रक ने रौंद डाला. ईरान के निर्वासित प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थक, तेहरान में चल रहे प्रदर्शन को सपोर्ट करने के लिए अमेरिका में प्रदर्शन कर रहे थे. इस दौरान पहलवी के समर्थकों की भीड़ में एक ट्रक घुस गया और लोगों को कुचल दिया. लोगों की मदद से अमेरिकी एजेंसी ने हमलावर ट्रक ड्राइवर को पकड़ लिया है.
अमेरिका में ईरान के निर्वासित प्रिंस पहलवी के समर्थकों को ट्रक ने रौंदा
ईरान में चल रहे प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई का विरोध करने के लिए लॉस एंजिल्स में एक रैली का आयोजन किया गया था. लोग लॉस एंजिल्स के वेस्टवुड इलाके में विलशायर फेडरल बिल्डिंग के बाहर जमा हुए थे.
इस रैली में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अमेरिका के विरोध और ईरान के कट्टरपंथियों के पक्ष में लिखे नारे वाले ट्रक ने लोगों को अंधाधुंध कुचलना शुरु कर दिया. ईरान की राजशाही के विरोधी संगठन एमईके का स्टिकर लगे एक ट्रक ने प्रोटेस्ट कर रहे लोगों को कुचल दिया और तेजी से निकल गया. कुचले जाने वाले लोग ईरान के निर्वासित काउन प्रिंस मोहम्मद रेजा पहलवी के समर्थक थे.
ट्रक पर लिखा अमेरिका विरोधी नारा
बताया जा रहा है कि ट्रक पर ‘नो रिजीम’ लिखा था. साथ ही एक राजनीतिक संदेश में लिखा गया था. ट्रक पर लिखा था कि अमेरिका 1953 मत दोहराओ. आपको बता दें कि 1953 में ईरान में सरकार का तख्तापलट हुआ था.
लोगों को कुचलकर भागने वाले ड्राइवर को हिरासत में ले लिया गया है. चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावर ने कुछ लोगों पर कुचलने के अलावा हथियार से अटैक भी करने की कोशिश की. लेकिन अमेरिकी एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया.
ईरान में जारी प्रदर्शन, दुनिया से मिल रहा सपोर्ट
ईरान में विद्रोह की आग भड़की हुई है. आंकड़ों के मुताबिक हिंसक झड़पों में अब तक 530 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. लोग खामेनेई की सत्ता को जड़ से मिटा देना चाहते हैं और राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं.
अमेरिका ने धमकी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हमले नहीं रोके गए तो वो सैन्य एक्शन लेगा. लेकिन ईरान की तरफ से कह दिया गया है कि वो अमेरिका और इजरायल के आगे नहीं झुकेगा.
इस बीच अमेरिका के अलावा फ्रांस की राजधानी पेरिस में भी ईरान के प्रदर्शनकारियों के समर्थन में रैली की गई है. प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के साथ-साथ राजशाही के झंडे लहराकर, कट्टरपंथियों का विरोध जताया.

