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क्राउन प्रिंस या ISI एजेंट, बांग्लादेश में तारिक रहमान की वापसी पर कानाफूसी

बांग्लादेश में हिंसा, अराजकता और राजनीतिक अस्थिरता के बीच पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के बेटे तारिक रहमान ने करीब 17 वर्ष बाद अपने देश में कदम रखा है. बांग्लादेश पहुंचने पर रहमान का जबरदस्त स्वागत किया गया और लाखों की भीड़ उसकी एक झलक देखने के लिए उमड़ पड़ी. भारत को हालांकि, रहमान को लेकर भी फूंक फूंक कर कदम रखने हैं. क्योंकि, रहमान के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से पुराने संबंध रहे हैं और भारत-विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता पाई गई है.

तारिक रहमान की आईएसआई से रही हैं नजदीकियां, भारतीय एजेंसियां अलर्ट

जुलाई 2024 में बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट में खालिदा जिया और तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) की बड़ी भूमिका थी. उस दौरान, भारत की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने बांग्लादेश में तख्तापलट के पीछे सोशल मीडिया के जरिए आग भड़काने पर एक खास रिपोर्ट तैयार की थी. रिपोर्ट में पाया गया था कि बांग्लादेश के अराजक-प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर पाकिस्तान से ही सामाजिक अस्थिरता फैलाने की साजिश रची गई थी.

शेख हसीना के तख्तापलट में खालिदा जिया के बेटे की थी अहम भूमिका

रिपोर्ट में पाया गया था कि ट्विटर पर एक खास ‘रिवोल्ट_71’ हैंडल से सबसे ज्यादा पोस्ट शेख हसीना और बांग्लादेश के हालात पर अपलोड की गई थी. इस हैंडल को बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान और बीएनपी की मीडिया सेल द्वारा तक फॉलो किया जा रहा था. तारिक के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से नजदीकियां जगजाहिर हैं. इस हैंडल में ‘71’ इसलिए जोड़ा गया क्योंकि 1971 में ही पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश एक अलग राष्ट्र बना था. ‘रिवोल्ट’ यानी बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार के खिलाफ विद्रोह.

रिपोर्ट में बताया गया था कि बीएनपी के ऑफिशियल ट्विटर पेज को बांग्लादेश के साथ-साथ अमेरिका में बैठे एडमिन ऑपरेट कर रहे थे. बीएनपी की तरफ से तारिक रहमान ही प्रधानमंत्री पद का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है. तारिक रहमान की जुलाई-अगस्त 2024 की सोशल मीडिया पोस्ट को गौर से देखें तो पाएंगे कि लंदन से बैठकर ही वो बांग्लादेश में अराजक प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रहा था. यहां तक की बांग्लादेश और शेख हसीना के बारे में भी सच्ची झूठी जानकारियां साझा कर रहा था.

शेख हसीना की हत्या की कोशिश और भ्रष्टाचार सहित दर्जनभर मामलों में था आरोपी

तारिक रहमान पर भ्रष्टाचार के साथ ही वर्ष 2004 में अवामी लीग की अध्यक्ष और (पूर्व) प्रधानमंत्री शेख हसीना की रैली में बम विस्फोट करने का आरोप लगा था. जेल जाने के डर से तारिक वर्ष 2008 में लंदन भाग गया था और तब से वही से बैठकर अपनी बीएनपी पार्टी को ऑपरेट कर रहा था. मां खालिदा जिया के जेल जाने और फिर बीमार होने के चलते, तारिक को बीएनपी का कार्यवाहक अध्यक्ष बना दिया गया था.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी को देश में बैन करने से तारिक के आम चुनाव में जीतने की प्रबल संभावना है.

लंदन से बैठकर ही तारिक रहमान ने शेख हसीना के तख्तापलट की साजिश आईएसआई के साथ मिलकर रची थी. क्योंकि, बांग्लादेश से भागने के बाद तारिक, पाकिस्तान की यात्रा पर गया था और आईएसआई के अधिकारियों से मुलाकात की थी. सऊदी अरब के दौरे के दौरान भी उसके आईएसआई से संपर्क में रहने की खबरें आई थी. 

वर्ष 2019 के आम चुनाव से पहले, बांग्लादेश की इंटेलिजेंस एजेंसियों ने बीएनपी के टॉप नेताओं और आईएसआई के अधिकारियों के साथ फोन पर बातचीत की ऑडियो क्लिप जारी की थी. इस क्लिप में बीएनपी के नेता, सऊदी के जेद्दाह में तारिक रहमान की आईएसआई के अधिकारियों से मुलाकात की बात करते सुने गए थे. क्लिप में बीएनपी नेता, तारिक रहमान को बॉस कहकर संबोधित कर रहे थे.

बांग्लादेश के पूर्व सैन्य शासक जियाउर्रहमान का बेटा है तारिक

माना जाता है कि अपनी मां के प्रधानमंत्री पद के कार्यकाल (2001-06) के दौरान, तारिक रहमान की आईएसआई से नजदीकियां बढ़ी थी. दरअसल, तारिक का पिता (और खालिदा जिया का पति), जियाउर्रहमान, पाकिस्तान आर्मी में अधिकारी के पद पर तैनात था. जियाउर ने पाकिस्तान की तरफ से 1965 में भारत के खिलाफ जंग लड़ी थी (और बाद में बांग्लादेश का सैन्य शासक रहा था). यही वजह है कि खालिदा जिया के भी पाकिस्तान के साथ करीबी संबंध थे जबकि उनकी धुर-विरोधी शेख हसीना के भारत से बेहद मधुर संबंध थे.

वर्ष 2004 में चटगांव आर्म्स तस्करी मामले में तत्कालीन खालिदा जिया सरकार में गृह राज्य मंत्री रहे लुत्फोज्जमान बाबर को भी आरोपी बनाया गया था और फांसी की सजा सुनाई गई थी. इस मामले में उल्फा चीफ परेश बरूआ और बांग्लादेश आर्मी के अधिकारियों समेत कुल 14 लोग आरोपी थे.

भले ही इस महीने के शुरुआत में खालिदा जिया की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की थी, लेकिन खालिदा जिया और बीएनपी को हमेशा से भारत विरोधी रुख के लिए जाना जाता है.जबकि, शेख हसीना हमेशा से भारत की पक्षधर रही हैं. शेख हसीना ने ना केवल अपने वालिद (बंग-बंधु) मुजीबुर रहमान की विरासत को आगे बढ़ाया बल्कि भारत से लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट, तीस्ता विवाद और साझा हथियारों के निर्माण के साथ साथ रक्षा सहयोग पर अहम समझौते किए थे. शेख हसीना के बेटे सजीब अहमद वाजेद ने भी बांग्लादेश में विरोध-प्रदर्शन, हिंसा और आगजनी सहित तख्तापलट के लिए आईएसआई और विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया था.

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