अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार शाम को होर्मुज की खाड़ी में नाकेबंदी का ऐलान कर चुके हैं. लेकिन एक बार फिर ट्रंप को नाटो देश ने दिया है झटका. ट्रंप ने दावा किया था कि होर्मुज नाकेबंदी के लिए ब्रिटेन अपना युद्धपोत भेज रहा है. लेकिन इस बयान के कुछ ही घंटों में ब्रिटेन ने दुनिया को बताया कि ऐसा कुछ नहीं है. ब्रिटेन कोई भी युद्धपोत नहीं भेज रहा.
ब्रिटेन का ये रुख एक बार फिर ट्रंप को भड़काने वाला है. ईरान के साथ चले 40 दिन के युद्ध के दौरान भी ऐसे कई मौके आए जब ब्रिटेन ने साफ तौर पर अमेरिका का साथ नहीं दिया. सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं, फ्रांस, इटली, जर्मनी जैसे कई यूरोपीय देशों ने ईरान युद्ध को संवाद के जरिए सुलझाने की सलाह दी थी. जबकि फ्रांस ने तो अमेरिका को एयरस्पेस नहीं दिया तो इटली ने अमेरिका को युद्ध के दौरान अपना एयरबेस का इस्तेमाल करने से रोक दिया था.
इसी कारण ट्रंप ने अपने ताजा बयान में एक बार फिर से नाटो पर नाराजगी जाहिर की है और कहा है कि वो नाटो से निराश हैं.
ब्रिटेन नहीं देगा ट्रंप का साथ, साफ किया होर्मुज पर रुख
अमेरिकी नौसेना ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है. होर्मुज पर एक बार फिर अमेरिका-ईरान की जबर्दस्त भिड़ंत होने वाली है. ट्रंप ने आदेश दिया है कि होर्मुज अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और ईरान की मनमानी नहीं करने दी जाएगी. सेंटकॉम ने भी अपने बयान में दावा किया है कि सोमवार शाम 07 बजे से ट्रंप के निर्देशों का पालन किया जाएगा.
होर्मुज की नाकेबंदी को लेकर ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज की नाकेबंदी में मदद के लिए ब्रिटेन युद्धपोत भेजेगा. हालांकि ब्रिटेन ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया है. ब्रिटेन ने कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी में ब्रिटेन हिस्सा नहीं लेगा.
इससे पहले भी ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने अमेरिकी राष्ट्रपति से साफ कहा था कि ब्रिटेन, ईरान के खिलाफ युद्ध में उनका साथ नहीं देने वाला.
ब्रिटिश सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि, “ ब्रिटेन नेविगेशन की स्वतंत्रता और दुनिया की ऊर्जा के रणनीतिक मार्गों को खोलने के लिए हमेशा आवाज उठाएगा, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकलने वाले जहाजों को पूरी तरह से अवरुद्ध करने में अमेरिका की भागीदारी नहीं करेगा.”
“हम नौवहन की स्वतंत्रता और होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने का समर्थन करना जारी रखते हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था का समर्थन करने और देश के भीतर जीवन स्तर को बढ़ाने के लिए बहुत आवश्यक है.”
नाटो को कागजी शेर बताते हैं ट्रंप, होर्मुज पर बार-बार यूटर्न
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध में सहयोग न मिलने पर नाटो को कागजी शेर करार दिया है और कहा है कि वो “गठबंधन से अमेरिका के बाहर निकलने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं.” ट्रंप ने एक बार फिर से यूरोपीय सहयोगियों को धोखेबाज बताते हुए “अपनी सुरक्षा के लिए खुद लड़ने की चेतावनी दी है.”
होर्मुज पर ट्रंप स्थिर नहीं हैं. “कभी कहते हैं कि उन्हें होर्मुज से कोई लेना-देना नहीं, अमेरिका के पास बहुत तेल है. यूरोप को तेल चाहिए तो खुद जाकर होर्मुज में लड़े और तेल ले ले.”
ट्रंप के बयान के बाद जब यूरोप पर कोई फर्क नहीं पड़ा तो एक बार फिर से होर्मुज पर कब्जे की बात करने लगे.
अब जब ईरान होर्मुज पर टैक्स वसूलने लगा तो ट्रंप अपने बयान पर ज्यादा देर तक नहीं टिक पाए. और फिर होर्मुज की नाकेबंदी करने का ऐलान कर दिया.
ट्रंप कह रहे हैं कि उनके साथ होर्मुज नाकेबंदी में कई देश शामिल हैं, ब्रिटेन ने तो मना कर दिया. सवाल है कि कई देश कौन से हैं जो होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी में साथ आए हैं.
अमेरिका कर रहा होर्मुज की नाकेबंदी
इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल होने के कुछ घंटे बाद ही ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अमेरिकी नौसेना को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उन सभी जहाजों की पहचान करने और उन्हें रोकने का निर्देश दिया है जिन्होंने ईरान को टोल का भुगतान किया है. जो कोई भी अवैध टोल का भुगतान करेगा, उसे समुद्र में सुरक्षित आवागमन की अनुमति नहीं मिलेगी. ईरान को पैसा चाहिए और उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें परमाणु चाहिए. इसके अतिरिक्त हम पूरी तरह से तैयार और मुस्तैद हैं और हमारी सेना उचित समय पर ईरान के बचे-खुचे हिस्से को भी पूरी तरह से नष्ट कर देगी. मैं ईरान को पाषाण युग में भेजने की बात पर कायम हूं.”

