Breaking News Geopolitics India-China IOR TFA Exclusive

चीन के रडार पर मोदी का श्रीलंका दौरा, अंडमान से लेकर डिएगो गार्सिया तक अलर्ट

अगले महीने के शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा होने जा रही है. उससे पहले देश की सुरक्षा एजेंसियों के कान हिंद महासागर के देश में चीन की बढ़ती गतिविधियों से खड़े हो रहे हैं. खबर है कि श्रीलंका के सामरिक तौर से महत्वपूर्ण हम्बनटोटा बंदरगाह के करीब चीन एक बेहद शक्तिशाली रडार स्टेशन लगाने जा रहा है. इस रडार स्टेशन से चीन, अंडमान निकोबार से लेकर दक्षिण भारत में परमाणु संयंत्रों पर नजर रखने की तैयारी कर रहा है.

हंबनटोटा वही बंदरगाह है, जहां चीन के जासूसी जहाज मंडराते रहते हैं और भारत अपनी शिकायत दर्ज करा चुका है. ऐसे में सभी की निगाहें लगी हुई हैं क्या पीएम मोदी की यात्रा से श्रीलंका अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करने पर रोक लगाएगा.

ऐसा इसलिए, क्योंकि पिछले साल दिसंबर में जब श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पहली बार अपने देश की कमान संभालने के बाद भारत का दौरा किया था. उस दौरान, दिसानायके ने पीएम मोदी को भरोसा दिया था कि श्रीलंका की जमीन का उपयोग भारत के खिलाफ नहीं करने दिया जाएगा.

हंबनटोटा के करीब डोन्द्रा-बे में चीन के रडार स्टेशन की तैयारी

टीएफए को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, चीन ने हंबनटोटा से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर डोन्द्रा-बे के एक आईलैंड में अपने रडार स्टेशन को स्थापित करने की योजना बनाई है. इस टापू पर घना जंगल है. ऐसे में जंगल के बीच में चीन इस रडार स्टेशन को बनाने जा रहा है. श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से डोन्द्रा की दूरी करीब 160 किलोमीटर है.

माना जा रहा है कि इस रडार स्टेशन से चीन, अंडमान निकोबार में भारत की नौसेना (ट्राई-सर्विस कमांड) की गतिविधियों पर निगरानी रखने की फिराक में है. साथ ही यहां से मलक्का स्ट्रेट के लिए गुजरने वाले विदेशी कार्गो, कमर्शियल और जंगी जहाज पर भी नजर रखी जा सकती है.

खतरा इसलिए भी है क्योंकि इस रडार स्टेशन से चीन, दक्षिण भारत में कुडनकुलम और कलपक्कम परमाणु संयंत्रों पर भी सीधे नजर रख सकता है. हालांकि, ये सिविल न्यूक्लियर प्लांट हैं, फिर भी भारत कभी नहीं चाहेगा कि ऊर्जा से जुड़े किसी संवेदनशील डाटा की जानकारी चीन के हाथ पड़े.

अमेरिका के डिएगो ग्रासिया बेस पर भी रख सकता है नजर

खबर तो ये भी है कि चीन के इस रडार स्टेशन से हिंद महासागर में अमेरिका और इंग्लैंड के सामरिक डिएगो गार्सिया बेस की निगरानी की तैयारी है. हालांकि, चीन के रडार की रेंज की फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन हम्बनटोटा से डिएगो-गार्सिया की दूरी करीब 1500 किलोमीटर है. डिएगो-गार्सिया में अमेरिका के स्ट्रेटेजिक बॉम्बर का बेस है.

वर्ष 2023 में चीन ने दोन्द्रा में रडार लगाने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन इस पर रोक लगी हुई थी. इसी साल जनवरी के महीने में श्रीलंकाई राष्ट्रपति दिसानायके के बीजिंग दौरे से दोन्द्रा-बे में चीनी रडार स्टेशन लगाए जाने की खबर फिर से सामने आने लगी है.

हंबनटोटा में चीनी स्पाई शिप से पहले ही परेशान है भारत

दरअसल, वर्ष 2017 में श्रीलंका ने चीन का 1.40 बिलियन डॉलर का कर्ज ना चुकाने के चलते, हम्बनटोटा बंदरगाह को चीन को 99 साल की लीज पर दे दिया था. बंदरगाह का इस्तेमाल चीन के के कार्गो और दूसरे सिविलियन जहाज के रिफ्यूलिंग इत्यादि के लिए इस्तेमाल होना था. उस दौरान तत्कालीन श्रीलंकाई राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने आश्वासन दिया था कि हम्बनटोटा बंदरगाह का इस्तेमाल चीन अपने वाणिज्य और व्यापार के लिए करेगा. लेकिन पिछले कुछ सालों में चीन के स्पाई शिप यहां कई बार देखे गए हैं.

पहली बार चीन का स्पाई शिप युआन वांग-5 हम्बनटोटा में वर्ष 2022 में देखा गया था. उस दौरान बंगाल की खाड़ी में भारत एक अहम मिसाइल का परीक्षण करने जा रहा था. ऐसे में चीन का ये जासूसी जहाज, भारत की मिसाइल को ट्रैक करने और परीक्षण से जुड़े डाटा को जुटाने आया था.

चीन के जासूसी जहाज के कारण टालना पड़ता है मिसाइल टेस्ट

कई बार तो चीन की स्पाई शिप की मौजूदगी को देखते हुए भारत को अपने कई अहम मिसाइल टेस्ट को टालना तक पड़ गया था. हम्बनटोटा में चीन के स्पाई शिप की मौजूदगी का वर्ष 2023 में जब भारत ने कड़ा विरोध किया तो, श्रीलंका ने एक साल के लिए चीनी जहाज की एंट्री पर रोक लगा दी थी. ऐसे में चीनी जहाज ने श्रीलंका के बजाए मालदीव में डेरा जमाना शुरु कर दिया था.

लेकिन इस साल के शुरुआत से चीन के जहाज एक बार फिर हम्बनटोटा पहुंचने लगे हैं. चीन के स्पाई शिप से ज्यादा भारत को अब चीन के रडार स्टेशन से खतरा महसूस हो रहा है.

अप्रैल महीन के पहले हफ्ते मोदी जाएंगे श्रीलंका

प्रधानमंत्री मोदी के अप्रैल महीने में श्रीलंका दौरे के दौरान त्रिंकोमाली में एक सोलर पावर प्लांट को स्थानीय लोगों को समर्पित करेंगे. इस प्लांट को श्रीलंका ने एनटीपीसी (भारत) की मदद से तैयार किया है. साथ ही एक अन्य पावर प्रोजेक्ट के लिए भारत की प्राईवेट कंपनी को चुना गया है. ये प्रोजेक्ट पहले चीन की एक कंपनी को दिया गया था.

प्रधानमंत्री मोदी के कोलंबो दौरे की जानकारी देते हुए श्रीलंका के विदेश मंत्री विजेथा हेराथ ने अपने देश की संसद को निष्पक्ष विदेश नीति के बारे में बताया था. हेरथ के मुताबिक, अपनी विदेश नीति में श्रीलंका, किसी भी देश का पक्ष नहीं लेगा बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगा. (श्रीलंकाई राष्ट्रपति का मोदी को भरोसा, जमीन का उपयोग भारत के खिलाफ नहीं होने देंगे)


Warning: Version warning: Imagick was compiled against ImageMagick version 1692 but version 1693 is loaded. Imagick will run but may behave surprisingly in Unknown on line 0