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बलूचिस्तान में चीनी सेना की आहट, भारत से बलूचों ने मांगी मदद

फ्री बलूचिस्तान का नारा बुलंद करने वाले बलोच कार्यकर्ता मीर यार बलोच ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को खुला पत्र लिखकर सनसनीखेज दावा किया है. मीर यार बलोच ने दावा किया है कि चीन अगले कुछ महीनों में पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर सकता है.

मीर यार बलोच का कहना है कि अगर चीनी सेना बलूचिस्तान क्षेत्र में तैनात हो जाती है, तो न केवल बलूचिस्तान में बल्कि भारत के लिए भी एक गंभीर खतरा पैदा होगा. 

कुछ महीनों में बलूचिस्तान में आ जाएगी चीनी सेना, भारत के लिए होगी बड़ा खतरा- मीर यार बलोच

मीर यार बलोच ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें चीनी सैनिकों की तैनाती को लेकर भारत को आगाह किया है. मीर यार बलोच ने कहा, “बलूचिस्तान गणराज्य पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक गठबंधन को बेहद खतरनाक मानता है. हम चेतावनी देते हैं कि चीन ने पाकिस्तान के सहयोग से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को अपने अंतिम चरणों में पहुंचा दिया है.”

मीर यार बलोच लिखते हैं, “बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा, तो चीन वहां अपने सैनिक तैनात कर सकता है.”

पत्र में कहा गया कि “अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया और उन्हें पुराने तौर-तरीकों के अनुसार अनदेखा किया जाता रहा, तो यह पूरी तरह संभव है कि चीन आने वाले कुछ महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर दे. छह करोड़ बलूच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान, दोनों के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा और चुनौती होगी.”

एस जयशंकर के लिए मीर यार बलोच का खुला पत्र, ऑपरेशन सिंदूर में को बताया दृढ़ और साहसिक कदम

मीर यार बलोच ने कहा, “हम पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से मोदी सरकार द्वारा उठाए गए साहसिक और दृढ़ कदमों की सराहना करते हैं, विशेष रूप से पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवाद के अड्डों को निशाना बनाने और पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ की गई कार्रवाई की. ये उपाय अनुकरणीय साहस और क्षेत्रीय सुरक्षा और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.”

“बलूचिस्तान के लोगों ने पिछले 69 सालों से पाकिस्तान के राज्य कब्जे, राज्य प्रायोजित आतंकवाद और घोर मानवाधिकार अत्याचारों को सहा है. अब समय आ गया है कि इस नासूर बीमारी को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि हमारे राष्ट्र के लिए स्थायी शांति और संप्रभुता सुनिश्चित हो सके.”

मीर यार बलोच ने हिंगलाज माता मंदिर और संस्कृति की दी दुहाई

मीर यार बलोच लिखते हैं कि “माननीय डॉ. जयशंकर जी, बलूचिस्तान गणराज्य के 6 करोड़ देशभक्त नागरिकों की ओर से हम भारत के 140 करोड़ लोगों, संसद के दोनों सदनों, मीडिया, नागरिक समाज और सभी सम्मानित व्यक्तियों को नए साल 2026 की हार्दिक और सच्ची बधाई देते हैं. यह शुभ अवसर हमें उन गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वाणिज्यिक, आर्थिक, राजनयिक, रक्षा और बहुआयामी संबंधों पर विचार करने और उनका जश्न मनाने का अवसर प्रदान करता है, जिन्होंने सदियों से भारत और बलूचिस्तान को बांध रखा है. इन स्थायी संबंधों का उदाहरण हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) जैसे पवित्र स्थल हैं, जो हमारी साझा विरासत और आध्यात्मिक संबंधों के प्रतीक है.”

भारत सरकार से दोस्ती और आपसी हितों का अटूट समर्थन दोहराते हैं- मीर यार बलोच

मीर यार बलोच ने लिखा “बलूचिस्तान के लोगों की ओर से हम भारत और उसकी सरकार को दोस्ती, विश्वास और आपसी हितों को बढ़ावा देने में अपना अटूट समर्थन दोहराते हैं, जिसमें शांति, समृद्धि, विकास, व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, भविष्य की ऊर्जा चुनौतियां और छिपे हुए खतरों को कम करना शामिल है.”

बलोच करते हैं चीनी प्रोजेक्ट का विरोध

बलूचिस्तान के लोग शुरु आत से ही सीपीईसी प्रोजेक्ट का विरोध करते रहे हैं. यहां तक कि विद्रोही गुट बीएलए आए दिन पाकिस्तानी सेना और सशस्त्र बलों के अफसर और जवानों की जान लेता रहता है, उसके पीछे का कारण भी यहीं प्रोजेक्ट है. यहां तक की कई चीनी इंजीनियर्स और मजदूरों की भी जान जा चुकी है.

इसके बाद से ही पाकिस्तान से नाराज चीन की शी जिनपिंग सरकार ने कह दिया है कि अगर पाकिस्तान से स्थिति नहीं संभलती है, तो वहां चीनी सेना की तैनाती की जाएगी. लेकिन चीनी सेना की तैनाती का मतलब भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा का खतरा होना. इसलिए भारत भी सीपीईसी को खतरा मानता है.

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