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चीन में CIA की सरेआम सेंधमारी, अमेरिकी जासूस बनने का ऑफर

By Nalini Tewari

दुनिया की नंबर वन अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को चाहिए ऐसे जासूस, जो चीन की सच्चाई जानते हों, चीन के सीक्रेट जानते हों, चीन को लेकर अमेरिका को सावधान कर सकते हों. शी जिनपिंग के घर सेंध लगाने के लिए सीआईए ने बाकायदा एक वीडियो जारी करके ऐसे लोगों से संपर्क करने को कहा है, जो चीन के खिलाफ उनकी मदद कर सकते हों. 

सिर्फ इतना ही नहीं अपने मैंडरिन भाषा (चाइनीज़) में जारी वीडियो में सीआईए ने ये भी बताया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी से कैसे सीक्रेट तरीके से संपर्क कर सकते हैं. साथ ही सीआईए ने ये चेतावनी दी है कि जल्दबाजी कैसे खतरनाक हो सकती है. 

सीआईए का ये वीडिया चीन की खुफिया एजेंसी एमएसएस यानि मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी को खुला चैलेंज माना जा रहा है. 

अमेरिका को चाहिए चीन की जानकारी देने वाले जासूस

अमेरिकी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के 02 मिनट 06 सेकेंड के मैंडरिन भाषा में जारी एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है. चीनी भाषा (मैंडरिन) में जारी किए गए इस वीडियो में सीआईए ने खुलेआम उन लोगों को संपर्क करने के लिए कहा गया है, जो चीन की सच्चाई अमेरिका को बता सकते हैं और चीन के खिलाफ अमेरिका की जासूसी कर सकते हों. 

सीआईए ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर ये वीडियो शेयर किया है, जिसे चीन के लिए एक तरह से खुला चैलेंज माना जा रहा है. 

इस वीडियो में सीआईए ने ये भी बताया है कि कैसे उनसे संपर्क किया जा सकता है और किन तरीकों से चीनी या दूसरी खुफिया एजेंसियों से बचा जा सकता है.

सीआईए ने सिखाई स्टेप बाई स्टेप जासूसी, कैसे सुरक्षित रहकर देनी है जानकारी

वीडियो में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को संपर्क करने से पहले अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा पुख्ता करनी चाहिए. सीआईए ने सलाह देते हुए कहा है कि किसी भी तरह की लापरवाही और जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, नहीं तो ये खतरनाक होगा. 

सीआईए ने वॉर्निंद देते हुए कहा है कि उनसे संपर्क करने के लिए अपने निजी मोबाइल, लैपटॉप या अक्सर इस्तेमाल करने वाली डिवाइस का इस्तेमाल न करें. किसी सुरक्षित और कम निगरानी वाली जगह से संपर्क करें.

इंटरनेट कनेक्शन को सुरक्षित रखने के लिए वीपीएन या टीओआर ब्राउजर जैसे टूल्स का इस्तेमाल करने को कहा गया है, ताकि आईपी एड्रेस छिपा रहे और पहचान किसी को पता न चले.

संपर्क के लिए सीआईए की आधिकारिक वेबसाइट, डार्क वेब पर मौजूद उसका पोर्टल या फिर सिग्नल जैसे सुरक्षित मैसेजिंग ऐप्स का विकल्प बताया गया है. संपर्क करने के लिए एक लिंक भी दिया गया है.

अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने बताया है कि पहली बार ही जानकारी देने वाला शख्स अत्यधिक संवेदनशील जानकारी साझा न करे. सीमित जानकारी दे, जब सीआईए उत्तर देने के लिए कहे, या जानकारी मांगे तभी आगे की जानकारी शेयर की जाए.

मैसेज के बाद कैसे डिजिटल सबूत मिटाना है, ये भी सिखाया गया है.

चीन, उत्तर कोरिया और ईरान में जासूसों की ऑनलाइन भर्ती, सीआईए की रणनीति

चीन की खुफिया एजेंसी एमएसएस यानि मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी बेहद ही शातिर एजेंसी है. चीन से जुड़ी जानकारियां तभी देश से बाहर आ पाती हैं, जब बीजिंग चाहता है. यही हाल उत्तर कोरिया का भी है. उत्तर कोरिया की आंतरिक सुरक्षा इतनी मजबूत है, कि वहां की किसी को कुछ भनक तक नहीं लग पाती है. ऐसे में अमेरिका हमेशा से चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के खिलाफ जानकारी जुटाने के लिए तत्पर रहता है.

पिछले साल अक्टूबर में भी सीआईए ने चीन, ईरान और उत्तर कोरिया में जासूस भर्ती के लिए ऑनलाइन निर्देश जारी किए थे. एक ऐसा ही वीडियो पिछले साल भी सीआईए ने जारी किया था. जिसमें एक काल्पनिक कहानी दिखाई गई थी. वीडियो को फेसबुक, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर शेयर किए गए हैं. इसमें गुप्त तरीके से सीआईए तक पहुंचने की जानकारी दी गई थी.

सीआईए के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने कहा था कि “हमारा मुख्य काम राष्ट्रपति और नीति-निर्माताओं के लिए खुफिया जानकारी जुटाना है. इसके लिए हम ऐसे लोगों को भर्ती करते हैं, जो सीक्रेट चुराने में हमारी मदद कर सकें.” 

यह वीडियो उसी रणनीति का हिस्सा है. सीआईए का मानना है कि यह चीन में ऐसे लोगों तक पहुंचेगा जो अमेरिका के लिए जासूसी कर सकें. 

हालांकि चीन में एक्स, गूगल, फेसबुक जैसे मुख्य सोशल नेटवर्किंग साइट्स बंद हैं. चीन का खुद का अपना सिस्टम ग्रेट फायरवॉल है. ऐसे में वीपीएन के इस्तेमाल से ही चीन के लोग लुके-छिपे विदेश प्लेटफॉर्म तक पहुंचते हैं.

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