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कर्तव्य पथ पर सेना की व्यूह-रचना, EU के लीडर देखेंगे गणतंत्र दिवस पर प्रदर्शन

इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में यूरोप के नेताओं के समक्ष भारतीय सेना की व्यूह-रचना दिखाई पड़ेगी. इसके लिए सेना के खास भैरव बटालियन और लद्दाख स्कॉउट्स के सैनिकों से लेकर टैंक, तोप, रॉकेट और मिसाइल इस तरह से कर्तव्य पथ पर दिखाई पडेंगे, जैसा किसी जंग के मैदान में इस्तेमाल किया जाता है. 

इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड (26 जनवरी) में यूरोपीय संघ के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और कमिश्नर उर्सला वेन डेर लेयन मुख्य अतिथि हैं. ऐसे में परेड में यूरोपीय संघ के नौसैनिकों की एक टुकड़ी भी मार्च पास्ट करती आएगी. 

रक्षा सचिव ने बताया क्या है इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में खास

शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड से  जुड़ी जानकारी साझा करते हुए रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि इस वर्ष परेड को एक नए बैटल-अरे (रणभूमि व्यूह रचना) फॉर्मेट में दर्शाया जाएगा. सेना की ये व्यूह रचना ठीक वैसी होगी जैसाकि जंग के मैदान में दिखाई पड़ती है. 

परेड का मुख्य थीम, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 गौरवशाली वर्ष होने के साथ आत्मनिर्भर भारत भी है, ऐसे में परेड में अधिकांश हथियार और सैन्य उपकरण भी स्वदेशी नजर आएंगे. इनमें ब्रह्मोस, आकाश और एमआरसैम (मीडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल) के अलावा सुखोई,सी-295, लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) इत्यादि शामिल हैं.

वंदे मातरम और आत्मनिर्भरता है मुख्य थीम

रक्षा सचिव के मुताबिक, परेड में राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के झांकियों में भी वंदे मातरम–स्वतंत्रता का मंत्र और समृद्धि का मंत्र–आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखाई देगी. 

कर्तव्य पथ की परेड में सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी वंदे मातरम मुख्य थीम रहेगा, जिसमें 2500 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं. इस थीम का संगीत मशूहर संगीतकार एम एम कीरवानी ने दिया है. इस थीम की कमेंटरी की जिम्मेदारी बालीवुड अभिनेता अनुपम खेर को दी गई है. 

कुल 77 हजार दर्शक देख पाएंगे परेड

इस वर्ष आम नागरिकों के लिए रिकॉर्ड 33 हजार टिकट बेचे गए हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग कर्तव्य पथ पर परेड देख सकें. कर्तव्य पथ पर कुल 77 हजार लोग परेड देख पाएंगे. इनमें 10 हजार ऐसे विशेष मेहमान हैं, जिन्होनें स्टार्टअप, सेल्फ हेल्प ग्रुप इत्यादि के जरिए देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद की है. 

कर्तव्य पथ पर बने एनक्लोजर भी देश की अलग-अलग नदियों के नाम पर रखे गए हैं.

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