मिडिल ईस्ट में भड़के तनाव और युद्ध की आंच यूरोप के साथ-साथ हिंद महासागर तक पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की है. ईरान-अमेरिका का सैन्य संघर्ष लगातार विस्तार ले रहा है. ईरान लगातार खाड़ी देशों में बने अमेरिकी सैन्य बेस और सैनिकों को टारगेट कर रहा है तो अमेरिका ने भी सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद टारपीडो के जरिए ईरान के युद्धपोत को डुबो दिया है, जब वो श्रीलंका के करीब पहुंचा था.
श्रीलंकाई तट के पास ईरानी नौसेना पोत पर हमले के बाद स्थिति तनावपूर्ण है. बढ़ते तनाव के बीच पीएम मोदी और फ्रेंच प्रेसिडेंट के बीच हुई बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है. दोनों नेताओं ने शांति और स्थिरता के लिए बातचीत व कूटनीति पर लौटने की साझा चिंता व्यक्त की, जिसमें भारत-फ्रांस मिलकर काम करने को सहमत हुए.
दरअसल नाजुक परिस्थिति में फ्रांस ने भी ईरान के खिलाफ सैन्य कदम उठाया है. फ्रांस के राष्ट्रपति ने अपने परमाणु चालित विमानवाहक पोत चार्ल्स डे गॉल को बाल्टिक सागर से भूमध्य सागर की ओर तत्काल तैनाती का आदेश दिया है. फ्रांस का कहना है, कि ये यूरोपीय देशों के हितों की रक्षा करेगा.
पश्चिम एशिया की शांति लौटाने के लिए भारत-फ्रांस मिलकर करेंगे काम: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल साइट एक्स पर बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति मैक्रों से बात की है. पीएम मोदी ने लिखा, “आज अपने दोस्त राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की. हमने पश्चिम एशिया में बदलते हालात और बातचीत और कूटनीति पर लौटने की जरूरत पर अपनी साझा चिंताओं पर चर्चा की. हम इस इलाके में शांति और स्थिरता को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे और कोशिशों को कोऑर्डिनेट करेंगे.”
ईरान के खिलाफ जंग में उतरने के लिए तैयार फ्रांस
28फरवरी को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के बाद ईरानी सेना ने खाड़ी देशों को टारगेट किया. इस दौरान साइप्रस में ब्रिटिश रॉयल एयरफोर्स पर भी ड्रोन से हमले की कोशिश की गई थी. जिसके बाद ब्रिटेन के साथ फ्रांस और जर्मनी भी आ गए. साइप्रस यूरोपीय संघ का सदस्य है और फ्रांस ने हाल ही में उसके साथ रणनीतिक साझेदारी भी की है. मैक्रों ने फौरन अपने परमाणु चालित विमानवाहक पोत चार्ल्स डे गॉल को बाल्टिक सागर से भूमध्य सागर में तैनात कर दिया.
मैक्रों ने कहा कि “चार्ल्स डे गॉल अपने एयर विंग (हवाई दस्ते) और उसे सुरक्षा देने वाली फ्रिगेट जहाजों के साथ जाएगी.”
संघर्ष शुरु होने के बाद 08 राष्ट्राध्यक्षों से बात कर चुके हैं पीएम मोदी
युद्ध की शुरुआत के बाद से पीएम मोदी लगातार शांति की पहल कर रहे हैं. पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया के आठ नेताओं से बात की है. पीएम मोदी ने जिन नेताओं से बात की है, उनमें यूएई, इजरायल, सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन, ओमान, कुवैत और कतर के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं. बातचीतों में पीएम मोदी ने क्षेत्रीय संप्रभुता और अखंडता के उल्लंघन की निंदा की, संवाद और कूटनीति के जरिए शांति बहाल करने की तत्परता पर बल दिया है.
हिंद महासागर में अमेरिका ने ईरानी युद्धपोत को डुबोया, भारत से लौट रहा था
अमेरिकी नौसेना ने भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेकर लौट रहे ईरानी युद्धपोत डेका पर हमला किया है. जिस वक्त ये अटैक हुई ईरानी फ्रिगेट श्रीलंका के तट के पास था. नौसैनिकों ने श्रीलंका से मदद मांगी, जिसके बाद श्रीलंकाई नेवी ने राहत बचाव शुरु किया. इस घटना में कम से कम 84 नाविकों की मौत हो गई, और 32 बचे हुए लोगों को श्रीलंकाई अधिकारियों ने बचाया. श्रीलंका की नेवी ने कहा कि उसे 4 मार्च को सुबह 5:08 बजे जहाज़ से एक डिस्ट्रेस सिग्नल मिला. ईरानी जंगी जहाज पर 180 लोग सवार थे.
इस घटना के एक दिन बाद पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति के बीच हुई बातचीत को कूटनीतिक महत्व रखती है. दोनों नेताओं का मानना है कि युद्ध समाप्त होना चाहिए और क्षेत्र में शांति आनी जरूरी है.

