नई दिल्ली में चल रहे एआई समिट में रोबोडॉग को लेकर विवाद हो गया है. ग्रेटर नोएडा के गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एआई समिट एक्सपो तुरंत खाली करने को कहा गया है. गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक्सपो में रोबोटिक डॉग को डिस्प्ले किया था.
इस रोबोडॉग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. जिस रोबोडॉग को गलगोटिया ने इन हाउस बनाने का दावा किया था, बताया जा रहा है कि वो चीनी कंपनी द्वारा बनाया गया है.
एआई समिट से गलगोटिया यूनिवर्सिटी को निकाला गया बाहर
नई दिल्ली में चल रहे एआई इम्पैक्ट समिट में गलगोटिया के के पवेलियन में एक रोबोट डॉग दिखाया गया था. इस ओरियन नाम दिया गया था. सोशल मीडिया पर इस रोबोट का वीडिया जमकर वायरल हुआ था. वायरल वीडियो में यह कहा गया था कि ये एआई जेनेरेटेड डॉग उनके सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने बनाया है.
इस रोबोट को लेकर सवाल खड़े किए गए. अब विवाद बढ़ने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एआई समिट एक्सपो खाली करने को कहा गया.
एआई ऑब्जर्वर्स ने कहा, ये चीनी रोबोट बाजार में मिलता है
समिट के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने जिस रोबोटिक डॉग को पेश किया, उसकी पहचान चीनी रोबोट यूनिट्री गो टू के तौर पर हुई है, जो चीनी रोबोटिक्स फर्म यूनिट्री रोबोटिक्स का बनाया हुआ एक कमर्शियली उपलब्ध मॉडल है.
सोशल मीडिया में कुछ टेक यूजर्स और इंडस्ट्री ऑब्जर्वर्स ने कहा कि यह डिवाइस चीन के कमर्शियल मॉडल से मिलता-जुलता है, जो पहले से बाजार में उपलब्ध है.
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी तंज कसा है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा, एआई इम्पैक्ट समिट में चीनी प्रोडक्ट शोकेस किए जा रहे हैं.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने रोबोडॉग पर दी सफाई
किरकिरी होने और एक्सपो से बाहर किए जाने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने सफाई पेश की है. गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. ऐश्वर्या श्रीवास्तव ने कहा, “हमने कभी दावा नहीं किया कि हमने इसे (रोबोडॉग) बनाया है, यह सिर्फ हमारे एआई इन्वेस्टमेंट का एक हिस्सा था. इसे बहुत गलत तरीके से समझा गया.”
इससे पहले गलगोटिया ने इस एक प्रोपेगेंडा बताते हुए कहा, रोबोटिक प्रोग्रामिंग स्टूडेंट्स को एआई एप्लिकेशन बनाना सिखाने की उसकी कोशिश का हिस्सा है, जिससे वे दुनिया भर में मौजूद टूल्स और रिसोर्स का इस्तेमाल करके रियल-वर्ल्ड स्किल्स डेवलप और इस्तेमाल कर सकें.
“हम गलगोटिया के फैकल्टी और स्टूडेंट्स, हमारी यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रोपेगैंडा कैंपेन से बहुत दुखी हैं. हम साफ-साफ कहना चाहते हैं कि रोबोटिक प्रोग्रामिंग हमारी कोशिश का हिस्सा है ताकि छात्र एआई प्रोग्रामिंग सीख सकें और दुनिया भर में मौजूद टूल्स और रिसोर्स का इस्तेमाल करके रियल वर्ल्ड स्किल्स डेवलप और डिप्लॉय कर सकें, क्योंकि एआई टैलेंट डेवलप करना आज के समय की जरूरत है.”

