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गाजा बोर्ड Peace नहीं बवाल, फ्रांस ने ठुकराया-इजरायल नाराज

By Nalini Tewari

सवालों के घेरे में है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “गाजा बोर्ड ऑफ पीस”. फ्रांस और कनाडा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस न्योते को ठुकरा दिया है, जिसमें दोनों देशों को बोर्ड में शामिल करने के लिए कहा गया था. 

कनाडा ने बोर्ड के सदस्य के लिए रखी गई 1 अरब डॉलर (नौ हजार करोड़ रु.) फीस को गलत बताया है तो खुद इजरायल ने भी इस बोर्ड पर यकीन नहीं है, वजह है ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर. इजरायली मंत्रियों ने कहा है कि कुशनर पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि वो इजरायल का भला नहीं सोचते हैं.

फ्रांस ने गाजा बोर्ड ऑफ पीस का सदस्य बनने से मना किया, कनाडा ने फीस पर उठाए सवाल

ट्रंप ने जनवरी में गाजा पट्टी में स्थायी शांति, पुनर्निर्माण और अस्थायी शासन की निगरानी के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बनाने का एलान किया. जिसे लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के कई देशों के नेताओं को अपने प्रस्तावित ‘गाजा शांति बोर्ड’ में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी को भी इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया है. लेकिन भारत कोई भी उत्तर देने में जल्दबाजी नहीं दिखा रहा.

वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप के न्योते को ठुकरा दिया है. मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों और ढांचे के सम्मान को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए फिलहाल शामिल होने से इनकार किया है. फ्रांस की ओर से कहा गया है कि यह बोर्ड मूल रूप से युद्धग्रस्त गाजा के पुनर्निर्माण की देखरेख के लिए बना है लेकिन चार्टर में इसकी भूमिका को कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र तक सीमित नहीं किया गया है.

वहीं कनाडा बोर्ड में शामिल होने के लिए पेमेंट नहीं करने का फैसला किया है. बताया जा रहा है कि कनाडाई प्रधान मंत्री मार्क कार्नी इस संस्था में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार करेंगे, लेकिन कनाडा बोर्ड में सीट के लिए पेमेंट नहीं करेगा, अगर बोर्ड फीस मांगी जाती है तो.

ट्रंप के दामाद पर इजरायल ने निकाली भड़ास, कहा, कुशनर इजरायल के हितैषी नहीं हैं 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाली बोर्ड ऑफ पीस में तुर्किए और कतर के शामिल होने से इजरायल ने कड़ा विरोध जताया है. इजरायली सुरक्षा कैबिनेट इसके लिए ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर को जिम्मेदार ठहराया है. इजरायल ने कहा है कि बोर्ड में उस तुर्किए को शामिल किया जा रहा है जिसके हमास के साथ संबंध हैं. 

इजरायली सुरक्षा कैबिनेट में मंत्रियों ने कहा है कि कुशनर के निजी संबंध बोर्ड ऑफ पीस के स्ट्रक्चर को प्रभावित कर रहे हैं. कुशनर के अरब नेताओं के साथ करीबी राजनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं जिस कारण वो अब भी मुश्किलें पैदा कर रहे हैं. मंत्रियों का कहना है कि कुशनर ने 2020 में इजरायल की संप्रभुता की घोषणा को ‘पटरी से उतार दिया था. एक मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि कुशनर के ‘विश्व शांति को लेकर कुछ कल्पनात्मक विचार’ हैं, जो हमेशा इजरायल के हितों से मेल नहीं खाते. 

तुर्किए के विदेश मंत्री को बोर्ड में शामिल करना रेडलाइन पार करने जैसा- इजरायल

इजरायल का कहना है कि अगर तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान को किसी केंद्रीय भूमिका में शामिल किया गया तो यह एक ‘रेड लाइन’ पार करने जैसा होगा. तुर्की को जेरुशलेम में गाजा के मैनेजमेंट के लिए न तो निष्पक्ष माना जाता है और न ही वैध, क्योंकि उसके हमास के साथ राजनीतिक और वैचारिक संबंध हैं. 

इजरायली पीएम नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे. गाजा पट्टी में तुर्की या कतर के सैनिकों की तैनाती नहीं होगी.

तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन हमेशा से इजरायल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते रहे हैं. ऐसे में इजरायल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए.

इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गाजा को ‘कार्यकारी बोर्ड’ की जरूरत नहीं, बल्कि हमास को पूरी तरह खत्म करने और बड़े पैमाने पर खुद से पलायन की जरूरत है.

ट्रंप को उत्तर देने की जल्दबाजी में नहीं भारत, रूस, ब्रिटेन, ईयू और अन्य देशों ने क्या कहा

ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी को भी बोर्ड में शामिल होने के लिए न्योता भेजा है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने चिट्ठी को सोशल मीडिया पर साझा किया है. हालांकि भारत की ओर से इस बारे में कोई उत्तर नहीं दिया गया है. न ही भारत जल्दबाजी में दिख रहा है. कूटनीतिक समीक्षा के बाद ही भारत निर्णय लेगा कि बोर्ड में शामिल होना चाहिए या नहीं.

वहीं रूस ने निमंत्रण मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि वह प्रस्ताव के विवरणों का अध्ययन कर रहा है और स्पष्टीकरण चाहता है,

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा, कि उनका देश सहयोगियों के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा है, लेकिन अभी समर्थन नहीं दिया है. 

यूरोपीय संघ ने भी कहा है कि सदस्य देशों के बीच बातचीत जारी है और अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

मोरक्को के राजा और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने बोर्ड सदस्य बनने की हामी भर दी है. हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन ने भी इसे सम्मान बताते हुए स्वीकार किया है. वियतनाम और कजाकिस्तान ने भी बोर्ड में शामिल होने पर सहमति जता दी है. वहीं पाकिस्तान भी न्योता पाकर उछल रहा है.

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