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फिलिस्तीन में हमास आतंकी लड़ेंगे चुनाव, ट्रंप का इजरायल को गच्चा?

By Nalini Tewari

क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में बना गाजा पीस बोर्ड सिर्फ एक दिखावा है. क्या इस पीस बोर्ड की आड़ में अमेरिका, अपने दोस्त इजरायल के पीठ में छुरा घोंप रहा है. 

सवाल इसलिए उठ रहे है क्योंकि अमेरिका और हमास आतंकियों के बीच हुई है एक डील. डील ये कि हमास आतंकी हथियार छोड़कर राजनीति में प्रवेश कर सकेंगे. यानि कुछ वर्षों बाद अगर फिलिस्तीन में हमास आतंकी ही प्रधानमंत्री बन जाए तो इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा.   

अब तक अमेरिका हमास आतंकियों को दूसरे जगह स्थापित करने की बात कहता था. लेकिन अब हमास आतंकियों को एक मौका देने की बात कही गई है. यानि हथियार छोड़कर आतंकी चुनाव में कूद सकेंगे.

फिलिस्तीन में अपनी सरकार बनाने की कोशिश में हमास

बताया जा रहा है कि गाजा में पीस बोर्ड का काम खत्म होने के बाद आम चुनाव कराना प्रस्तावित है. नई डील के तहत हमास को इस चुनाव में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी. अब तक अमेरिका हमास को फिलिस्तीन से बाहर ले जाने की बात करता था. लेकिन यह पहली बार है, जब अमेरिका ने हमास को राजनीति में आने की मंजूरी दे दी है. 

अमेरिका और हमास के बीच जो डील हुई है, उसमें चरणबद्ध तरीके से हमास के लड़ाके अपना हथियार जमा करेंगे. इसके बाद हमास के सभी लड़ाके सियासत में आ सकेंगे.

हमास को फिलिस्तीन में ही रहने देने की कवायद, अरब देश कर रहे फील्डिंग 

कतर और मिस्र की कोशिश है कि हमास को फिलिस्तीन में ही रहने दिया जाए. हमेशा से कतर और मिस्र ही इजरायल और हमास के बीच मध्यस्थता करते रहे हैं. इजरायल ने डायरेक्ट कभी हमास से बात नहीं की है, इन्हीं के माध्यम से बात की गई है. दरअसल गाजा में हमास समर्थकों की तादाद बहुत अधिक है. अगर हमास को बाहर किया गया तो स्थिति बिगड़ने का दर्द है. गाजा पट्टी के लोगों का मानना है कि हमास के कारण ही इजरायल से लड़ा जा सकता है. 

2024 में हमास चीफ इस्माइल हानिया की मौत के बाद से हमास ने किसी चीफ के नाम का खुलासा नहीं किया है. लेकिन अल हय्या को हमास का नया प्रमुख चुना जा सकता है. क्योंकि सीजफायर में अल हय्या ने बैकडोर भूमिका निभाई थी. 

ट्रंप ने फिलिस्तीन के राष्ट्रपति को किया इग्नोर, पुतिन से मिलने पहुंचे राष्ट्रपति

फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास और अमेरिकाी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बिलकुल नहीं बनती. यहां तक की पिछले साल संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम से ठीक पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने महमूद अब्बास का वीज़ा रद्द कर दिया था. 

अब गाजा पीस बोर्ड और उसके डेवलपमेंट कमेटी में अमेरिका ने राष्ट्रपति महमूद को शामिल नहीं किया है. इतना ही नहीं, उनके पद को भी अमेरिका ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. 

इस बीच गुरुवार को राष्ट्रपति महमूद अब्बास मॉस्को पहुंच गए और वहां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. दोनों के बीच गाजा पीस बोर्ड को लेकर अहम बातचीत हुई है. 

गाजा पट्टी में तेजी से वापस लौट रहे हैं हमास आतंकी

इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने इस बात की आशंका जाहिर की है. सीजफायर के तहत जिन इलाकों से इजरायली सेना ने वापसी की, वहां एक बार फिर से हमास के आतंकी लौट आए हैं. 

दरअसल इजरायली सेना लगातार हमास आतंकियों का खात्मा कर रही थी, लेकिन अमेरिका की मध्यस्थता में हुए सीजफायर और बंधकों के फंसे होने के कारण हमास के लड़ाके, कमांडर और नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुए थे. इजरायली सेना के हटते ही जिन इलाकों में फोर्स नहीं थी, वहां हमास ने तेजी से वापसी की. 

आईडीएफ ने काफी हद तक गाजा पट्टी में हमास की सुरंगों और अंडरग्राउंड कंस्ट्रक्शन को खत्म कर दिया. लेकिन सुरंगें, अंडरग्राउंड स्टोरेज और आम इमारतों में छुपाए गए हथियार अभी भी मौजूद हैॆ. जो हमास के लड़ाकों के पास वापस लौट आए हैं. 

हमास के 20000 से ज्यादा लड़ाके, तुर्की-कतर है मददगार

इजरायली सेना यानि आईडीएफ के मुताबिक तुर्किए और कतर वो देश हैं जो हमास के आतंकियों को हथियार मुहैया कराते हैं. गाजा और वेस्ट बैंक के अलावा, हमास के कार्यालय तुर्किए और कतर में भी है.आईडीएफ का मानना है कि इस वक्त हमास के 20 हजार से ज्यादा लड़ाके हैं. ये लड़ाके अत्याधुनिक हथियारों को संचालित करने में माहिर हैं. हमास के पास 6 हजार से ज्यादा रॉकेट हैं. हमास के लड़ाकों के पास एंटी-टैंक मिसाइलें, ग्रेनेड, और आईईडी जैसे हथियार भी मौजूद हैं.

अब हमास आतंकियों के हथियार छोड़कर चुनाव लड़ने की बात सामने आ रही है. ऐसे में अगर हमास चुनाव में उतरता है, तो वो पूरी कोशिश करेगा की सरकार उसी की बने. ऐसे में दुनिया को हैरानी नहीं होनी चाहिए कि भविष्य में फिलिस्तीन का राष्ट्रपति कोई हमास का आतंकी ही हो.

क्या है ट्रंप का गाजा पीस बोर्ड, जिसपर उठ रहे सवाल, कई बड़े देशों ने किया किनारा

गाजा और इजरायल में जंग रुकवाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसके पुनर्निर्माण की बात कही थी. जिसके बाद गाजा में विकास बोर्ड की स्थापना की गई है जो गाजा में शांति स्थापित करने के साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए काम करेगा.

इजरायल के एक्शन के बाद गाजा पट्टी पूरी तरह से उजाड़ है, और लाखों लोगों के पास रिहायश नहीं है.

ट्रंप खुद इस पीस बोर्ड के अध्यक्ष हैं. बोर्ड के स्थायी सदस्य बनने के लिए 1 बिलियन डॉलर देने होंगे. ट्रंप के इस बोर्ड से फ्रांस, चीन, कनाडा, नॉर्वे, स्वीडन ने शामिल होने से मना कर दिया है. भारत ने भी ट्रंप के न्योते पर कोई जवाब नहीं दिया. वहीं रूस ने एक शर्त रखी है कि अमेरिका ने रूस की संपत्ति जब्त कर रखी है. अगर उस पर से बैन हटाया जाता है तो वो गाजा के पुनर्निमाण के लिए 1 बिलियन डॉलर देने को तैयार हैं.

बोर्ड के सदस्य बनने के लिए बहरीन, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान, मोरक्को, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, पाकिस्तान, पराग्वे कतर मंगोलिया तैयार हुए हैं.

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