लैटिन अमेरिकी देशों के पीछे पड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, वेनेजुएला के तेल नियंत्रण के बाद क्यूबा को धमकाया है. लेकिन इस दबाव के बीच छोटे देश क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज कैनेल बर्मुडेज ने ट्रंप को सुनाते हुए कह दिया है कि फैसला एक ही है मातृभूमि या मौत, इस खतरनाक तरीके में हम ही जीतेंगे.
दरअसल ट्रंप की एक साथ ग्रीनलैंड, क्यूबा, कोलंबिया, कनाडा और ईरान के खिलाफ खतरनाक रणनीति अपना चुके हैं. ईरान में किसी भी वक्त सैन्य एक्शन की तैयारी है तो बाकी देशों पर टैरिफ के माध्यम से आर्थिक दबाव बनाए हुए हैं.
क्यूबा के राष्ट्रपति की ट्रंप को दो टूक, झुकने से किया मना
कैरिबियाई सागर में स्थित देश क्यूबा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति आक्रामक हैं. वेनेजुएला के बाद क्यूबा पर नियंत्रण की कोशिश में हैं ट्रंप. टैरिफ लगाने की धमकी के बीच क्यूबा के राष्ट्रपति ने ट्रंप पर हमला बोला है.
क्यूबा के राष्ट्रपति बर्मुडेज ने कहा, कि “ट्रंप प्रशासन बल प्रयोग के जरिए अपनी विदेश नीति थोपने का खतरनाक तरीका अपना रही है. यह तय करने की कोशिश की जा रही है कि कौन से देश क्यूबा के साथ व्यापार कर सकते हैं. क्यूबा इस नए हमले का दृढ़ता, शांति और इस विश्वास के साथ सामना करेगा कि तर्क पूरी तरह से हमारे पक्ष में है.”
अपनी महात्वाकांक्षा पूरी करने के लिए खतरनाक तरीका अपना रहा अमेरिका: क्यूबा
राष्ट्रपति बर्मुडेज ने अपने पोस्ट में कहा, “हम अपने देश को ईंधन सप्लाई पर पूरी तरह से नाकाबंदी लगाने के अपने इरादे में क्यूबा के खिलाफ संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार द्वारा किए गए नए हमले की कड़ी से कड़ी निंदा करते हैं. ट्रंप प्रशासन बल के इस्तेमाल के जरिए देश की विदेश नीति चलाने और साम्राज्यवादी वर्चस्व सुनिश्चित करने की अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का एक खतरनाक तरीका अपना रहा है.”
क्यूबा के राष्ट्रपति ने कहा, “फैसला एक है: मातृभूमि या मौत! हम जीतेंगे!”
वेनेजुएला को सुरक्षा देता था क्यूबा, अमेरिकी अटैक में मारे गए थे 30 से ज्यादा क्यूबा के सैन्य अधिकारी
वेनेजुएला में हमेशा से क्यूबा के सैन्य अधिकारियों की तैनाती थी. राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को क्यूबा से सुरक्षा मिलती थी. मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने सीधे-सीधे क्यूबा को धमकाया था. ट्रंप ने कहा था कि “क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला के तेल और वित्तीय सहायता पर निर्भर था लेकिन अब हालात बदल गए हैं. अभी वक्त है, इससे पहले कि देर हो जाए समझौता कर लो.”
ट्रंप ने लिखा कि “क्यूबा कई सालों तक तेल के बदले वेनेजुएला के तानाशाहों को सुरक्षा देता था. अब यह सिलसिला खत्म हो चुका है, अब वेनेजुएला को उन गुंडों और वसूली करने वालों की जरूरत नहीं है. इन लोगों ने वेनेजुएला को लंबे समय तक बंधक बनाए रखा था. अब वेनेजुएला संयुक्त राज्य अमेरिका के पास है. अमेरिका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है.”
रूस के करीबी क्यूबा को दुश्मन मानता है अमेरिका
अमेरिका और क्यूबा के संबंध 1959 की क्रांति के बाद से बेहद तनावपूर्ण रहे हैं. दशकों से तनावपूर्ण संबंधों को ओबामा प्रशासन के दौरान सामान्य करने की कोशिश की गई थी, लेकिन वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई के बाद ये संबंध बेहद संवेदनशील मोड़ पर हैं.
वेनेजुएला में हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान क्यूबा के 32 अफसर मारे गए थे. इसके अलावा अमेरिका ने क्यूबा के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं.
वहीं वेनेजुएला की तरह ही क्यूबा और रूस के बीच संबंध मजबूत हैं. रूस और क्यूबा ने आर्थिक और सैन्य सहयोग हैं. रूस क्यूबा को सैन्य, आर्थिक और ऊर्जा सहायता प्रदान कर रहा है.
अमेरिका को रोके भारत, क्यूबा ने की मांग
हाल ही में भारत में क्यूबा के राजदूत जुआन कार्लोस ने कहा है कि भारत को अमेरिका की मनमानी के खिलाफ खुलकर बोलना चाहिए.
राजदूत ने कहा, “ट्रंप क्यूबा के खिलाफ नए आदेशों का ऐलान कर रहे हैं क्योंकि उनका मकसद क्यूबा को आर्थिक रूप से संकट में डालना, क्यूबा की अर्थव्यवस्था की किसी भी वित्तीय आय को रोकना है. वे क्यूबा को होने वाली सभी पुरानी आपूर्ति पर रोक लगा रहे हैं, न केवल वेनेजुएला से, बल्कि रूस से, और अन्य सभी देशों से भी. साथ ही, अमेरिकियों के क्यूबा जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.”
राजदूत ने कहा, “मुझे लगता है कि हर कोई अमेरिकी सरकार को यह संदेश भेजकर योगदान दे सकता है कि सैन्य आक्रामकता, किसी संप्रभु देश के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई कभी भी आसान नहीं होगी और न ही यह हमारी लंबित समस्याओं को हल करने या समझने का कोई तरीका होगा, न तो वेनेजुएला के साथ, न ही क्यूबा के साथ.”

