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शिकार के जून… ईरान पर हमले से पहले USS गेराल्ड मुसीबत में

By Nalini Tewari

अवधी में एक कहावत प्रचलित है, कि “शिकार के जून, शिकारी ****”. मतलब ये कि जंगल में शिकार सामने हो और शिकारी को शौचालय भागना पड़ जाए. कुछ यही हाल इन दिनों अमेरिका का है, क्योंकि ईरान के साथ जंग के मुहाने पर अमेरिकी सैनिक शौच के लिए लंबी लंबी कतारों में लगे हुए हैं.

जरा सोचिए ईरान-अमेरिका में युद्ध छिड़ा हो, जिन सैनिकों को युद्ध के मैदान में होना चाहिए वो ऐन वक्त पर टॉयलेट भाग रहे हो. सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन ये सच है.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक इशारे पर ईरान पर अटैक करने के लिए  भूमध्य सागर में डेरा डाले अमेरिकी सैनिक टॉयलेट के लिए तरस रहे हैं. दुनिया के सबसे खतरनाक और घातक यूएस नेवी के उन्नत न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट यूएसएस गेराल्ड आर.फोर्ड में हजारों नौसैनिकों की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उससे अमेरिका की खिल्ली उड़ाई जा रही है. 

यूएसएस गेराल्ड की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उसमें शौच के लिए अमेरिकी नौसैनिकों की लंबी कतारें लग रही हैं. हर सैनिक का नंबर 45 मिनट से 1 घंटे के बाद आ रहा है. 

सोशल मीडिया पर अमेरिकी सेना को जमकर ट्रोल किया जा रहा है, कि टॉयलेट जाने को परेशान सैनिक क्या खाक ईरान पर अटैक करेंगे. तो कोई कह रहा है कि दुनिया की नंबर 1 आर्मी को देखो.

ईरान के करीब डेरा डाले दुनिया के सबसे महंगे वॉरशिप में टॉयलेट खराब

ईरान पर हमला करने के लिए ईरान के करीब पहुंचे अमेरिकी सैनिकों की इन दिनों हालत पतली हो गई है. हजारों सैनिकों के सामने टॉयलेट जाने का संकट है. ये वो अमेरिकी सैनिक हैं, जिनकी तैनाती दुनिया के सबे महंगे न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट यूएसएस गेराल्ड आर.फोर्ड पर है.

करीब 13 अरब डॉलर यानी 1.18 लाख करोड़ रुपये की लागत से बने इस जहाज पर 4,600 नाविकों को रखने की क्षमता है. ईरान पर सैन्य एक्शन के इरादे और दबाव बनाने के लिए इसे भूमध्य सागर भेजा गया है. खुलासा हुआ है कि ऐसे में जब ईरान पर हमला किया जाना है, तो यूएसएस गेराल्ड आर.फोर्ड काफी शौचालय खराब पड़े हैं. यानी मौजूदा समय में पर्याप्त कार्यशील बाथरूम नहीं हैं, जिससे नौसैनिकों को लंबी लाइन और असुविधा से गुजरना पड़ रहा है.

बताया जा रहा है कि जहाज के वैक्यूम कलेक्शन, होल्डिंग एंड ट्रांसफर सिस्टम से जुड़ी समस्या के कारण दिक्कत बढ़ गई है. युद्धपोत पर 650 शौचालय हैं, जिसकी वजह से पाइप संकरे पड़ जाते हैं, बार-बार क्लॉगिंग और ब्रेकडाउन होता है. एक छोटी वाल्व खराब होने पर पूरे जोन के शौचालय बंद हो जाते हैं. ऐसे में कई बार 90% शौचालय काम नहीं करते, जिससे नाविकों को 45 मिनट तक कतार में इंतजार करना पड़ रहा है.

मानसिक संतुलन खो रहे अमेरिकी नौसैनिक, बीमार पड़ रहे

यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड जहाज जून 2025 से समुद्र में है. सैनिक 11 महीने से अलग-अलग महासागरों में तैनात है. लंबे समय से परिवार से दूर हैं.  अब बाथरूम की समस्या से मानसिक तनाव में आ रहे हैं. दुनिया का सबसे शक्तिशाली विमानवाहक जहाज दुश्मन से पहले अपने शौचालयों से जूझ रहा है. युद्ध की तैयारियों के बीच अमेरिकी नौसैनिकों के लिए यह बड़ी समस्या बन गया है. 

नौसैनिकों में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश है तो ये मामला सामने आने के बाद पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) की थू-थू हो रही है. 

कई बार शिकायतें, मरम्मत के बिना ही ईरान फ्रंट पर भेजा गया

बताया जा रहा है कि साल 2023 से अब तक 42 बार शौचालयों की मरम्मत के लिए बाहरी मदद मांगी गई. साल 2025 में 32 बार शिकायत की गई. एक ईमेल में चार दिनों में 205 ब्रेकडाउन दर्ज हुए, बावजूद इसके समस्या को दूर नहीं किया जा सका है लिहाजा इंजीनियरिंग टीम को 19 घंटे की शिफ्ट करनी पड़ रही है. 

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि समुद्र में तैनाती के दौरान शौचालयों की पूरी तरह मरम्मत असंभव है,क्योंकि बड़ी मरम्मत के लिए जहाज को डॉकयार्ड लौटना पड़ता है.

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