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खामेनेई की मौत पर भारत की संवेदना, विदेश सचिव पहुंचे ईरानी दूतावास

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत पर भारत ने संवेदना जताई है. भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी दूतावास पहुंचकर खामेनेई के निधन पर शोक जताया है. और उत्तर पुस्तिका में हस्ताक्षर करके संवेदनाएं दर्ज की हैं. 28 फरवरी को ईरान की राजधानी तेहरान में इजरायल और अमेरिका की एयरस्ट्राइक में खामेनेई मारे गए थे. इजरायली वायुसेना ने खामेनेई के घर पर ताबड़तोड़ बम गिराए थे, जिसमें खामेनेई के साथ-साथ ईरान के सभी बड़े सैन्य अधिकारियों की मौत हुई थी.

भारत-ईरान के अच्छे संबंधों के कारण विपक्ष खामेनेई की मौत पर बयान न दिए जाने पर सवाल खड़े कर रहा था. खुद कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने भी सरकार पर सवाल खड़े किए थे. खामेनेई की मौत के तकरीबन 6 दिन बाद विदेश सचिव खुद नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचे और ईरान के साथ एकजुटता और सहानुभूति व्यक्त की. भारत की प्रतिक्रिया को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

28 फरवरी को मारे गए थे ईरान के सुप्रीम लीडर

28फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त ऑपरेशन के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को मार दिया. ईरानी सुप्रीम लीडर के घर पर बी 2 बॉम्बर और लड़ाकू विमानों से बम बरसाए गए. अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की सटीक जानकारी के बाद ये ऑपरेशन किया गया था. जिस वक्त बम गिराए गए अयातुल्ला खामेनेई के साथ ईरानी सेना के सीडीएस, आईआरजीसी के चीफ समेत सभी बड़े अधिकारी मौजूद थे, खामेनेई एक बड़ी बैठक कर रहे थे, उसी दौरान ये ऑपरेशन किया गया.

इस सैन्य ऑपरेशन में सिर्फ खामेनेई ही नहीं तकरीबन 48 सैन्य अधिकारी और नेता मारे गए. खामेनेई की पत्नी और बहू की भी मौत हो गई थी.

खामेनेई की मौत पर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं आ रही थी और अब खामेनेई की मौत के कुछ दिनों बाद भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए हैं. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरान के राजनयिक प्रतिनिधियों से मुलाकात कर भारत की ओर से शोक दर्ज कराया है.

आपको बता दें कि भारत लंबे समय से ईरान के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए हुए है.

खामेनेई की मौत पर अब तक की चुप्पी थी भारत की कूटनीति

भारत और ईरान के बीच भले ही संतुलित और अच्छे संबंध हों, लेकिन ये इतिहास रहा है कि जब भी भारत-पाकिस्तान का युद्ध हुआ हो या सैन्य संघर्ष, ईरान पाकिस्तान के साथ ही खड़ा नजर आया है. और खामेनेई ऐसे कट्टरपंथी नेता थे, जिन्होंने अच्छे संबंधों के बावजूद भी कई बार कश्मीर, दिल्ली दंगों और अनुच्छेद 370 का नाम लेकर मुसलमानों को भी भड़काने की कोशिश कि थी. जिसके बाद खामेनेई के हर बयान के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था. भारत की ओर से कहा गया कि खामेनेई भारत की संप्रभुता में दखल देते हैं.

साल 2024 में खामेनेई ने भारत की तुलना गाजा और म्यांमार से करते हुए मुसलमानों की स्थिति पर फालतू बयानबाजी की थी, जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने जबर्दस्त लताड़ लगाते हुए कहा था खामेनेई का बयान अस्वीकार्य है और गलत जानकारी आधारित बताया था.

इसके अलावा खामेनेई ने भारत में नागरिकता संशोधन अधिनियम को ‘मुस्लिम-विरोधी भेदभाव’ बताया और भारत विरोधी टिप्पणी की थी. साल 2020 में जब दिल्ली दंगे हुए तो पुलिस की कार्रवाई पर भी खामेनेई ने टिप्पणी करते हुए मुसलमानों का नरसंहार कहा था. इतना ही नही सोशल मीडिया में टैग करते हुए इंडियन मुस्लिम इन डेंजर जैसे आपत्तिजनक हैशटैग का इस्तेमाल किया था. खामेनेई के इस बयान पर नई दिल्ली में ईरानी राजदूत को तलब करके स्पष्टीकरण मांगा गया था.

खामेनेई ने मुस्लिम देशों से कश्मीर के पीड़ित मुसलमानों के लिए समर्थन जुटाने की अपील भी कर चुके हैं.

ऐसे में जब खामेनेई के खिलाफ इजरायल ने एक्शन लिया तो फौरन भारत शोक संवेदना व्यक्त करने नहीं दौड़ पड़ा, वहीं भारत ने चुप रहना बेहतर समझा और सही समय पर संवेदना जताई. गौरतलब है इजरायल और भारत के बेहद करीबी संबंध हैं और इस एक्शन से पहले प्रधानमंत्री मोदी इजरायल में ही पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ थे. पीएम मोदी के सुरक्षित भारत लौटने के फौरन बाद ईरान पर अटैक किया गया था

शांति और कूटनीति से हो समाधान, पीएम मोदी की अपील

प्रधानमंत्री मोदी ने भी क्षेत्र में शांति की अपील की है. पीएम मोदी ने खाड़ी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ साथ इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी फोन पर बात की थी. इसके अलावा बयान जारी करके हुए पीएम मोदी ने कहा, “किसी भी समस्या का समाधान केवल सैन्य टकराव से नहीं हो सकता. भारत संवाद और कूटनीति के रास्ते को ही स्थायी समाधान मानता है. पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है और जल्द से जल्द संघर्ष समाप्त होना चाहिए.”

इसके अलावा विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा था कि “भारत बातचीत और कूटनीति की अपनी बात जोर देकर दोहराता है. हम झगड़े को जल्द खत्म करने के पक्ष में हैं. पहले ही, दुख की बात है कि कई जानें जा चुकी हैं और हम इस बारे में अपना दुख जाहिर कर रहे हैं.  हाल के दिनों में, हमने न सिर्फ लड़ाई को बढ़ते देखा है, बल्कि यह दूसरे देशों में भी फैल गई है. तबाही और मौतें बढ़ गई हैं, जबकि आम जिंदगी और आर्थिक गतिविधियां रुक गई हैं. इस इलाके की सुरक्षा और स्थिरता में अहम हिस्सेदारी रखने वाले एक करीबी पड़ोसी के तौर पर, ये घटनाक्रम बहुत चिंता पैदा करते हैं. खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं. उनकी सुरक्षा और भलाई सबसे जरूरी है. हम किसी भी ऐसे घटनाक्रम से अनजान नहीं रह सकते जो उन पर बुरा असर डाले.”

रणधीर जायसवाल ने ये भी कहा कि “हमारी ट्रेड और एनर्जी सप्लाई चेन भी इसी इलाके से होकर गुजरती हैं. किसी भी बड़ी रुकावट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ता है.”

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