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दुनिया को जोड़ने वाला ब्रिज बने भारत: मैक्रों

विश्व में बढ़े तनाव और सैन्य संघर्ष अगले महीने यानि फरवरी में भारत दौरे पर आने वाले फ्रेंच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों. भारत दौरे से पहले मैक्रों ने दिल खोलकर नई दिल्ली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है. भारत के बहुपक्षवाद की सराहना करते हुए मैक्रों ने कहा है कि भारत ऐसा देश है जो किसी के दबाव में नहीं आएगा. ब्रिक्स अध्यक्ष के तौर पर भारत दुनिया को जोड़ने वाला ‘ब्रिज’ बन सकता है. 

मैक्रों का ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ दबाव के विरोध में देखा जा रहा है. पेरिस में राजदूतों को संबोधित करते हुए मैक्रों ने अमेरिकी दादागीरी की भी आलोचना की है. साथ ही कहा, जी 7 और ब्रिक्स का विरोधी नहीं होना चाहिए.

ब्रिक्स अध्यक्ष भारत किसी के दबाव में नहीं आता: राष्ट्रपति मैक्रों

मैक्रों ने भारत की वैश्विक भूमिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत देशों के बीच पुल बनाने का काम कर सकता है. मैक्रों ने कहा, “मौजूदा दौर में अंतरराष्ट्रीय गवर्नेंस में सुधार का वक्त आ गया है और भारत इसमें अहम भूमिका निभा सकता है.”

मैक्रों ने भारत को फ्रांस का एक अभूतपूर्व और मजबूत पार्टनर बताया. मैक्रों ने अपने संबोधन में कहा, “ड‍िफेंस, स‍िक्‍योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्‍लाइमेट चेंज जैसे अहम मुद्दों पर भारत, फ्रांस के साथ खड़ा है.”

मैक्रों ने कहा, “भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देश किसी के पिछलग्गू नहीं हो सकते.”

जी 7 और ब्रिक्स एक दूसरे के विरोधी नहीं होने चाहिए: मैक्रों

फ्रेंच राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत के बहुपक्षवाद की सराहना की है. मैक्रों ने इस बात पर जोर दिया की जी 07 समूह और ब्रिक्स को एक दूसरे का विरोधी नहीं होना चाहिए.

आपको बता दें कि इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत कर रहा है. मैक्रों ने ब्रिक्स के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई. मैक्रों ने कहा, “जी 7 (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) को ब्रिक्स  (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका )का विरोधी नहीं होना चाहिए और ब्रिक्स को जी 7 का विरोधी नहीं बनना चाहिए.”

अगले महीने भारत का दौरा करूंगा: राष्ट्रपति मैक्रों

राष्ट्रपति मैक्रों ने डिप्लोमैटिक कॉर्प्स को संबोधित कहा कि वह अगले महीने भारत का दौरा करने वाले हैं, क्योंकि नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इम्पैक्ट समिट की मेजबानी करने वाला है. राष्ट्रपति ने पिछले साल फ्रांसीसी कूटनीति की सफलताओं का जिक्र करते हुए, “पेरिस में एआई समिट के लिए दुनिया के एक साथ आने और इस क्षेत्र में हुई प्रगति के बारे में बात की.”

अमेरिका अपने दोस्तों से दूर हो रहा, नियमों को तोड़ रहा: राष्ट्रपति मैक्रों

मैक्रों ने अपने पार्टनर अमेरिका को खूब जमकर सुनाया है. फ्रेंच प्रेसिडेंट ने कहा, “हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जो तेजी से खराब होती जा रही है. अमेरिका एक स्थापित शक्ति है, लेकिन अब वह धीरे-धीरे अपने कुछ सहयोगियों से दूर हो रहा है और उन अंतरराष्ट्रीय नियमों से खुद को आजाद कर रहा है, जिनका वह हाल तक प्रचार करता था, चाहे वह व्यापार हो या सुरक्षा.”

चीन बढ़ती हुई शक्ति, यूरोपीय अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहा चीन: राष्ट्रपति मैक्रों

अमेरिका के अलावा मैक्रों ने चीन पर भी प्रहार किया. मैक्रों ने चीन को एक बढ़ती हुई शक्ति बताते हुए उसकी आक्रामकता की आलोचना की. मैक्रों ने कहा, “चीन अब यूरोपीय अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहा है. दुनिया में री-कोलोनाइजेशन की प्रक्रिया चल रही है. फ्रांस और यूरोप को तो पुराने उपनिवेशवाद के लिए ताने सुनने पड़ते हैं, जो अब हकीकत नहीं है, दूसरी तरफ हम कुछ देशों (अमेरिका और चीन) की ‘नव-औपनिवेशिक आक्रामकता’ के शिकार हो रहे हैं.”

जयशंकर ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से मुलाकात, पीएम मोदी का संदेश दिया

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर फ्रांस के दौरे पर हैं. इस दौरान जयशंकर ने मैक्रों से मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं.

मैक्रों के साथ मुलाकात के बाद जयशंकर ने एक्स पर तस्वीर शेयर करते हुए कहा, “राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों से मिलकर खुशी हुई और पीएम नरेंद्र मोदी की हार्दिक शुभकामनाएं पहुंचाईं. समकालीन वैश्विक विकास पर उनके दृष्टिकोण और हमारी रणनीतिक साझेदारी के लिए सकारात्मक भावनाओं की गहरी सराहना करता हूं.”

एस जयशंकर ने फ्रांस को भारत के सबसे पुराने रणनीतिक साझेदारों में से एक बताया और इस बात पर जोर दिया कि कैसे दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक्टिव हैं, वे बहु-ध्रुवीयता के लिए प्रतिबद्ध हैं और उनका एक साथ काम करना न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए बल्कि वैश्विक राजनीति को स्थिर करने के लिए भी बेहद अहम है.

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