Breaking News Islamic Terrorism Kashmir

ड्रोन सैटेलाइट और टाइसन: किश्तवाड़ में पाकिस्तानी आतंकियों का ग्रुप ढेर

जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में रविवार को मारे गए तीन आतंकियों के साथ, भारतीय सेना ने जैश ए मोहम्मद के एक बड़े मॉडियूल को खत्म करने का दावा किया है. जैश के टॉप कमांडर सैफुल्लाह की अगुवाई में इस मॉडियूल में कुल सात आतंकी थे, जिन्हें इजरायल ग्रुप के नाम से जाना जाता था. पिछले 326 दिनों से चल रहे ऑपरेशन में सेना ने जम्मू कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की मदद से इन सभी सात आतंकियों का सफाया कर दिया है.

सोमवार को भारतीय सेना की डेल्टा फोर्स (राष्ट्रीय राइफल्स की स्थानीय यूनिट) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इन सभी सातों आतंकियों की तस्वीरें जारी की और बताया कि इस पूरे ग्रुप के खात्मे के लिए ड्रोन से लेकर सैटेलाइट तक की मदद ली गई.

सैफुल्लाह ग्रुप के 07 आतंकियों को ढेर करने में लगे 326 दिन

डेल्टा फोर्स के डिवीजनल कमांडर, मेजर जनरल एपीएल बल के मुताबिक, इस ग्रुप के बारे में बड़ी कामयाबी इसी महीने की 4 तारीख को मिली थी, जब ऑपरेशन त्राशी-1 के दौरान आदिल नाम के पाकिस्तानी आंतकी को ढेर किया गया था. आदिल भी सैफुल्लाह और दूसरे बाकी आतंकियों की तरह पाकिस्तानी नागरिक था. आदिल को, सैफुल्लाह का डिप्टी कमांडर माना जाता था. लेकिन सैफुल्लाह चकमा देने में कामयाब रहा था. उसी रोज,एक दूसरे ऑपरेशन (ऑपरेशन किया) में इसी इलाके में इस ग्रुप के दो अन्य आतंकी मारे गए थे.

जानकारी के मुताबिक, सैफुल्लाह (इजरायल) ग्रुप ने अप्रैल 2024 में एलओसी (नियंत्रण रेखा) से भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी और पिछले डेढ़-दो साल से डोडा-किश्तवाड़ इलाके में सक्रिय था. इस दौरान 15-20 बार, सैफुल्लाह सुरक्षाबलों को चकमा देने में कामयाब हो गया था. लेकिन 21-22 फरवरी को हुए ऑपरेशन में सेना ने सैफुल्लाह और उसके दो (02) साथियों फरमान अली और बशरा उर्फ हुरेरा को ढेर कर दिया. एनकाउंटर के बाद, सेना को आतंकियों की ढोक से 02 एके-47 और 01 एम-4 राइफल सहित स्टील की बुलेट बरामद हुई. ये बुलेट्स, बुलेटप्रूफ जैकेट तक को भेदने में कामयाब हो जाती हैं.

इस ऑपरेशन को हालांकि, 14 फरवरी को शुरु किया गया था. 18 फरवरी को भी इस ग्रुप से सुरक्षाबलों का कंटेक्ट हुआ था और मौके से भारी मात्रा में हथियार और दूसरी युद्ध-सामाग्री जब्त की गई थी.

आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में आर्मी का टाइसन डॉग घायल

शनिवार-रविवार के ऑपरेशन में सेना के डॉग, टायसन ने भी अहम भूमिका निभाई और गंभीर रुप से घायल हो गया. टायसन ही सबसे पहले आतंकियों की ढोक में घुसा था. आतंकियों ने उस पर गोलियां चला दी थी. सेना ने टायसन की बहादुरी को सलाम किया है, क्योंकि टायसन कोई बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं पहने हुए था.

पहलगाम नरसंहार के बाद डोडा-किश्तवाड़ में चलाया सेना ने बेहद खास ऑपरेशन

सेना के मुताबिक, पहलगाम नरसंहार के बाद, भारतीय सेना ने डोडा-किश्तवाड़ इलाके के ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में आतंकियों को मार गिराने के लिए अभियान शुरु किया था. यहां तक की सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी के दौरान भी सेना ने सीआरपीएफ, असम राइफल्स और पुलिस के साथ सर्च ऑपरेशन जारी रखा. इसके लिए, जंगलों में बनी ढोक (स्थानीय चरवाहों की रहने वाली जगह) और गुफाओं को एक-एककर खंगाला गया. खाली हुई ढोक में सीआरपीएफ और पुलिस ने एफओबी यानी फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस तैयार किए ताकि आतंकी फिर से इन्हें अपनी पनाहगाह न बना लें. पिछले 7-8 महीने में कुल 43 ऐसी एफओबी तैयार की गई जिनमें 20-25 सीआरपीएफ के जवान और 3-4 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया.

दरअसल, चिलाए कला की सर्दियों के चलते आतंकी, डोडा और किश्तवाड़ के ऊंचाई वाले इलाकों में छिपने के लिए पहुंच गए थे. ऐसे में काउंटर-टेररिज्म ऑपेशन्स के लिए भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) की यूनिट्स को इन ऊंचाई और बेहद खतरनाक इलाकों में तैनात किया गया है. इन यूनिट्स को ड्रोन और थर्मल इमेंजिग उपकरणों से लैस किया गया है.

जम्मू कश्मीर के चिलाए कलां मौसम में हड्डियों को गलाने वाले ठंड पड़ती है. ये मौसम अमूमन 21 दिसंबर से 31 जनवरी तक रहता है. इस दौरान, डोडा किश्तवाड़ के ऊंचाई वाले इलाकों में जबरदस्त बर्फबारी होती है. लेकिन भारतीय सेना विंटर ऑपरेशन्स के लिए पूरी तरह से कमर कस चुकी थी.

खास बात है कि पहलगाम नरसंहार को अंजाम देने वाले पाकिस्तानी आतंकी भी डोडा और किश्तवाड़ के रास्ते दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग पहुंचे थे. यही वजह है कि सेना इस बार किसी भी तरह की गुजाइंश छोड़ने के लिए तैयार नहीं थी.

जम्मू में अभी भी सक्रिय 30 पाकिस्तानी आतंकी, कश्मीर घाटी में 40-50 सक्रिय

सेना के मुताबिक, सैफुल्लाह ग्रुप के खात्मे से आतंकियों के एक बड़े नेटवर्क का खात्मा हुआ है. लेकिन खुफिया एजेंसियों के ताजा इनपुट के मुताबिक, अभी भी जम्मू रीजन (डोडा, किश्तवाड़, पुंछ, राजौरी इत्यादि) में अभी भी करीब 30 पाकिस्तानी आतंकी सक्रिय हैं. ऐसे में बचे हुए आतंकियों का सफाया भी सुरक्षाबलों के सामने एक बड़ी चुनौती है. इसके अलावा कश्मीर घाटी में भी 40-50 आतंकी सक्रिय हैं. इनमें से महज दो (02)को छोड़कर बाकी सभी फोरेन टेररिस्ट यानी पाकिस्तानी मूल के आंतकी हैं.

गृह मंत्रालय ने जारी की आतंकियों के खिलाफ बेहद खास ‘प्रहार’ नीति

किश्तवाड़ में हुए आंतकियों के सफाए के साथ, गृह मंत्रालय ने पहली बार देश में नेशनल काउंटर टेररिज्म पॉलिसी एंड स्ट्रेटेजी जारी की. आतंकियों के खिलाफ जारी की गई इस नीति को प्रहार का नाम दिया गया है. इस स्ट्रेटेजी में सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी का आधिकारिक ऐलान किया है.

editor
India's premier platform for defence, security, conflict, strategic affairs and geopolitics.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *