भारतीय तटरक्षक बल के किसी जहाज ने पहली बार सामरिक तौर से महत्वपूर्ण ईरान के चाबहार बंदरगाह का दौरा किया है. इंडियन कोस्टगार्ड का आईसीजी सार्थक जहाज इनदिनों (16-19 दिसंबर) चाबहार के पोर्ट-कॉल पर है. इस दौरे का मकसद, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए जाने वाली सप्लाई लाइन को समुद्री-सुरक्षा प्रदान करना है.
अदन की खाड़ी के उत्तर में स्थित चाबहार पोर्ट, पाकिस्तान से जाने वाले मार्ग से छोटा और जियोपॉलिटिकल-स्वतंत्र रूट है. इस बंदरगाह से भारत, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (आईएनसीटीसी) को जोड़कर अपना व्यापार बढ़ा सकता है. खास बात है कि चाबहार पोर्ट के ऑपरेशन्स की जिम्मेदारी भी भारत के कंधों पर है.
दरअसल, दुश्मनी के कारण भारत ने पाकिस्तान के रास्ते अपना पूरा व्यापार बंद कर रखा है. ऐसे में लैंड-लॉक्ड अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों के साथ संपर्क और व्यापार करने के लिए ईरान का चाबहार पोर्ट बेहद मुफीद है.
भारतीय तटरक्षक बल के मुताबिक, आईसीजी सार्थक का चाबहार दौरा, अरब सागर में समुद्री-भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ भारत के सागर और महासागर विजन को रेखांकित करता है.
चाबहार में पोर्ट-कॉल के दौरान, आईसीजी सार्थक, ईरान की मेरीटाइम एजेंसी के साथ समंदर में सर्च एंड रेस्क्यू ड्रिल, मेरीटाइम लॉ एनफोर्समेंट और मरीन प्रदूषण रिस्पांस ड्रिल में हिस्सा लेगा.
इसके अलावा दोनों देशों की कोस्टगार्ड, टेबल टॉप एक्सरसाइज और वीबीएसएस ड्रिल यानी किसी संदिग्ध बोट पर साझा विजिट, बोर्ड, सर्च एंड सीजर (बरामदगी) जैसी कार्रवाई करने का अभ्यास करेंगी.
कोस्टगार्ड के मुताबिक, आईसीजी जहाज सार्थक का चाबहार दौरा समुद्री सहयोग को मजबूत करने, नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा देने और व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र और खाड़ी में शांति, स्थिरता और सतत विकास में योगदान देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
ईरान से पहले, आईसीजी सार्थक ने कुवैत का दौरा किया था. साफ है कि इंडियन कोस्टगार्ड के अरब सागर में उपस्थिति और क्षेत्रीय समुद्री सहयोग से जुड़ाव बढ़ रहा है.

