पंजाब में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के खतरनाक इरादों का हुआ है खुलासा. पाकिस्तान के टारगेट पर है बच्चे, नाबालिग बच्चे. टीनएजर्स के जरिए आईएसआई भारत की सैन्य संवेदनशील जानकारियां हासिल करने की फिराक में है.
पंजाब की पठानकोट पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में 15 वर्षीय नाबालिग से पूछताछ की है, जो सोशल मीडिया के जरिए आईएसआई के संपर्क में था और संवेदनशील सैन्य जानकारियां साझा कर रहा था.
पूछताछ की गई तो पंजाब पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई जब जांच में खुलासा हुआ कि एक दो नहीं बल्कि अब तक 37 से अधिक नाबालिग पाकिस्तान के जाल में फंस चुके हैं. सभी नाबालिगों की उम्र 14 वर्ष से 17 वर्ष के बीच है.
9वीं के क्लास के बच्चे को आईएसआई ने बनाया जासूस
पंजाब पुलिस ने एक 15 साल के लड़के को पकड़ा है जो पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा था. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने लड़के को संवेदनशील सैन्य ठिकानों की जानकारी जुटाने के लिए भर्ती किया था. पंजाब पुलिस के मुताबिक आरोपी लड़का कक्षा 9 का छात्र है और जम्मू-कश्मीर का निवासी है.
पुलिस के मुताबिक आरोपी किशोर टेक्नोलॉजी में बहुत तेज है, बच्चे के पिता का निधन हो चुका है और वो रिश्तेदारों के साथ रह रहा था. बच्चा अकेलेपन और मानसिक तनाव जैसी परेशानी से जूझ रहा था. और इसी कारण आईएसआई ने उसका फायदा उठाया.
मानसिक तनाव को हथियार बनाते हुए आईएसआई ने उसे टारगेट किया और लालच देकर संवेदनशील जानकारियां जुटाने लगा.
पंजाब पुलिस के मुताबिक आरोपी किशोर पिछले 01 वर्ष से सोशल मीडिया के जरिए आईएसआई के संपर्क में था और सीमा पार बातें कर रहा था.
नाबालिग के फोन से हुआ बड़ा खुलासा, मिले संवेदनशील वीडियो
पंजाब पुलिस के मुताबिक, “आरोपी नाबालिग, पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों, आईएसआई और आतंकी मॉड्यूल से जुड़े लोगों से बातचीत कर रहा था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी उन्हें साझा कर रहा था. जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से कई जानकारियां हासिल हुई हैं. पाकिस्तान सेना के अधिकारियों और नार्को-टेरर ऑपरेटिव्स से सीधे संपर्क के सबूत मिले हैं.”
पंजाब पुलिस के मुताबिक, “बच्चे का मोबाइल फोन क्लोन किया गया था, जिससे फोन में मौजूद डेटा को सीधे एक्सेस किया जा सकता था. उसने कुछ महत्वपूर्ण स्थानों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की थी, जिसे लाइव ट्रांसमिट किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.”
पठानकोट के एसएसपी दलजिंदर सिंह ढिल्लों ने बताया कि “हम समय रहते इस बच्चे को बचाने में सफल रहे. अगर थोड़ी भी देरी होती तो उसे गंभीर नुकसान हो सकता था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता था.”
बच्चे को आईएसआई से कैसे अपने जाल में फंसाया ?
पुलिस के मुताबिक, “नाबालिग को सोशल मीडिया चैटरूम के जरिए आईएसआई और उसके नार्को-टेरर नेटवर्क ने अपने जाल में फंसाया गया था. पाकिस्तान के सोशल मीडिया चैटरूम में एजेंट ने बच्चे को अपना दोस्त बनाया और संपर्क बढ़ाकर जाल में फंसा लिया.”
बच्चे ने पूछताछ में बताया है कि उसे हथियार और मदद का लालच दिया गया और फिर संवेदनशील सीमा क्षेत्रों की फोटो और वीडियो बनाने को कहा गया. एक खतरनाक ऐप के जरिए उसका फोन क्लोन कर लिया गया था, जिससे हैंडलर सीधे उसके डेटा तक पहुंच बना रहे थे.
आईएसआई ने टीनएजर्स को बनाया जासूस, जांच में खुलासा
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में खुलासा हुआ है कि अब तक 37 से ज्यादा नाबालिग जाने-अनजाने में आईएसआई के संपर्क में हैं. बताया जा रहा है कि इनमें 12 बच्चे पंजाब और हरियाणा से हैं, जबकि करीब 25 बच्चे जम्मू-कश्मीर में हैं. पठानकोट में नाबालिग के पकड़े जाने के बाद आईएसआई के खतरनाक मकसद का भंडाफोड़ किया गया है. आईएसआई नाबालिगों को प्रभावित कर रही है, भड़का रही है और संवदेनशील जानकारियां हासिल कर रही है. माना जा रहा है कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ और बच्चे सामने आ सकते हैं.
पठानकोट के एसएसपी दलजिंदर सिंह ढिल्लों ने कहा कि “हमारी कोशिश है कि ऐसे बच्चों को आईएसआई के जाल में बाहर निकाला जाए जिनका ब्रेनवॉश किया जा चुका है. उनकी काउंसलिंग की जाए और सही रास्ता दिखाया जाए.”

