मिलिट्री डिप्लोमेसी में भारतीय नौसेना एक नया आयाम कायम करने जा रही है. इस महीने की 18 तारीख को आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 60 मित्र-देशों की नौसेनाएं इकठ्ठा हो रही हैं. मौका होगा इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) का, जिसमें देश-विदेश के करीब 50 जंगी जहाज और पनडुब्बियां हिस्सा लेंगी.
राष्ट्रपति और सशस्त्र सेनाओं की सुप्रीम कमांडर द्रौपदी मूर्मु, इंडियन नेवी सहित सभी मित्र-देशों की नौसेनाओं के जंगी जहाज का गार्ड ऑफ ऑनर लेंगी और जंगी बेड़े की समीक्षा करेंगी. इस खास आयोजन के लिए विशाखापट्टनम से सटे समंदर (बंगाल की खाड़ी) में एक स्पेशल प्रेसिडेंशियल यॉट तैयार की गई है.
प्रेसिडेंशियल यॉट के लिए नौसेना के एक जंगी जहाज को खास राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, नेवी चीफ और दूसरे गणमान्य व्यक्तियों के लिए खास तौर से तैयार किया गया है.
दस वर्ष में एक बार होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय मेरीटाइम आयोजन में मित्र-देशों के जंगी जहाज और नौसैनिक हिस्सा लेते हैं.आखिरी आईएफआर, वर्ष 2016 में विशाखापट्टनम में हुआ था जिसमें करीब 50 देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था. तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस में हिस्सा लिया था. इस बार के आईएफआर में भी पीएम मोदी के शामिल होने की पूरी संभावना है.
आईएफआर के दौरान, सुप्रीम कमांडर को समंदर में गार्ड ऑफ ऑनर के अलावा, भारतीय नौसेना का शक्ति-प्रदर्शन भी देखने को मिलेगा. इस शक्ति प्रदर्शन में भारतीय नौसेना के युद्धपोत, पनडुब्बियां, एयरक्राफ्ट कैरियर और लड़ाकू विमान हिस्सा लेने जा रहे हैं. स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत, भारतीय नौसेना के जंगी बेड़े का नेतृत्व करेगा.
फ्लीट रिव्यू की पंरपरा, 18वीं सदी में जाती है जब मराठा नौसेना ने अपनी जंगी बेड़े की सभी बोट्स को अरब सागर में उतारा था.
आईएफआर में हिस्सा लेने वाले मित्र-देशों के नौसैनिकों की टुकड़ियों की एक सिटी-परेड भी विशाखापट्टनम शहर में आयोजित की जाएगी, इसे भारतीय नौसेना ने मिलन का नाम दिया है. ये सिटी-परेड, 17 फरवरी को आयोजित की जाएगी.

