क्या अयातुल्ला खामेनेई की मौत के पीछे कोई घर का भेदी है. क्या आईआरजीसी के किसी टॉप कमांडर ने ही की थी मोसाद के लिए जासूसी. क्या ईरान में कोई ऐसा है जो अमेरिका और ईरान को दे रहा है पल-पल की जानकारी. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के मामले में एक बार फिर आईआरजीसी के टॉप कमांडर की भूमिका संदिग्ध पाई जा रही है.
माना जा रहा है कि जिस मीटिंग के दौरान अमेरिका और इजरायल ने तेहरान स्थित खामेनेई के घर पर हवाई हमला किया था, उस मीटिंग से ठीक पहले ये कमांडर घर से निकल गया था. खास बात ये है कि दूसरी बार ऐसा हुआ है कि इजरायल के किसी बड़े ऑपरेशन से पहले ये कमांडर मीटिंग से बाहर निकल गया हो. और इजरायल के हमले में बच गया हो. इस संदिग्ध कमांडर का नाम है इस्माइल कानी.
इस्माइल कानी आईआरजीसी की कुद्स विंग का चीफ है. इससे पहले भी जब साल 2024 में हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह को इजरायली फोर्स ने लेबनान में मारा था, तो ठीक उससे पहले कानी, नसरल्लाह की बैठक से बाहर निकले थे. और अब जब खामेनई की बैठक से बाहर निकले तो खामेनेई पर हमला हो गया. ईरान में दबी जुबान से ये कहा जा रहा है कि ये महज इत्तेफाक नहीं हो सकता. वहीं इजरायल ने इस्माइल कानी का एक एआई वीडियो जारी करके मामले को हवा दे दी है.
खामेनेई की मौत में इस्माइल कानी की भूमिका पर उठे सवाल
ईरान की कुख्यात इस्लामिक रेवोलूयसनेरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की कुद्स विंग का चीफ है इस्माइल कानी. बताया जा रहा है कि शनिवार की सुबह यानि 28 फरवरी को जब खामेनेई अपनी सिक्योरिटी काउंसिल के अधिकारियों के साथ अहम बैठक कर रहे थे, उसमें कानी भी मौजूद था. उस मीटिंग के दौरान ही अमेरिका और इजरायल ने बंकर-बस्टर बम से हमला बोल दिया और खामेनेई का पूरा घर जमींदोज हो गया. लेकिन इस मीटिंग से ऐन पहले, कानी घर से बाहर निकल गया था.
कानी की भूमिका को लेकर इजरायल में हवा गरम है. लेकिन ईरान की तरफ से खामेनेई की मौत, अमेरिका-इजरायल के हमले या फिर कानी की जासूसी को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है.
नसरल्लाह की मौत में भी शक के दायरे में था आईआरजीसी कमांडर
आपको बता दें कि अक्टूबर 2024 में लेबनान की राजधानी बेरुत में ईरान समर्थित आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर नसरल्लाह की मौत के दौरान भी कानी वहां मौजूद था. खामेनेई की तरह नसरल्लाह भी जमीन से कई मीटर नीचे एक बेहद सुरक्षित बंकर में छिपा रहता था और इजरायल पर हमले की साजिश रचता था. लेकिन उस बिल्डिंग में चल रही एक मीटिंग में इजरायल ने बंकर-बस्टर बम से हमला कर नसरल्लाह को ढेर कर दिया था. हमले से ठीक पहले कानी मीटिंग छोड़कर चला गया था और ऐसे में इजरायल के हमले से बच गया था.
इसके अलावा साल 2024 में ही इजरायली वायुसेना ने लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के नए कमांडर हाशेम सेफेद्दीन को मार गिराया था. कहा जा रहा है कि जिस वक्त सेफेद्दीन को इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के बाहरी हिस्सा दाहिए में मार गिराया था, कानी को भी मीटिंग के लिए वहां पहुंचना था. लेकिन कानी वहां नहीं पहुंचा, जिसके चलते उसकी जान बच गई थी. तभी से कानी, ईरान के शक के घेरे में था.
कानी हमारा जासूस नहीं: मोसाद
नसल्लाह की मौत के बाद कानी की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हुए थे और खुद ईरान ने कई दिनों तक कानी को नजरबंद कर कड़ी पूछताछ की थी. लेबनान में दो मीटिंग में न पहुंचने और इजरायल के एरियल-स्ट्राइक से बचने के कारण ही ईरान ने कानी को हाउस-अरेस्ट कर लिया गया था. इस बीच इजरायल ने अपने जासूसी एजेंसी मोसाद के प्रॉक्सी अकाउंटर से जानकारी दी कि कानी जासूस नहीं है. उसके बाद कानी को छोड़ दिया गया था. लेकिन एक बार फिर कानी की इजरायल के ऑपरेशन में संदिग्ध भूमिका निकल कर सामने आ रही है.
आपको बता दें कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) में ब्रिगेडियर-जनरल के पद पर तैनात कानी की गिनती, ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर में से होती है, जो सीधे सुप्रीम लीडर अली खामनेई को रिपोर्ट करता है. आईआरजीसी की इंटेलिजेंस विंग, कुद्स फोर्स के कमांडर के पद पर कानी ही तैनात था. वर्ष 2020 में आईआरजीसी के कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद कानी को ही कुद्स फोर्स का चीफ बनाया गया था.
अगर वाकई कानी इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए एजेंट के तौर पर काम कर रहा है तो ईरान के लिए ये जितना बड़ा झटका है, इजरायल के लिए बड़ी जीत.

