बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी चीफ बेगम खालिदा जिया के निधन पर शोक जताने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर ढाका पहुंचे. एस जयशंकर ने खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान से मुलाकात करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शोक संदेश दिया.
जयशंकर ने बांग्लादेश के लोगों को इस दुख की घड़ी में भारत की संवेदनाएं पहुंचाईं और खालिदा जिया के लोकतंत्र में योगदान को याद किया.
एस जयशंकर का ढाका पहुंचना कूटनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि बांग्लादेश में होने वाले चुनाव में बीएनपी की ओर से तारिक रहमान पीएम पद के प्रबल दावेदार है. भारत, बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी से बेहतर विकल्प मान रही है. हालांकि तारिक रहमान का झुकाव भी अपनी मां खालिदा जिया की तरह पाकिस्तान की ओर है.
एस जयशंकर ने की तारिक रहमान से मुलाकात, खालिदा जिया के निधन पर जताया शोक
विदेश मंत्री एस जयशंकर और बीएनपी के एक्टिंग चीफ तारिक रहमान की मुलाकात की तस्वीरें शेयर करते हुए भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह ने लिखा, डॉ. एस. जयशंकर ने ढाका में प्रधानमंत्री मोदी का शोक संदेश सौंपते हुए कहा कि भारत, बांग्लादेश के साथ इस दुख की घड़ी में खड़ा है.
रियाज हामिदुल्लाह ने एक्स पर लिखा, जयशंकर ने पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के लंबे राजनीतिक जीवन और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनके योगदान को भी सम्मानपूर्वक याद किया.
आपको बता दें कि 30 दिसंबर को ढाका में लंबी बीमारी से जूझते हुए बेगम खालिदा जिया का निधन हो गया था. खालिदा जिया 80 80 वर्ष की थीं. खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक रहीं और 3 बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं.
बीमारी के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेगम खालिदा जिया का हालचाल लिया था और हर संभव मदद करने की पेशकश की थी.
जयशंकर के सामने टकराए पाकिस्तानी स्पीकर, हुआ हैंडशेक
ढाका में एशिया के सभी देशों के प्रतिनिधि खालिदा जिया के जनाजे में शामिल होने पहुंचे थे. पाकिस्तान की ओर से नेशनल असेंबली स्पीकर अयाज सादिक भी ढाका आए हुए थे. इस दौरान जयशंकर और अयाज सादिक का आमना सामना हो गया. दोनों नेता उस वक्त चर्चा में आ गए जब दोनों की एक दूसरे के साथ हाथ मिलाने की तस्वीर सामने आई.ऑपरेशन सिंदूर के बाद ये पहला मौका था कि जब भारत सरकार के किसी मंत्री ने पाकिस्तानी नुमाइंदे से हाथ मिलाया हो.
हालांकि पहले ऐसे कई मौके आए, जब भारत-पाकिस्तान के प्रतिनिधि आमने-सामने आए, लेकिन उन्होंने एक-दूसरे से बात या औपचारिक मुलाकात तक नहीं की. अयाज सादिक पाकिस्तान की पीएमएल-एन पार्टी के नेता हैं और इस वक्त नेशनल असेंबली के स्पीकर का पद संभाल रहे हैं.
अयाज सादिक का एक बयान बेहद चर्चा में आया था, जब साल 2019 में भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन को छोड़ने को लेकर उन्होंने अपनी सेना को डरपोक बता दिया था. अयाज ने अपनी स्पीच में तत्कालीन विदेश मंत्री महमूद कुरैशी और आर्मी चीफ जनरल बाजवा का मजाक उड़ाया था.
सादिक ने कहा था कि “अभिनंदन को छोड़ने के फैसले वाली मीटिंग में विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने डरते हुए विपक्ष से गुजारिश की थी कि अल्लाह के वास्ते अभिनंदन को छोड़ दो, वरना भारत रात 9 बजे हमला कर देगा. तो उस मीटिंग में आर्मी चीफ जनरल बाजवा भी थे, उनके पैर कांप रहे थे और माथे पर पसीना था.”
सुधरेंगे भारत-बांग्लादेश के रिश्ते, जयशंकर के ढाका पहुंचने से क्या संकेत
शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद से ही भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में तल्खी है. अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के बयानों और भारत विरोधी कट्टरपंथियों को शह दिए जाने के कारण रिश्ते गर्त में चले गए.
लेकिन एस जयशंकर का ढाका पहुंचना एक अच्छी राजनयिक पहल बताया जा रहा है. बांग्लादेश में फरवरी में चुनाव है, बीएनपी का सत्ता पर काबिज होना तय माना जा रहा है. ऐसे में भारत की कोशिश होगी कि बांग्लादेश की कमान अगर तारिक रहमान के हाथों आती है, तो भारत से उनके रिश्ते अच्छे और विश्वसनीय हों.
जमात-ए-इस्लामी का सत्ता में आने का मतलब भारत में क्षेत्रीय असुरक्षा का बढ़ना. ऐसे में भारत के लिए जमात से बेहतर विकल्प बीएनपी का है. पहले भारत और बीएनपी के रिश्ते अच्छे नहीं थे, लेकिन हाल के वर्षों में बीएनपी के भारत विरोधी तेवर में कमी आई है. हाल के दिनों में बीएनपी के किसी नेता चाहे वो तारिक रहमान हों या फिर कोई और, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर भारत के विरोध में ऐसा कुछ नहीं कहा है. उल्टा बीएनपी ने यूनुस सरकार के नीतियों पर जरूर चोट की है.
बीएनपी जानती है कि भारत विरोध करके बांग्लादेश की सत्ता हासिल करना मुश्किल है. लेकिन बीएनपी के नेता भारत के साथ-साथ पाकिस्तान की भी बात नहीं कर रहे. ऐसे में में बीएनपी ये दिखाने की कोशिश में है कि वो तटस्थ है. दोनों देशों से न्यूट्रल रिश्ते बनाने में विश्वास रखता है.
पीएम मोदी का खालिदा जिया के इलाज में पेशकश देना और फिर ये भारत-बांग्लादेश के संबंधों में गर्मजोशी लाने के लिए खालिदा जिया की तारीफ करना भी नरम रुख की ओर इशारा कर रहे हैं. और अब खुद विदेश मंत्री का ढाका जाना भारत सरकार की ओर से एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

