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लारीजानी के पायलट Peace-Talk में आगे, अराघची पीछे

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बजाए संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ को क्यों बनाया ईरान ने प्रतिनिधिमंडल का प्रमुख…क्यों अमेरिका से बातचीत के लिए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने जताया है गालिबफ पर विश्वास. गालिबफ क्यों हैं अमेरिका के सामने ईरान के शक्ति प्रदर्शन का चेहरा?

इन सब सवालों का जवाब एक ही है क्योंकि गालिबफ को कहा जाता है मिसाइल सिटी का ब्रेन. गालिबफ ईरान के वो ताकतवर व्यक्ति हैं, जिन्हें सैन्य के साथ-साथ राजनीति पर भी अच्छी पकड़ है.

गालिबफ, आईआरजीसी कमांडर रह चुके हैं, और ईरान के पूर्व एनएसए अली लारीजानी के पायलट के तौर पर भी काम कर चुके हैं. 40 दिनों के युद्ध के दौरान गालिबफ लगातार अमेरिका पर वार कर रहे थे, साथ ही आईआरजीसी का हौसला भी संभाले हुए थे. यही कारण है कि मोजतबा चाहते थे कि अमेरिका के साथ बातचीत का नेतृत्व गालिबफ करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा शर्ते मनवाई जा सकें.

गालिबफ पर मोजतबा करते आंख मूंदकर विश्वास

इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के सामने ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व स्पीकर गालिबफ कर रहे हैं. गालिबफ ने इस्लामाबाद पहुंचने से पहले अपनी एक इमोश्नल पोस्ट के जरे दुनिया का ध्यान तो खींचा ही, वहीं लोग ये भी पूछ रहे हैं कि ईरानी विदेश मंत्री अराघची की जगह गालिबफ को इतनी अहमियत क्यों दी गई है.

तो आपको बता दें कि गालिबफ एक ईरानी कंजर्वेटिव राजनीतिज्ञ, पूर्व मिलिट्री कमांडर और 2020 से ईरान की पार्लियामेंट (मजलिस) के मौजूदा स्पीकर हैं. 64  वर्षीय गालिबफ की ईरान में अच्छी खासी फैन फोलोइंग और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से गहरे संबंध हैं.

अली लारीजानी के पायलट रह चुके हैं गालिबफ, ट्रंप के खिलाफ संभाला मोर्चा

मोहम्मद गालिबफ ईरान में एक कट्टर कंज़र्वेटिव और एक अहम नेता हैं, खासकर 40 दिनों के युद्ध में कई टॉप अधिकारियों के मारे जाने के बाद गालिबफ को शीर्ष नेतृत्व के तौर पर गिना जा रहा है, वो भी ऐसी स्थिति में जब नए सुप्रीम लीडर के स्वास्थ्य को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं.

टीएफए की एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक गालिबफ ने साल 1997-2000 तक आईआरजीसी के एयरोस्पेस चीफ के तौर पर अपनी सेवाएं दी थीं, गालिबफ ने ईरान के पूर्व एनएसए अली लारीजानी के पायलट के तौर पर भी काम कर चुके हैं. गालीबफ को अली लारीजानी का करीबी भी माना जाता है. अली लारीजानी को ईरान का ब्रेन बताया जाता था, जिन्हें युद्ध के दौरान ईरान ने एक एयरस्ट्राइक के दौरान मार दिया था.

लारीजानी की मौत के बाद जब ईरान के कट्टरपंथी नेताओं का लगभग खात्मा हो गया उस वक्त ईरानी स्पीकर गालिबफ ने मोर्चा संभाल लिया. होर्मुज को लेकर अमेरिकी धमकी का गालिबफ ने हर मोड़ पर जवाब दिया. ट्रंप की धमकियों पर पलटवार करते हुए गालिबफ ने कहा था कि “दुश्मन अपनी इच्छा को ही खबर बनाकर पेश करता है. और साथ ही हमारे राष्ट्र को धमकाता भी है. यह एक बड़ी गलती है. अगर वो हम पर वार करेंगे, तो उन्हें कई वार झेलने पड़ेंगे. ईश्वर ने चाहा तो, ईरान की जनता, सर्वोच्च नेता के नेतृत्व में, दुश्मन को उसकी आक्रामकता पर पछतावा कराएगी और अपने अधिकारों को वापस हासिल करेगी.”

शर्तों के पूरा होने पर ही शुरू होगी बातचीत, अमेरिका पर भरोसा नहीं: गालिबफ

गालिबफ ने इस्लामाबाद बैठक से पहले  तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा, “2 अहम शर्तें, लेबनान में सीजफायर और  ईरान की ब्लॉक की गई संपत्तियों को रिलीज करना, अभी तक पूरी नहीं हुई हैं. इन दोनों शर्तों के पूरा होने के बाद ही बातचीत शुरू हो सकती है.”

इस्लामाबाद एयपोर्ट पर पहुंचने पर गालिबाफ ने पत्रकारों से बात की. इस दौरान गालिबफ ने ईरान के साथ की गई पिछली धोखेबाजी की याद दिलाई. कहा कि “ईरान बातचीत में पूरी ईमानदारी से हिस्सा ले रहा है, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं करता.”

गालिबफ ने कहा, “पिछले अनुभव उत्साहजनक नहीं रहे हैं, एक साल से भी कम समय में दो बार बातचीत के बीच में और ईरानी पक्ष की सद्भावना के बावजूद, अमेरिका ने हम पर हमला किया और कई युद्ध अपराध किए. अगर अमेरिकी पक्ष एक वास्तविक समझौते के लिए और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों को देने के लिए तैयार है, तो वे समझौते के लिए ईरान की तत्परता देखेंगे.”

गालिबफ ने कहा, “अगर वाशिंगटन बातचीत को एक बेकार दिखावा और धोखेबाजी के ऑपरेशन के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है, तो तेहरान अपनी खुद की क्षमताओं पर भरोसा करके ईरानी राष्ट्र के अधिकारों को सुरक्षित करेंगे. राष्ट्रीय हितों को दृढ़ता से सुरक्षित करने और अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए ईरानी सेना तैयार है.”

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