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ट्रंप के खिलाफ खुलकर सामने आए मैक्रों, ग्रीनलैंड पर यूरोप एकजुट

ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर नाटो को दी गई अमेरिका की धमकी पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भड़क गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार ग्रीनलैंड पर अधिकार जमाने के कदम के खिलाफ यूरोप का प्रमुख देश फ्रांस खुलकर सामने आ गया है. फ्रेंच प्रेसिडेंट ने दो टूक लहजे में कहा है कि अगर यूरोप या सहयोगी देश की संप्रभुता प्रभावित हुई तो इसके व्यापक परिणाम होंगे. 

दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड और डेनमार्क के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे हैं. ट्रंप ने अपने ताजा बयान में नाटो को भी धमकाते हुए कहा है कि नाटो को अमेरिका का साथ देना चाहिए. क्योंकि ग्रीनलैंड  के अमेरिका के हाथों में होने से नाटो कहीं अधिक मजबूत और प्रभावी हो जाता है. 

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकी के बाद नाटो अलर्ट है. ग्रीनलैंड ने नाटो सैनिकों के साथ इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ाने और स्थिति पर नजर रखने की घोषणा की है. 

ट्रंप के बयानों को हल्के में नहीं लेना चाहिए: मैक्रों

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के दौरान बेहद सख्त लहजे में कहा है कि “अगर किसी यूरोपीय और सहयोगी देश की संप्रभुता प्रभावित होती है तो इसके अभूतपूर्व व्यापक परिणाम होंगे.”

मैक्रों ने डेनमार्क और उसकी संप्रभुता के प्रति पूर्ण एकजुटता जाहिर करते हुए कहा कि “उनकी हालात पर पूरी नजर है. हम बयानों को हल्के में नहीं ले रहे हैं.”

पिछले साल जून में मैक्रों ने किया था ग्रीनलैंड दौरा

मैक्रों ने पिछले साल ग्रीनलैंड का दौरा किया था. इस दौरान उनके साथ डेनमार्क की पीएम मेटे फेडरिक्सन भी मौजूद थीं. मैक्रों का ये दौरा ट्रंप के डेनिश स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड के लिए यूरोपीय एकजुटता और समर्थन के तौर पर देखा गया था. क्योंकि ट्रंप ने सत्ता संभालने के फौरन बार ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा जता दी थी. 

मैक्रों ने ग्रीनलैंड में कहा “यह दिखाना महत्वपूर्ण है कि डेनमार्क और यूरोप इस क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्ध हैं, जिसका रणनीतिक महत्व बहुत अधिक है और जिसकी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए.”

डेनमार्क को ब्लैकमेल करना बंद करे अमेरिका: फ्रेंच विदेश मंत्री

राष्ट्रपति मैक्रों से पहले फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बैरो ने भी अमेरिका पर तल्ख टिप्पणी की. बैरो ने कहा कि “अमेरिका को ग्रीनलैंड के मुद्दे पर डेनमार्क को ब्लैकमेल करना बंद कर देना चाहिए.”

पिछले सप्ताह ही यूरोपीय देशों ने एक संयुक्त बयान जारी करके डेनमार्क का साथ देने पर प्रतिबद्धता जताई थी. अमेरिका के विरोध में फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी, डेनमार्क समेत यूरोपीय देशों ने एकजुटता दिखाई.

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के ताजा बयान के बाद फ्रांस इस मुद्दे पर जर्मनी और ब्रिटेन के साथ भी लगातार संपर्क में है ताकि ट्रंप के खिलाफ साझा यूरोपीय मोर्चा तैयार किया जा सके.

ग्रीनलैंड में बढ़ाई गई मिलिट्री मौजूदगी

ग्रीनलैंड सरकार ने आर्कटिक इलाके में और उसके आसपास मिलिट्री मौजूदगी बढ़ाने की घोषणा की. नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर किया गया है.

ग्रीनलैंड ने अपने बयान में कहा कि “डेनमार्क के सशस्त्र बल अपनी मौजूदगी बढ़ाएंगे और सहयोगी सेनाओं के साथ सैन्य अभ्यास जारी रखेंगे, जिसका मकसद इस क्षेत्र में नाटो की गतिविधि को मजबूत करना है. बढ़ी हुई मौजूदगी का मकसद सेनाओं को इस क्षेत्र की खास आर्कटिक स्थितियों में काम करने के लिए ट्रेनिंग देना और आर्कटिक में गठबंधन की पकड़ को सशक्त करना है.”

इससे पहले डेनमार्क रक्षा मंत्रालय ने “ग्रीनलैंड में तैनात अपने सैनिकों को आदेश दिया था कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन से लड़ने के लिए आदेश का इंतजार न करें, बिना पूछे गोली चलाएं और क्षेत्र की रक्षा करें.”

ट्रंप की जिद से ईयू-अमेरिका की डील अटकेगी?

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की धमकियों के विरोध में ब्रसेल्स में यूरोपीय संसद के सदस्य अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील को रोकने पर समीक्षा की गई है. सांसदों का एक समूह चाहता है कि जब तक अमेरिका ग्रीनलैंड पर अपना दावा नहीं छोड़ता, तब तक अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाने के कानून पर रोक लगा दी जाए.

यूरोपीय संसद के 23 सांसदों ने ईयू असेंबली प्रेसिडेंट रोबर्टा मेटसोला को लेटर लिखकर अमेरिका से हर तरह सहयोग को तुरंत फ्रीज करने की मांग की है. वहीं अंदेशा इस बात का है कि अगर ईयू ऐसा कुछ कदम उठाता है, तो ट्रंप और भड़क सकते हैं. जिससे अमेरिका और ईयू के बीच भी तनाव बढ़ जाएगा.

हमें नाटो गठबंधन पर पूरा भरोसा है: ग्रीनलैंड के पीएम

ग्रीनलैंड के प्रीमियर (प्रधानमंत्री) जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने कहा है कि “ग्रीनलैंड डेनमार्क के साम्राज्य के साथ एकजुट खड़ा है और नाटो गठबंधन पर पूरा भरोसा है. लेकिन ग्रीनलैंड आगे भी अपने स्वतंत्रता और स्वायत्तता को बनाए रखेगा. हम न तो अमेरिकी बनना चाहते हैं, न हम डेनिश बनना चाहते हैं. हम अभी जो हैं मतलब ग्रीनलैंडर ही बनना चाहते हैं. हम अपने ग्रीनलैंड का भविष्य अपने लोगों के साथ मिलकर ही तय करेंगे. हमें कोई भी देश न तो उन्हें खरीद सकता है और न ही नियंत्रित कर सकता है.”

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