Breaking News Reports

भारत-रूस के बीच आग लगाने वाले बहुत, मॉस्को नहीं करेगा तेल आंकड़े सार्वजनिक

रूस ने तय किया है कि भारत के साथ किए जा रहे क्रूड ऑयल के आंकड़े नहीं करेगा, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कार्यालय क्रेमलिन ने कहा है कि मॉस्को, नई दिल्ली को भेजे जाने वाले तेल की मात्रा नहीं बताएगा. क्योंकि बुरा चाहने वाले बहुत लोग हैं. इसे गोपनीय रखना जरूरी है.

पिछले कुछ महीनों में भारत-रूस के तेल डील को लेकर अमेरिका से तनातनी थी. अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाते हुए मनमाना टैरिफ भी थोप दिया था. अमेरिका ने आरोप लगाया था कि भारत, रूस से तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष तौर पर युद्ध में मदद पहुंचा रहा है. वो बात दूसरी थी कि भारत, अमेरिका के दबाव में नहीं आया और आखिरकार टैरिफ में अमेरिका को छूट देनी पड़ी.

भारत संग तेल व्यापार पर कई देशों की गलत नजर, इसलिए आंकड़े छिपा रहे: क्रेमलिन

मिडिल ईस्ट में मची उथलपुथल और होर्मुज स्ट्रेट पर ऑयल के शिप फंस जाने के बाद रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि “भारत को निर्यात किए जाने वाले तेल के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे. दिमित्री ने कहा, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह जानकारी छिपाकर रखना जरूरी है, क्योंकि कई देश इस पर नजर रखे हुए हैं दुनिया में ऐसे कई लोग और देश हैं जो रूस के ऊर्जा व्यापार को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. बुरा चाहने वाले बहुत हैं, ऐसे में निर्यात से जुड़े आंकड़ों को गोपनीय रखना ही बेहतर है.”

क्रेमलिन के इस बयान के बाद भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है.पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

एक सप्ताह में 2.2 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति?

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में कहा था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी गई है. जिसके बाद कहा जाने लगा कि रूस एक सप्ताह में भारत को करीब 2.2 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति करने की क्षमता रखता है. हालांकि रूस ने इन आंकड़ों की पुष्टि करने से इनकार कर दिया है. कहा है कि हम आंकड़े नहीं बताएंगे कि तेल की कितनी आपूर्ति की जा रही है.

आपको बता दें कि 28 फरवरी को ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद पूरे मिडिल-ईस्ट में युद्ध भड़का हुआ है. ईरान ने अपने नियंत्रण वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जहां से कुल वैश्विक तेल सप्लाई का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है. ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की वजह से दुनियाभर में तेल सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल परिवहन में आई रुकावट के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है.

रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने संकेत दिया है कि उनका देश भारत और चीन जैसे बड़े ग्राहकों को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार है. ऐसे में रूस एशियाई देशों के साथ अपने ऊर्जा व्यापार को मजबूत करने में जुट गया है.

ट्रंप के अलावा किसी ने नहीं कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद किया: रूसी विदेश मंत्री

पिछसे महीने भारत और रूस की तेल डील को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने खारिज कर दिया था. लावरोव ने कहा था कि “अमेरिकी राष्ट्रपति के अलावा किसी ने भी ये नहीं कहा है कि भारत, रूस से तेल नहीं खरीदना बंद कर देगा.” 

एक सांसद के सवाल के जवाब में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने नई दिल्ली-मॉस्को के तेल डील पर बेबाकी से राय रखी थी. लावरोव ने कहा, “आपने उल्लेख किया कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की ओर से रूसी तेल ना खरीदने की सहमति की घोषणा की है. मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या अन्य भारतीय नेताओं सहित किसी और से ऐसा कोई बयान नहीं सुना है. भारत-रूस के रिश्ते बेहद मजबूत हैं. रूस और भारत के बीच हुए तेल समझौतों पर कोई खतरा नहीं है.”

editor
India's premier platform for defence, security, conflict, strategic affairs and geopolitics.