By Nalini Tewari
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार डिप्लोमेसी दिखी है. पीएम मोदी और जर्मन चांसलर की एक कार में साथ बैठे और बातें करते एक बेहद खास तस्वीर सामने आई है.
पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर के साथ ठीक वैसे ही अकेले में बात की है, जैसे उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नई दिल्ली के दौरे के समय की थी.
ईरान और रूस-यूक्रेन के मुद्दे पर हुई बात
फ्रेडरिक मर्ज ऐसे वक्त में भारत आए हैं, जब ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला करने की धमकी दे चुके हैं.
वहीं नाटो को लेकर भी ट्रंप ने कह दिया है कि अगर अमेरिका न रहे तो नाटो से रूस-चीन जैसे देश नहीं डरेंगे. वेनेजुएला पर अमेरिकी नियंत्रण के बाद ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कही है, लैटिन अमेरिकी देश कोलंबिया और क्यूबा पर सैन्य ऑपरेशन करने का दावा किया है. जिसके बाद यूरोप में हलचल बढ़ चुकी है.
जर्मनी यूरोप का एक सशक्त देश है जो नाटो और ईयू का प्रमुख साझेदार है. यूरोप पर पहले से रूस का खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में नाटो पर अमेरिका की ओर से आने वाले बयान से यूरोपीय देशों में हड़कंप मचा हुआ है.
ग्रीनलैंड के मुद्दे पर भी यूरोपीय देशों ने अमेरिका के खिलाफ आवाज उठाई है, जिसके बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों में भी संबंध असामान्य हैं.
दुनिया में बदल रही व्यवस्था, लोग सुरक्षित और स्वतंत्र दुनिया चाहते हैं: मर्ज
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा, कि “जर्मनी ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करता है, जिसमें सभी देश स्वतंत्र और सुरक्षित तरीके से रह सकें.”
चांसलर मर्ज ने कहा कि “दुनिया की व्यवस्था तेजी से बदल रही है, जहां बड़ी ताकतों की राजनीति और प्रभाव क्षेत्रों का दौर चल रहा है. यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामक कार्रवाई इस बदलाव का सबसे गंभीर उदाहरण है. हर मुद्दे पर सभी की राय एक जैसी नहीं होती, चाहे वह भारत-जर्मनी हों या यूरोप के अन्य साझेदार, लेकिन इसके बावजूद, दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर मजबूत सहमति और सहयोग मौजूद है.”
मर्ज ने भारत की तारीफ करते हुए कहा, “भारत, जर्मनी के लिए एक भरोसेमंद और पसंदीदा पार्टनर है.”
करीब आ रहे भारत और यूरोप, अमेरिका को माना जा रहा जवाब
पिछले कुछ महीनों में भारत और यूरोपीय देशों के बीच नजदीकी बढ़ी है. पिछले सप्ताह विदेश मंत्री एस जयशंकर यूरोपीय देश लग्जमबर्ग और पेरिस के दौरे पर थे. लग्जमबर्ग में पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से जयशंकर ने बात की थी.
वीमर प्रारूप की पहली बैठक में एस जयशंकर ने भारत और यूरोप के बीच गहरे संबंधों पर बात की थी. साथ कहा था कि दुनिया इस समय उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. यूरोप भी कई रणनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. कुछ वैश्विक घटनाएं ऐसी हैं जो पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित कर सकती हैं.
जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया था कि समान सोच वाले देशों को एकजुट होना चाहिए.
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप सिर्फ भारत-चीन-रूस पर ही दबाव बनाने की कोशिश नहीं कर रहे, उनके टारगेट पर यूरोप भी है. ट्रंप अपने करीबी देशों के साथ भी संबंध खराब करने पर तुले हुए हैं, जिससे वैश्विक अस्थिरता और अनिश्चितता बढ़ गई है.
भारत का यूरोप के साथ संबंध बढ़ाना अमेरिका को जवाब माना जा रहा है. अमेरिकी टैरिफ के जवाब में झुकने के बजाय भारत नया बाजार तलाश कर रहा है. रूस के साथ भारत के प्रगाढ़ संबंध तो हैं ही, अब चीन से भी संबंध सुधरे हैं. कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, ब्रिटेन समेत ईयू के साथ भी संबंध अच्छे हो रहे हैं.
यही कारण है कि इस साल गणतंत्र दिवस 2026 में बतौर चीफ गेस्ट यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व को आमंत्रित किया गया है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे.
ईरान के लोग आजादी चाहते हैं: जर्मन चांसलर
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने ईरान के मुद्दे पर भी खुलकर बात की. मर्ज ने कहा, “ईरान के लोग आजादी और बेहतर जीवन के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं और यह उनका अधिकार है. प्रदर्शनकारी अत्यधिक हिंसा का बहादुरी से सामना कर रहे हैं.”
चांसलर मर्ज ने भारत से ईरान की सरकार और नेतृत्व से अपील की कि “वे अपने नागरिकों को धमकाने के बजाय उनकी सुरक्षा करें. ईरानी लोगों के खिलाफ की जा रही हिंसा ताकत नहीं, बल्कि कमजोरी की निशानी है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए.”

