खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस के चीफ और आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने का गुनाह निखिल गुप्ता ने कबूल कर लिया है. निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क सिटी स्थित मैनहट्टन फेडरल कोर्ट में तीन आपराधिक आरोपों में ये मान लिया है कि वो हत्या के लिए सुपारी देने की साजिश, हत्या की कोशिश और मनीलॉन्ड्रिंग में लिप्त था.
निखिल गुप्ता को 2023 में चेक गणराज्य से गिरफ्तार करके साल 2024 में अमेरिका लाया गया था. एफबीआई का कहना था, कि जिस शख्स को निखिल गुप्ता ने पन्नू को मारने की सुपारी दी थी, वो उसका ही एजेंट था. जिसके चलते पूरे मामले का खुलासा हो गया था.
एफबीआई की आरोप था कि इस प्लानिंग में भारतीय शख्स विकास गुप्ता का भी हाथ था. साल 2024 में सामने आया ये वो केस था, जिसके चलते बाइडेन सरकार और भारत सरकार के बीच तल्खी बढ़ गई थी. अमेरिका ने खालिस्तानी आतंकी का पक्ष लेते हुए भारतीय एजेंसी और एनएसए अजीत डोवल पर भी गंभीर आरोप लगाया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था.
निखिल गुप्ता ने स्वीकार किया आरोप, माना खुद को गुनाहगार
साल 2023 में अमेरिका से ऐसी खबरें सामने आईं थीं, कि भारत के मोस्टवांटेड खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू पर हमले की कोशिश हुई है. इस मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब चेक गणराज्य से 54 वर्षीय शख्स निखिल गुप्ता को गिरफ्तार किया गया. कुछ महीनों बाद चेक गणराज्य से निखिल गुप्ता को अमेरिका को प्रत्यर्पित कर दिया.
अमेरिका का आरोप है कि निखिल गुप्ता ने एक भारतीय सरकारी अधिकारी के साथ मिलकर पन्नू की हत्या की साजिश रची थी.
आपको बता दें कि पन्नू अमेरिका में रहने वाला व्यक्ति है और उसके पास दोहरी नागरिकता है. अमेरिका के साथ-साथ कनाडा से अक्सर भारत विरोधी बातें करता है और धमकियां देता है. साल 2026 गणतंत्र दिवस के मौके पर भी पन्नू ने धमकी दी थी.
पन्नू के पक्ष में अमेरिका, भारत ने आरोपों को किया खारिज
एफबीआई का दावा है कि निखिल गुप्ता ने एक भारतीय अधिकारी विकास उर्फ विक्रम यादव के कहने पर पन्नू की हत्या की साजिश रची थी.
अमेरिकी न्याय विभाग ने न्यूयॉर्क कोर्ट में दायर चार्जशीट में विक्रम यादव उर्फ विकास यादव का नाम गुप्त रख सिर्फ ‘सीसी-1’ लिखा है.
अमेरिका के मुताबिक, सीसी-1 (विक्रम) पहले सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) में कार्यरत थे और ‘बैटल-क्राफ्ट और वेपन्स में ट्रेनिंग’ ले चुके हैं. वे भारत की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (आर एंड डब्लू) यानी रॉ में सीनियर फील्ड ऑफिसर के पद पर तैनात थे और सिक्योरिटी मैनेजमेंट सहित इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी निभा रहे थे. लेकिन पन्नू मामले में नाम आने के चलते उन्हें पद से हटा दिया गया था.
यूएस जस्टिस विभाग के मुताबिक, सीसी-1 (विक्रम यादव) ने ही चेक गणराज्य में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिक निखिल गुप्ता को पन्नू की हत्या करने का आदेश दिया था. पन्नू की हत्या को व्रिकम यादव ने प्राथमिकता करार दिया था.
विक्रम ने ही निखिल गुप्ता को पन्नू के न्यूयॉर्क के घर का पता दिया था. जानकारी के मुताबिक, रॉ के तत्कालीन चीफ सामंत गोयल के इशारे पर ही व्रिकम यादव ने पन्नू की सुपारी दी थी.
जून (2023) में अमेरिका के टिप-ऑफ पर यूरोपीय देश चेक गणराज्य ने निखिल गुप्ता उर्फ निक को पन्नू की हत्या की कोशिश की सुपारी देने के आरोप में गिरफ्तार किया था. अमेरिका का दावा है कि जिस शख्स को निखिल गुप्ता ने पन्नू की सुपारी दी थी वो और कोई नहीं यूएस ड्रग एनफोर्समेंट एजेंसी (डीएई) का ही एक सोर्स था. इस सोर्स ने डीएई के एक अधिकारी को हिटमैन के तौर पर निखिल गुप्ता से मुलाकात कराई थी.
निखिल गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट ने न्यूयॉर्क कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी जिसमें भारत सरकार के एक (पूर्व) अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे.
चार्जशीट तैयार कराने में अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन (एफबीआई) और डीईए ने अहम भूमिका निभाई है. अमेरिका की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) ने भी जांच में सहयोग किया है.
इस मामले को लेकर बाइडेन सरकार में रहे सीआईए के चीफ ने भारत का दौरा किया था और पूर्व एफबीआई प्रमुख ने भी साल 2024 में एनआईए हेडक्वार्टर का दौरा किया था.
गौरतलब है कि जिस दिन (30 जून 2023 को) चेक गणराज्य ने निखिल गुप्ता को गिरफ्तार किया था उसी दिन सामंत अपने पद से रिटायर हुए थे. पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी सामंत जून 2019 में रॉ के चीफ के पद पर तैनात किए गए थे. वर्ष 2022 में उन्हें एक साल का विस्तार दिया गया था. हालांकि, विस्तार देते समय उनके लेटर पर रिटायरमेंट की तारीख 30 जून (2023) ही लिखी थी. सामंत वर्ष 2001 से रॉ में तैनात थे. उससे पहले सामंत ने पंजाब में खालिस्तानी उग्रवाद के खिलाफ लड़ने में अहम भूमिका निभाई थी.
खास बात ये है कि जिस वक्त पन्नू की हत्या की साजिश रचने के मामले में निखिल को गिरफ्तार किया गया था, उससे कुछ दिनों पहले ही कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की गई थी. इस मामले में कनाडा ने भी भारत को आरोपी ठहराया है.
बाइडेन सरकार के दौरान ये मामला इतना बढ़ गया था कि भारत-अमेरिका के रिश्ते बेपटरी हो गए थे. भारत ने सारे आरोपों को बेबुनियाद बताया था. वहीं अमेरिका ने एनएसए अजीत डोवल के खिलाफ समन जारी कर दिया था, जिसके बाद तल्खी और बढ़ गई थी.

