ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता की चाहत रखने वाले पाकिस्तान के आतंकियों से संबंध की पोल अमेरिका ने खोली है. अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड के पाकिस्तान को लेकर किए गए खुलासे के बाद अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च रिपोर्ट ने भी पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया है. 25 मार्च को जारी रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान को कई हथियारबंद आतंकी गुटों के ऑपरेशन के अड्डे के तौर पर पहचान की है.
इतना ही नहीं रिपोर्ट में ये भी जिक्र किया गया है कि आतंकी संगठन इस्लामिक कट्टरपंथी हैं और ना सिर्फ भारत बल्कि अफगानिस्तान और दुनियाभर में सक्रिय हैं. इस रिपोर्ट में लश्कर ए तैयबा का भी नाम लिया गया है. वहीं रिपोर्ट में माना गया है कि तमाम सैन्य हमलों और एयर स्ट्राइक के बावजूद ये आतंकी संगठन एक बार फिर खड़े हो जाते हैं.
पूरी दुनिया पाकिस्तान की सच्चाई जानती है और स्वीकार करती है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं कि पाकिस्तान से गलबहियां करने में जुटे हुए हैं.
पाकिस्तान में आतंकी संगठन सक्रिय: अमेरिकी रिपोर्ट
अमेरिकी कांग्रेस ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान को आतंकियों का गढ़ बताया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय अनेक आतंकी संगठन दशकों से जमे हुए हैं और उनके खिलाफ चलाए गए बड़े सैन्य अभियानों, हवाई हमलों तथा लाखों खुफिया अभियानों के बावजूद उनके ढांचे को निर्णायक रूप से समाप्त नहीं किया जा सका है.
25 मार्च को जारी अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार. अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान को अनेक सशस्त्र और आतंकी समूहों का संचालन केंद्र माना है. इनमें कुछ संगठन 1980 के दशक से सक्रिय हैं और आज भी मजबूत ढांचे के साथ काम कर रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, ये आतंकी गुट या तो दुनिया भर में सक्रिय हैं, या अफगानिस्तान, भारत या देश के अंदर ही सक्रिय हैं. इनमें से 12 आतंकी गुटों को अमेरिकी कानून के तहत ‘विदेशी आतंकी संगठन’ घोषित किया गया है और इनमें से अधिकतर गुट इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा को मानते हैं.
नाम बदलकर आतंक फैला रहा लश्कर ए तैयबा: अमेरिकी रिपोर्ट
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत और कश्मीर पर फोकस करने वाले आतंकी गुट ‘लश्कर-ए-तैयबा’ का गठन 1980 के दशक के आखिर में पाकिस्तान में हुआ था और 2001 में इसे एफटीओ घोषित किया गया था.
रिपोर्ट के अनुसार हाफिज सईद के नेतृत्व वाला यह संगठन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान अधिकृत गुलाम कश्मीर में सक्रिय रहा तथा प्रतिबंधों से बचने के लिए उसने अपना नाम बदलकर जमात-उद-दावा कर लिया. कई हजार लड़ाकों वाले इस संगठन को साल 2008 मुंबई आतंकी हमले सहित कई बड़े हमलों का जिम्मेदार बताया गया है.
अमेरिकी रिपोर्ट में हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी, हरकत-उल-मुजाहिदीन और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों का भी उल्लेख किया गया है, जो पाकिस्तान से संचालन जारी रखे हुए हैं.
लश्कर के अलावा ‘जैश-ए-मोहम्मद’ को भी खूंखार आतंकी मसूद अजहर ने साल 2000 में बनाया था, इस आतंकी संगठन को साल 2001 में अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित किया था.
आपको बता दें कि पिछले साल यानि 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बड़ा आतंकी हमला हुआ था, जिसमें आतंकियों ने पर्यटकों से धर्म पूछ-पूछकर मारा था. इस हमले के पीछे लश्कर का प्रॉक्सी टीआरएफ था. अमेरिकी रिपोर्ट में जो बताया गया, वो भारत को कई वर्षों से कह रहा है कि पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर कई नामों से संगठन संचालित करता है. हालांकि अब टीआरएफ को अमेरिका ने वैश्विक आतंकी संगठन घोषित कर दिया है.
पूरी दुनिया के लिए खतरा है पाकिस्तान: तुलसी गबार्ड
अमेरिका की खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने सीनेट की एक बैठक में खुफिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दुनिया के सामने पाकिस्तान की काली सच्चाई सामने रखी थी. तुलसी गबार्ड ने कहा था कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार अमेरिका के लिए बड़ा खतरा है.
गबार्ड ने अमेरिका की सुरक्षा को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है. तुलसी गबार्ड ने कहा है कि “पाकिस्तान उन देशों में शामिल है, जो अमेरिका के लिए सबसे बड़े परमाणु खतरा हैं. पाकिस्तान-चीन, रूस-उत्तर कोरिया और ईरान ऐसे डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जिनमें न्यूक्लियर और कन्वेंशनल दोनों पेलोड हैं. ये सिस्टम सीधे अमेरिका तक पहुंच सकते हैं.”
18 मार्च को अमेरिका के ओडीएनआई ने अपनी एक रिपोर्ट जारी की. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि “पाकिस्तान अब ऐसी खतरनाक मिसाइलों पर काम कर रहा है जो लंबी दूरी तक मार कर सकती हैं. आशंका तो यह भी जताई गई है कि इस्लामाबाद ऐसी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल बना रहा है, जो सीधे अमेरिका तक पहुंच सकती हैं. मतलब साफ है कि पाकिस्तान अब सिर्फ अपने पड़ोसियों के लिए ही नहीं, बल्कि अमेरिका और यूरोप के लिए भी खतरा है.”
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि “अमेरिका आज जिस जटिल खतरे का सामना कर रहा है, उसमें पाकिस्तान की भूमिका संदिग्ध है. भले ही अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे संगठन पहले के मुकाबले कमजोर हुए हों, लेकिन पाकिस्तान में पनप रहे नए गुट जैसे आईएसआईएस-के अब भी अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं. ये आतंकी गुट भर्ती और अपनी साजिशों के लिए पाकिस्तान इलाकों का इस्तेमाल कर रहे हैं.”
ऑपरेशन सिंदूर में आतंकी संगठनों के हेडक्वार्टर भारत ने किए थे तबाह
पहलगाम नरसंहार के बाद 06-10 मई (2025) को भारत ने पाकिस्तान में पाले जा रहे लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठनों पर कड़ा सैन्य ऑपरेशन किया था. भारतीय वायुसेना ने लश्कर-जैश आतंकी संगठनों के मुख्यालय को तबाह कर दिया था. इस ऑपरेशन में आतंकी सरगना मसूद अजहर के कई करीबी आतंकियों की मौत हुई थी. जैश के कमांडर्स का खात्मा किया गया था. लेकिन कुछ महीनों बाद ही पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से ये आतंकी संगठन मस्जिद बनाने के नाम पर चंदा मांगने लगे और एक बार फिर से आतंकियों को खड़ा करने की कोशिश में है.

