तालिबान के हाथों मार खाने के बाद एक बार फिर से पाकिस्तान गिड़गिड़ाने लगा है. रोते बिखलखते पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने तुर्किए को फोन घुमाया तो तुर्किए के विदेश मंत्री हकान फिदान ने सऊदी अरब और कतर से फोन पर बात की है. पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच पिछले साल अक्टूबर में हुआ सीजफायर टूट चुका है और एक बार फिर पाकिस्तान के सैन्य अड्डों को भारी नुकसान पहुंचा है.
पाकिस्तान ने बीती रात काबुल और कांधार में हवाई हमले करने का दावा किया तो अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की करीब 15 सैन्य पोस्ट को कब्जाने और फैजाबाद में हमले का दावा कर दिया. इतना ही नहीं दिन के उजाले में अफगानिस्तान के आत्मघाती ड्रोन इस्लामाबाद तक पहुंच गए. इन बिगड़ते हालातों के बीच, पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने तुर्किए फोन लगाया है और मदद की गुहार लगाई है. इशाक डार ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री से भी बात की है.
इशाक डार ने की तुर्किए से बात, तुर्किए ने घुमाया कतर-सऊदी को कॉल
पाकिस्तानके विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट लिखकर जानकारी दी है कि इशाक डार ने तुर्किए के विदेश मंत्री से फोन पर बात की है. विदेश मंत्रालय ने लिखा, “पाकिस्तानी मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान से टेलीफोन पर बात की. इसमें क्षेत्रीय घटनाक्रमों, खास तौर से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की हालात पर चर्चा की. मोहम्मद इशाक डार ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की आक्रामकता का जवाब दिया है और अपनी संप्रभुता और अखंडता की सुरक्षा के लिए पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन गजब लिल हक के तहत सफल हवाई अभियान चलाए हैं. दोनों नेताओं ने इलाके में शांति और स्थिरता के महत्व पर जोर दिया और उभरते nj nहालातों पर नजर रखने पर सहमति जताई.”
तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने पाकिस्तान के अलावा अफगानिस्तान, कतर और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग फोन पर बातचीत कर संघर्ष पर चर्चा की है.
दोनों देशों में मध्यस्थता करने को तैयार रूस
रूस ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों पक्षों से तुरंत सीमा पार हमले रोकने और कूटनीतिक तरीकों से मतभेद सुलझाने की अपील की है. साथ ही रूस की ओर से कहा गया है कि वो पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच मध्स्थता करने को तैयार है. रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने बयान देते हुए कहा, हम दोनों देशों को एक मेज पर बातचीत करने की अपील करते हैं.
मारिया जाखोरोवा ने कहा, “अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सशस्त्र झड़पों में तेज बढ़ोतरी को लेकर हम चिंतित हैं. दोनों पक्ष लड़ाई में रेगुलर सेना के यूनिट्स, विमान और भारी हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है. नागरिकों की जान जा रही है. हम अपने मित्र अफगानिस्तान-पाकिस्तान से अपील करते हैं कि वो लड़ाई से बचें और सभी मतभेदों को राजनीतिक व कूटनीतिक तरीकों से सुलझाने के लिए बातचीत की टेबल पर लौटें.”
वहीं क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा, कि “हम हालात पर करीब से नजर बनाए हुए हैं. दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीधा सैन्य टकराव चिंताजनक हैं और इन्हें जल्द से जल्द समाप्त होना चाहिए. अगर ये नहीं रुका तो हालात और खराब हो जाएंगे.”
आपको बता दें कि रूस वो पहला देश है, जिसने अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी है. पिछले साल रूस ने अफगानिस्तान के साथ मित्रता बढ़ाते हुए उनकी सरकार को मान्यता दे दी थी.
चीन से ने संघर्ष पर क्या कहा?
पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच छिड़े इस युद्ध का सबसे ज्यादा खामियाजा चीन को है. चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का विस्तार काबुल तक करना चाहता था. पिछले साल खुद चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने काबुल का दौरा किया था और पाकिस्तान-अफगानिस्तान को एक मंच पर लाने की कोशिश की थी. चीन ने ताजा संघर्ष पर चिंता जताई है. चीनी विदेश मंत्रालय ते प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, “चीन अलग-अलग जरिए से इस संघर्ष को कम करने की कोशिश कर रहा है. चीन रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है.”
रमजान आत्मसंयम का महीना, दोनों पड़ोसी देशों में संबंध सुधरे: ईरान
अमेरिका के सैन्य एक्शन शुरू होने से पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान को रमजान का हवाला दिया है.अराघची ने अपने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है, “रमज़ान के पवित्र महीने में, जो इस्लामी जगत में आत्मसंयम और एकजुटता को मजबूत करने का महीना है, यह उचित है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान अच्छे पड़ोसी संबंधों के दायरे में और संवाद के माध्यम से अपने मौजूदा मतभेदों का समाधान करें. ईरान दोनों देशों के बीच संवाद को सुगम बनाने और आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करने में हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है.”

