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पाकिस्तानी न्यूक्लियर प्रोग्राम अमेरिका के लिए घातक:गबार्ड

ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच अमेरिका की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (डीएनआई) चीफ तुलसी गबार्ड ने पाकिस्तान और चीन को बताया है वाशिंगटन के लिए बड़ा खतरा. अमेरिका की सीनेट इंटेलिजेंस की एक बैठक के दौरान तुलसी गबार्ड ने पाकिस्तान और चीन को लेकर एक गंभीर चेतावनी दी है.

डीएनआई चीफ ने कहा, साल 2035 तक अमेरिकी मुख्यभूमि पर न्यूक्लियर पेलोड वाले हमलों का खतरा दस गुना बढ़ सकता है, क्योंकि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान न्यूक्लियर हथियार विकसित कर रहे हैं, जिनकी पहुंच अमेरिका तक है. अमेरिका की खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड के एक बयान ने हड़कंप मचा दिया है.

अमेरिका तक पहुंच सकते हैं पाकिस्तानी परमाणु हथियार: तुलसी गबार्ड

गबार्ड ने अमेरिका की सुरक्षा को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है. तुलसी गबार्ड ने कहा है कि “पाकिस्तान उन देशों में शामिल है, जो अमेरिका के लिए सबसे बड़े परमाणु खतरा हैं. गबार्ड ने कहा, पाकिस्तान-चीन, रूस-उत्तर कोरिया और ईरान ऐसे डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जिनमें न्यूक्लियर और कन्वेंशनल दोनों पेलोड हैं. ये सिस्टम सीधे अमेरिका तक पहुंच सकते हैं.”

तुलसी गबार्ड ने ये भी कहा कि “अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी का आकलन है कि चीन और रूस उन्नत डिलीवरी सिस्टम बना रहे हैं, जो अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम (पैट्रिएट और थाड) को भेदने या बायपास करने में सक्षम होंगे. ये सिस्टम हाइपरसोनिक मिसाइलें, उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें और अन्य आधुनिक हथियार हैं. ये हथियार पारंपरिक एयर डिफेंस को चकमा देने की क्षमता रखते हैं.”

तुलसी गबार्ड ने कहा, “परमाणु हथियारों का यह विकास न केवल अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि पूरे विश्व को अस्थिर कर सकते हैं. रूस अपनी न्यूक्लियर फोर्स को आधुनिक बना रहा है. ताकि अमेरिकी मिसाइल डिफेंस को पार कर सके, चीन अपनी न्यूक्लियर क्षमता तेजी से बढ़ा रहा है और नए डिलीवरी प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है. उत्तर कोरिया और ईरान भी लंबी दूरी की मिसाइलों पर काम कर रहे हैं, जबकि पाकिस्तान अपनी न्यूक्लियर क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है.”

ईरानी न्यूक्लियर प्रोग्राम को अमेरिका ने किया था ध्वस्त: तुलसी गबार्ड

गबार्ड ने ये भी बताया कि “अमेरिका ने पिछले साल जून में ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को बड़ा नुकसान पहुंचाया था. तब से अब तक ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने की कोई बड़ी कोशिश नहीं की है.”

तुलसी गबार्ड का ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब मिडिल ईस्ट में भयंकर जंग छिड़ी हुई है. अमेरिका-इजरायल मिलकर ईरान पर हमले कर रहे हैं. तो ईरान पलटवार कर रहा है और अमेरिकी सैनिकों को निशाना बना रहा है.

गबार्ड के ईरान के परिपेक्ष में दिए गए बयान पर यकीन किया जाए तो अगर पिछले साल से अब तक ईरान ने न्यूक्लियर प्रोग्राम की कोशिश तक नहीं की तो फिर न्यूक्लियर के नाम पर ये हमले क्यों किए गए. मंगलवार को ही तुलसी गबार्ड के करीबी और अमेरिका के काउंटर टेरर के चीफ जोसेफ ने इस्तीफा देकर राष्ट्रपति ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाए थे, कि ईरान खतरा नहीं था.

सवाल है कि क्या पाकिस्तान के जिस फेल्ड (फील्ड) मार्शल असीम मुनीर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करीबी गांठे हुए हैं, क्या वही पाकिस्तान न्यूक्लियर हथियार बनाकर अमेरिका के लिए खतरा बन जाएगा. क्या रूस-चीन और उत्तर कोरिया की मिसाइलों के आगे अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम फेल हो जाएगा. तुलसी गबार्ड का ये बयान ईरान मोर्चे पर घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चिंता बढ़ाने वाला है.

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