Breaking News Conflict Middle East NATO

शांतिदूत ने दिखाया असली रंग, रूस-चीन खड़ा ईरान के साथ

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष को लेकर दो धड़ों में बंट गई है दुनिया. रूस ने अपने दोस्त ईरान के लिए आवाज उठाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तंज कसा है. रूस ने जिनेवा में हो रही बातचीत को कवर अप बताते हुए कहा है कि शांति कायम का दावा करने वाले अपना असली रंग दिखा रहे. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन ने संयुक्त राष्ट्र में आपात बैठक बुलाने की मांग करते हुए अमेरिकी हमलों की निंदा की है.

वहीं फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मिडिल ईस्ट के हालात पर चिंता जताई है. मैक्रों ने कहा है कि अगर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होता है तो इसके अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर परिणाम होंगे.  यूरोपीय देशों ने शांति की अपील की है तो माना जा रहा है कि खाड़ी देश मिलकर अमेरिका पर हमले रोकने का दबाव बना सकते हैं

अमेरिका पहले से ही समझौता नहीं करना चाहता, बातचीत सिर्फ दिखावा: रूस

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के बेहद खास और रूसी अभी रूस की सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिका पर ईरान को बातचीत में फंसाए रखने का आरोप लगाया है. दिमित्री ने कहा, अमेरिका पहले से ही ईरान से कोई समझौता नहीं करना चाहता है. मेदवेदेव ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह मिलिट्री ऑपरेशन से पहले ईरान के साथ न्यूक्लियर बातचीत को कवर-अप के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है.

मेदवेदेव ने टेलीग्राम पर कहा, “शांति कायम करने वाले ने एक बार फिर अपना असली रंग दिखा दिया है. ईरान के साथ सभी बातचीत एक कवर ऑपरेशन है.इस पर किसी को शक नहीं था. कोई भी सच में किसी भी बात पर सहमत नहीं होना चाहता था.”

रूसी विदेश मंत्रालय ने भी ईरान पर हुए हमले को लेकर एक लिखित बयान जारी किया है, रूस ने ईरान पर अमेरिकी और इजरायल के हमलों को तुरंत रोकने की अपील की है और कहा है कि “हालात को पॉलिटिकल और डिप्लोमैटिक सेटलमेंट के रास्ते पर वापस लाया जाना चाहिए. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को उन गैर-ज़िम्मेदाराना कामों का तुरंत रोकने में मदद करनी चाहिए क्योंकि ऐसे एक्शन से इलाके में और अस्थिरता का खतरा है. रूस ने कहा, हम पहले की तरह, इंटरनेशनल कानून, आपसी सम्मान और हितों के बैलेंस के आधार पर शांतिपूर्ण समाधान खोजने की कोशिशों में मदद करने के लिए तैयार हैं.”

तुरंत युद्धविराम हो, ईरान की संप्रभुता का सम्मान जरूरी: चीन

चीन ने गहरी चिंता जताई है और सभी पक्षों से तुरंत युद्धविराम की अपील की है. चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि “ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए. चीन ने चेतावनी दी कि सैन्य कार्रवाई से हालात और बिगड़ सकते हैं, इसलिए सभी देशों को तनाव बढ़ाने से बचना चाहिए. बीजिंग ने विवाद के समाधान के लिए संवाद और कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू करने पर जोर दिया। चीन ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता भी बताई.”

तुर्किये ने की मध्यस्थता की पेशकश, सभी पक्षों से की हमले रोकने की अपील

तुर्किये ने सभी पक्षों से तुरंत हमले रोकने की अपील की है. तुर्किये के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि “मौजूदा घटनाक्रम ऐसे उकसावे हैं जो बड़े सैन्य संघर्ष को जन्म दे सकते हैं. हमले क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. तुर्किये ने तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करने और जरूरत पड़ने पर मध्यस्थता की भूमिका निभाने की भी पेशकश की है.” तुर्किये ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया.
 

फ्रांस, बेल्जियम और यूरोपीय देशों ने क्या प्रतिक्रिया दी

  • युद्ध शुरु हुआ तो गंभीर परिणाम: मैक्रों

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि “अगर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होता है तो इसके अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर परिणाम होंगे. फ्रांस अपने करीबी साझेदारों की मांग पर उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी संसाधन तैनात करने को तैयार है.”

  • ट्रंप ने गलती की, विश्व शांति को प्राथमिकता मिले: कोलंबिया

कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने कहा है कि उनका मानना है कि “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज गलती कर दी है. उन्होंने कहा कि पूरी मानवता का साझा उद्देश्य विश्व शांति होना चाहिए, क्योंकि शांति और जीवन ही अस्तित्व की बुनियाद हैं. पेट्रो ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को तुरंत बैठक बुलाकर यह घोषित करना चाहिए कि अब दुनिया में शांति स्थापित करने का समय है. साथ ही उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों का प्रसार नहीं होना चाहिए और इन्हें पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए.”

  • जनता को ऐसे संघर्ष से होता है नुकसान: बेल्जियम

बेल्जियम के विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवो ने कहा है कि “ईरान की जनता को अपनी सरकार के फैसलों की कीमत नहीं चुकानी चाहिए. सभी पक्षों से अपील है कि किसी भी हाल में आम नागरिकों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और संघर्ष के बीच मानवीय जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी जाए.”

  • स्पेन ने हमलों पर जताई आपत्ति

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई को एकतरफा कदम बताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ाने वाला बताया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में सांचेज ने कहा कि “ऐसी कार्रवाई वैश्विक व्यवस्था को और अस्थिर तथा टकरावपूर्ण बना सकती है. हालांकि उन्होंने ईरान सरकार और रिवोल्यूशनरी गार्ड की गतिविधियों को भी स्वीकार्य नहीं बताया. स्पेन ने सभी पक्षों से तुरंत तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह सम्मान करने की मांग की है. कहा, मौजूदा संकट का समाधान केवल कूटनीतिक बातचीत और शांतिपूर्ण रास्ते से ही संभव है.”

  • यूरोपीय संघ के सैनिक हैं सतर्क: काजा कल्लास

ईयू की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने कहा है कि “मध्य पूर्व में ताजा घटनाक्रम बेहद खतरनाक हैं. ईरान की सरकार ने हजारों लोगों की जान ली है और उसके बैलिस्टिक मिसाइल व परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ आतंकी संगठनों को समर्थन वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है. यूरोपीय संघ ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और परमाणु मुद्दे समेत कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया है. मैंने इजरायल के विदेश मंत्री और क्षेत्र के अन्य नेताओं से बात की है तथा यूरोपीय संघ अरब देशों के साथ मिलकर कूटनीतिक रास्ते तलाश रहा है. आम नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन प्राथमिकता है, यूरोपीय नागरिकों की वापसी में दूतावास सक्रिय हैं, गैर-जरूरी कर्मचारियों को क्षेत्र से निकाला जा रहा है और लाल सागर में यूरोपीय संघ का नौसैनिक मिशन सतर्क स्थिति में है ताकि समुद्री मार्ग खुला रखा जा सके.”

  • लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो- जर्मनी, ब्रिटेन

जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने क्षेत्र के देशों पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की है. तीनों देशों के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया. जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि “मौजूदा संकट का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि बातचीत से निकाला जाना चाहिए. कूटनीतिक वार्ता करके शांति के रास्ते पर लौटना चाहिए.”

editor
India's premier platform for defence, security, conflict, strategic affairs and geopolitics.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *