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डिनर टेबल पर मोदी और यूनुस, वार्ता पर सस्पेंस बरकरार

बैंकॉक में बिम्सटेक की बैठक से पहले आयोजित डिनर के दौरान आई एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा है. पीएम नरेंद्र मोदी के बगल में बैठे नजर आए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस. पिछले साल अगस्त में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद पहला मौका था, जब पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस का आमना-सामना हुआ है.

डिनर की तस्वीर में पीएम मोदी के एक ओर मोहम्मद यूनुस तो दूसरी ओर नेपाल के पीएम के पी ओली बैठे नजर आए. रणनीतिक तौर पर ये तस्वीर बहुत कुछ कह रही है, क्योंकि नेपाल और बांग्लादेश दोनों की सुर इन दिनों भारत के विरोध में निकल रहे हैं. बहरहाल इस बात पर सस्पेंस है कि पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच शुक्रवार को द्विपक्षीय वार्ता हो सकती है. हालांकि भारत सरकार की ओर से द्विपक्षीय वार्ता को लेकर कोई भी औपचारिक बयान नहीं दिया गया है.

थाईलैंड में साथ नजर आए मोदी-यूनुस, बात हुई या नहीं?

बैंकॉक की पीएम पेंटोगोर्टान शिनावात्रा द्वारा आयोजित डिनर समारोह में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस पास-पास बैठे नजर आए. यूनुस के कार्यालय ने कुछ तस्वीरें साझा कीं, जिसमें चाओ फ्राया नदी के तट पर स्थित होटल ‘शांगरी-ला’ में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख को मोदी के बगल में बैठे देखा जा सकता है. लेकिन जो तस्वारें सामने आई है, उसनें दोनों ही एक दूसरे को नहीं देख रहे हैं. ऐसे में कयास ये लगाए जा रहे हैं कि डिनर के दौरान क्या दोनों के बीच कोई बातचीत हुई या नहीं. 

बांग्लादेश ने भारत से गुजारिश की है कि बैंकॉक में पीएम मोदी और यूनुस के बीच द्विपक्षीय बैठक कराई जाए. लेकिन भारत की तरफ से बैठक को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि शुक्रवार को बैठक हो सकती है. पीएम मोदी और यूनुस की मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि बांग्लादेश में हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने और वहां अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में गिरावट आई है. साथ ही पिछले सप्ताह अपने चीन के दौरे पर गए यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर गलत बयानबाजी की है, चीन के सामने खुद को महासागर का ‘संरक्षक’ बताया है. 

बिना नाम लिए मोहम्मद यूनुस की टिप्पणी पर जयशंकर ने दिया बयान, बता दिया असली संरक्षक कौन है

गुरुवार को बैंकॉक में हुई मंत्रिस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि “भारत बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बिम्सटेक के संबंध में अपनी जिम्मेदारी जानता है. हमारे पास बंगाल की खाड़ी में लगभग 6500 किमी की सबसे लंबी तटरेखा है. हमारा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र सड़कों, रेलवे, जलमार्ग, ग्रिड और पाइपलाइनों के असंख्य नेटवर्क के साथ बिम्सटेक के लिए एक कनेक्टिविटी केंद्र के रूप में उभर रहा है.”

जयशंकर ने कहा कि “त्रिपक्षीय राजमार्ग (भारत-म्यांमार-थाईलैंड) का पूरा होना भारत के उत्तर पूर्व (नॉर्थ ईस्ट) को प्रशांत महासागर तक जोड़ देगा, जो एक वास्तविक गेम-चेंजर है. हम इस बात के प्रति सचेत हैं कि इस बड़े भूगोल में वस्तुओं, सेवाओं और लोगों के सुचारू प्रवाह के लिए हमारा सहयोग और सुविधा एक आवश्यक शर्त है. इस जियोपॉलिटिकल कारक को ध्यान में रखते हुए हमने पिछले दशक में बिम्सटेक को मजबूत करने के लिए बढ़ती ऊर्जा और ध्यान समर्पित किया है. सहयोग एक एकीकृत दृष्टिकोण है, न कि किसी एक को चुनने का विषय.”

नेपाल में राजशाही के वापसी पर प्रदर्शन, के पी ओली से हो सकती है बातचीत

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और म्यांमार के वरिष्ठ जनरल मिन आंग हलिंग से भी मुलाकात की संभावना है. नेपाल में इन दिनों राजशाही की बहाली को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में भाुरत का नाम घसीटा गया है. ऐसे में ओली और मोदी की बातचीत पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं. वहीं, म्यांमार के जनरल हलिंग भी बैंकॉक पहुंचे हैं, जबकि देश भूकंप की भयंकर त्रासदी से जूझ रहा है. भारत ने म्यांमार की मदद पहुंचाने के लिए फर्स्ट रिस्पॉन्डर की के तौर पर नजर आया है. 


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