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भारत के तेल टैंकर्स की सुरक्षा, राजनाथ ने सेना प्रमुखों संग रचा चक्रव्यूह

पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य संकट के बीच भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की है बड़ी बैठक. इस बैठक में सीडीएस जनरल अनिल चौहान, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, जनरल उपेंद्र द्विवेदी, एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष समीर कामत और अन्य लोग भी उपस्थित थे.

बैठक में देश की ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज की खाड़ी से गुजरने वाले भारतीय तेल टैंकर्स की सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा की गई.

आपको बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला व्यापारिक मार्ग बाधित है, लेकिन भारत-ईरान के साथ अच्छे संबंधों और कूटनीतिक वार्ता के चलते आईआरजीसी भारतीय जहाजों को संकरा रास्ता पार करने की इजाजत दे रहा है. लेकिन इन जहाजों को लड़ाकू विमान और युद्धपोतों की मदद से सुरक्षित वापस लाया जा रहा है. कारण पाकिस्तान है. क्योंकि पाकिस्तान की मंशा कभी भी भारत को लेकर साफ नहीं रही है, भारत के जहाजों के होर्मुज स्ट्रेट से बेरोकटोक निकलने से पाकिस्तान खार खाए बैठा हुआ है. ऐसे में आशंका है कि पाकिस्तान पर नजर रखने के लिए भारतीय वायुसेना और नेवी की मदद से जहाजों को वापस लाया जा रहा है.

राजनाथ सिंह ने सेना प्रमुखों के साथ की उच्चस्तरीय वार्ता

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के बाद ईरान के साथ-साथ खाड़ी देश जल रहे हैं. किसी ने भी ये सोचा नहीं था कि अमेरिका-इजरायल के प्रहार और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के मारे जाने के बाद भी ईरान इस युद्ध में इतना लंबा टिक पाएगा. जवाबी कार्रवाई के तौर पर ईरान ने खाड़ी के कई देशों में इजरायल और अमेरिका की संपत्तियों को निशाना बनाया. होर्मुज जैसे व्यापारिक जलमार्ग पर ईरान का पूरी तरह से कब्जा है और उस मार्ग के बाधित होने से अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक स्थिरता भी प्रभावित हुई है.

भारतीय जहाज भी लगातार इस मार्ग से गुजर रहे हैं. ऐसे में राजनाथ सिंह ने एक हाईलेवल बैठक की. कर्तव्य भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक का उद्देश्य भारतीय झंडे वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से ऊर्जा आपूर्ति को बिना रुकावट जारी रखना था. रक्षा मंत्री को सैन्य नेतृत्व ने बताया है कि भारतीय नौसेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास के घटनाक्रमों पर चौबीसों घंटे नजर रख रही है. भारतीय व्यापारिक जहाजों के साथ भारतीय नौसेना लगातार संपर्क रखे हुए है और नेविगेशन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं. इसके अलावा नेवी के टीमें हाईअलर्ट हैं. साथ ही वायुसेना के जहाज भी आसमान ने भारतीय जहाजों पर नजर रखे हुए हैं. ताकि किसी भी तरह की स्थिति से निपटा जा सके. रक्षा सचिव ने आपातकालीन प्रोटोकॉल और आकस्मिक योजनाओं पर ब्रीफिंग दी, ताकि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके.

बैठक में राजनाथ सिंह ने सेनाओं को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं.

भारत के कौन-कौन से जहाज होर्मुज से सुरक्षित पहुंचे

विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच युद्ध के बीच कई राउंड बातचीत की जा चुकी है. जयशंकर की कूटनीतिक बातचीत के कारण ईरान की होर्मुज खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों को निकलने पर सहमति बनी है. जहां दुनियाभर के कई जहाजों को निकलने की मनाही है, मिसाइल अटैक जैसे हमले झेल रहे हैं. तो वहां भारतीय जहाज एक-एक करके निकल रहे हैं. मंगलवार को ही पाइन गैस, जग बसंत जहाज सुरक्षित रूप से एलपीजी और गैस लेकर भारत पहुंचे हैं. इससे पहले नंदा देवी और शिवालिक भी मुंबई के तट पर पहुंच चुके हैं. इसके अलावा जग लाडकी तकरीबन 80,886 टन कच्चा तेल लेकर संयुक्त अरब अमीरात से भारत पहुंची थी और पुष्पक और परिमल, ये अन्य टैंकर हैं जो होर्मुज से गुजरे हैं.

होर्मुज ने क्यों बढ़ाई दुनियाभर के टेंशन

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी का मुख्य मार्ग है और 28 फरवरी के अमेरिका- इजरायल हमलों के बाद यह लगभग बंद है. ट्रंप ने कहा, “होर्मुज स्ट्रेट जल्द ही खुलेगा अगर तेहरान के साथ बातचीत सफल रही तो. दरअसल होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर खाड़ी देशों के साथ-साथ यूरोप भी अमेरिका पर दबाव बना रहा है. क्योंकि होर्मुज बाधित होने के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उथलपुथल मच गई है. गैस की कमी जैसी किल्लत शुरु हो चुकी है और महंगाई बढ़ने लगी है.

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