भारत की पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने उठाया है बड़ा कदम. ये कदम सिलीगुड़ी कोरिडोर से जुड़ा हुआ है. भारत के चिकन नेक जिसपर चीन की पैनी नजर है, तो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर बांग्लादेश भी आए दिन अनाप-शनाप गीदड़भभकी देता रहता है. चिकन नेक की सुरक्षा के लिए सरकार ने बनाया है एक ऐसा जाल, जो हमारे सेवेन सिस्टर्स के किले को और मजबूत कर देगा.
केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 40 किलोमीटर रेलवे टनल बनाने की घोषणा की है, जिसे रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है. ताकि सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर यात्रियों के साथ-साथ सामान और डिफेंस लॉजिस्टिक्स की बिना रुकावट सुचारू आवाजाही की जा सके.
सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बनाने की तैयारी
केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने टनल के बारे में जानकारी देते हुए बताया, “केंद्र नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर लंबी स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बनाने की योजना बना रहा है. इससे नॉर्थ-ईस्ट और बाकी भारत के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत और सुरक्षित किया जा सकेगा.”
अश्विनी वैष्णव ने कहा, “नॉर्थ ईस्ट को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर के स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर के लिए खास प्लानिंग है. अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार-लाइन करने की भी प्लानिंग चल रही है.”
रेल मंत्री के अनुसार, “केवल अंडरग्राउंड ट्रैक ही नहीं बिछाए जाएंगे, बल्कि इस कॉरिडोर में मौजूद रेल पटरियों की क्षमता बढ़ाने पर भी काम होगा. इससे रेल यातायात को और सुगम बनाया जा सकेगा.”
देश विरोधी ताकतों को जवाब, दीर्घकालिक रणनीतिक कमजोरी दूर होगी: सीएम हिमंता
असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने केंद्र सरकार की इस प्रस्तावित योजना का स्वागत किया है. हिमंता ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, “दशकों से, ‘चिकन नेक’ का इस्तेमाल देश विरोधी ताकतों द्वारा देश के भीतर और बाहर, दोनों जगह डराने-धमकाने की रणनीति के रूप में किया जाता रहा है. प्रस्तावित भूमिगत रेल मार्ग एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि है, जो पूर्वोत्तर और देश के शेष भाग के बीच एक सुरक्षित और त्रुटिरहित परिवहन गलियारा तैयार करेगा. हम इस दीर्घकालिक रणनीतिक कमजोरी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहे हैं – एक ऐसी कमजोरी जिसे, पीछे मुड़कर देखें तो, बहुत पहले ही दूर कर लिया जाना चाहिए था, शायद 1971 के बाद ही.”
प्रस्तावित अंडरग्राउंड और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बारे में जानिए, जिसे कहते हैं चिकन नेक
सिलिगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए बेहद संवेदनशील और रणनीतिक तौर पर जरूरी है. यह कॉरिडोर नेपाल, भूटान, और बांग्लादेश की सीमा से सटा है. यह महानंदा और तीस्ता नदी के बीच स्थित है. ये कॉरिडोर देश के 8 राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, और त्रिपुरा को जोड़ता है. चीन की इस कॉरिडोर पर पैनी नजर रहती है.
प्रस्तावित अंडरग्राउंड हिस्सा टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर चलेगा. चिकन नेक जमीन नॉर्थ ईस्ट को जोड़ने वाली संकरी पट्टी है. इसकी लंबाई 60 किलोमीटर और चौड़ाई मुश्किल से 20 किलोमीटर है.
भौगोलिक स्थिति और स्ट्रेटेजिक संवेदनशीलता के कारण, इस कॉरिडोर को लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा माना जाता रहा है.
भारत की ताकत सिलीगुड़ी कोरिडोर, जहां हमेशा तैनात रहती है हिंद की सेना
भारतीय सेना के मुताबिक सिलीगुड़ी कोरिडोर भारत की ताकत है. यहां भारतीय सेना की एक पूरी कोर (सुकना स्थित त्रिशक्ति कोर) तैनात रहती है. करीब में वायुसेना का सामरिक तौर से महत्वपूर्ण एयरबेस हासिमरा है जहां दुनिया के सबसे एडवांस एयरक्राफ्ट में से एक, राफेल (रफाल) की एक पूरी स्क्वाड्रन तैनात रहती है.
थलसेना और वायुसेना के साथ-साथ पूरी बांग्लादेश सीमा के चप्पे-चप्पे पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) की तैनाती है.

