ईरान युद्ध के कारण अपनी घटती लोकप्रियता से आहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मसूद पेजेश्कियान ने टेंशन दे दी है. ट्रंप के ईरान को पाषाण युग में भेजे जाने वाले बयान पर कड़ा प्रहार करते हुए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिकी जनता को पत्र लिखकर ये पूछा है कि आखिर उन्हें इस युद्ध से क्या फायदा हुआ है?
अपने ओपन लेटर में ईरानी राष्ट्रपति ने ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति पर सवाल उठाए तो अमेरिकी जनता से कहा कि वो मनगढंत कहानियों से आगे देखें और बताएं कि क्या ये युद्ध उनके हित में है?
पेजेश्कियान ने ईरान को जबरन युद्ध में धकेलने का आरोप लगाते हुए कहा, ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और बातचीत दोनों संभव हैं. ईरान की सेना कमजोर नहीं पड़ी है, अमेरिका द्वारा किसी भी आक्रामकता का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है.
अमेरिकी लोग बताएं कि क्या सच में उन्हें ईरान से खतरा था: राष्ट्रपति पेजेश्कियान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी नागरिकों के लिए एक लंबा पत्र लिखा है. इस पत्र में जनता से सीधे सवाल करते हुए पेजेश्कियान पूछ रहे हैं कि क्या यह युद्ध वास्तव में अमेरिकी लोगों के हित में है. क्या ईरान की ओर से ऐसा कोई वास्तविक खतरा था, जो इस तरह के कदम को सही ठहराए?”
पेजेश्कियान ने अमेरिका के लोगों से अपील की है कि वे “विकृतियों और बनावटी कथाओं की बाढ़” से आगे देखें और यह सवाल करें कि ईरान पर चल रहे अमेरिका-इजरायली युद्ध से आखिर किसके हित सध रहे हैं. क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति “आज वाकई अमेरिकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है”?
पाषाण युग वाली बात, ट्रंप का अहंकार बोल रहा: राष्ट्रपति पेजेश्कियान
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान को नक्शे से खत्म कर देने और पाषाण युग में भेजने वाले बयान पर भी मसूद पेजेश्कियान ने जमकर वार किया है. पेजेश्कियान वे अमेरिकी जनता से पूछा, “क्या निर्दोष बच्चों की हत्या, कैंसर के इलाज वाली दवा फैक्टरियों का विध्वंस, या किसी देश को ‘पाषाण युग में वापस भेजने’ का घमंड सिवाय अमेरिका की वैश्विक छवि को और अधिक नुकसान पहुंचाने के इन कामों का कोई उद्देश्य है?”
पेजेश्कियान लिखते हैं कि, “ऐसे एक्शन अस्थिरता पैदा करती हैं, मानवीय और आर्थिक लागत बढ़ाती हैं, तनाव बढ़ाती हैं और वर्षों तक रहने वाले आक्रोश के बीज बोती हैं. यह शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि रणनीतिक भ्रम और स्थायी समाधान हासिल करने में असमर्थता का संकेत है.”
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा, “दुनिया इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां टकराव का रास्ता पहले से ज्यादा महंगा और निष्फल साबित हो सकता है.”
पड़ोसी देशों से हम ताकतवर, लेकिन संयमी, कभी आक्रामक नहीं हुए: राष्ट्रपति पेजेश्कियान
पेजेश्कियान ने ईरान को जबरन युद्ध में धकेलने का आरोप लगाते हुए कहा, “आधुनिक इतिहास में ईरान ने कभी आक्रामक रुख नहीं अपनाया, जबकि उसके पास अपने कई पड़ोसी देशों से अधिक सैन्य क्षमता रही है. इसके बावजूद ईरान ने संयम बरता है, लेकिन अगर उस पर हमला किया जाता है तो वह उसका सामना करने में सक्षम है और हर तरह की आक्रामकता को झेलने के लिए तैयार है. ईरान द्वारा पड़ोसी देशों के खिलाफ की जा रही कार्रवाईयां वैध आत्मरक्षा पर आधारित एक संतुलित प्रतिक्रिया हैं. हमारी पड़ोसी देशों से कोई दुश्मनी नहीं है.”
पेजेश्कियान ने कहा, “एक बार जून 2025 में जब इजरायल ने 12 दिन का युद्ध शुरू किया और अमेरिका ने भी संक्षिप्त रूप से उस अभियान में हिस्सा लिया. दूसरी बार इस साल फरवरी के अंत में हमला किया गया. ईरान की महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं जिनमें ऊर्जा और औद्योगिक प्रतिष्ठान शामिल हैं पर हमला सीधे तौर पर ईरानी जनता को निशाना बनाता है. यह युद्ध अपराध होने के अलावा, ईरान की सीमाओं से कहीं आगे तक परिणाम पैदा करता है.”
ट्रंप को संदेश देते हुए पेजेश्कियान ने कहा, “टकराव और संवाद के बीच चुनाव वास्तविक और महत्वपूर्ण है. इसका नतीजा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेगा.”
ईरान को पाषाण युग में भेज देंगे: ट्रंप
ट्रंप ने जनता संबोधित करते हुए ईरान को बर्बाद कर देने की घोषणा की है और कहा है कि “ऐसा बर्बाद करेंगे कि वो उठ नहीं पाएगा. पाषाण युग में पहुंच जाएगा.” इससे पहले भी ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान को विनाश के गर्त में धकेलता रहेगा या जैसा कहा जाता है, पाषाण युग में वापस भेज देगा.”
लेकिन सच्चाई दुनिया के सामने है, ईरान ने अयातुल्ला खामेनेई की मौत और सारे शीर्ष नेताओं के खात्मे के बावजूद अमेरिका के सामने सरेंडर नहीं किया, जबकि जंग के मैदान में मुकाबला करने के लिए उतर गया. युद्ध को एक महीने से ज्यादा खींच कर ईरान ने अमेरिका की सुपरपावर वाली छवि को नुकसान पहुंचाया है, यही कारण है अमेरिकी राष्ट्रपति को जनता के सामने सफाई देने के लिए उतरने पर मजबूर होना पड़ा.

