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बिना ट्रंप के थाईलैंड-कंबोडिया में सीजफायर, नया शांति समझौता

थाईलैंड और कंबोडिया ने आपसी सहमति के बाद सैन्य टकराव रोक दिया गया है. खास बात ये है कि थाईलैंड-कंबोडिया के बीच जो नया शांति समझौता हुआ है, वो दोनों देशों ने खुद किया है. इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कोई रोल नहीं है. हालांकि आसियान देशों ने दोनों देशों के बीच शांति समझौता कराने पर जोर जरूर दिया था. 

पिछले 20 दिनों ने थाईलैंड-कंबोडिया के बीच ताजा तनातनी थी. हालिया हमलों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लाखों लोग विस्थापित हुए हैं.

दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर सभी तरह के हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की घोषणा की है. तत्काल प्रभाव से थाईलैंड-कंबोडिया के बीच 27 दिसंबर को दोपहर 12 बजे स्थानीय समय से ये सीजफायर लागू किया गया है. 

दोनों देशों ने यह निर्णय तीसरी विशेष सीमा समिति (जीबीसी) की बैठक के बाद लिया, जो प्रुम-बन पाक कार्ड अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकी पर हुई. बैठक की अध्यक्षता कंबोडिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री जनरल टी सीहा और थाईलैंड के रक्षामंत्री जनरल नटाफॉन नार्कफानिट ने की, और आसियान निरीक्षक दल ने भी बैठक में भाग लिया था.

थाईलैंड-कंबोडिया के बीच बनी आपसी सहमति

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच दिसंबर के पहले सप्ताह में एक बार फिर से युद्ध जैसे हालात बन गए थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कराए गए सीजफायर की धज्जियां उड़ गई थीं. थाईलैंड और कंबोडिया एक दूसरे पर एयरस्ट्राइक कर रहे थे. तनाव इस कदर बढ़ चुका था कि दोनों देशों के बॉर्डर पर रहने वाले लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा.

लेकिन अब दोनों देशों ने शांति बनाए रखने पर सहमति बनाई है. संयुक्त बयान में थाईलैंड और कंबोडिया के रक्षा मंत्रियों ने कहा कि “दोनों देश बॉर्डर पर मौजूदा सैन्य तैनाती को बनाए रखेंगे और किसी भी तरह की अतिरिक्त सैन्य गतिविधि या सैनिकों की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी. किसी भी तरह की सैन्य मजबूती से तनाव बढ़ेगा और लॉन्ग टर्म समाधान की कोशिशों को नुकसान पहुंचेगा.”

साउथ ईस्ट एशिया में शांति पर दिया गया जोर

बैठक में थाईलैंड और कंबोडियाई पक्षों ने शांति और सहयोग की बात की और कहा कि “विवादों का समाधान विश्वसनीयता, ईमानदारी, निष्पक्षता और आपसी सम्मान के माहौल में होना चाहिए.” दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर, आसियान चार्टर और दक्षिण-पूर्व एशिया में मित्रता और सहयोग संधि के सिद्धांतों का पालन करने पर भी जोर दिया.

बैठक में यह भी याद दिलाया गया कि 22 दिसंबर को कुआलालंपुर में हुई विशेष आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक में भी शांति और बल का उपयोग न करने का आग्रह किया गया था. 

कंबोडिया की तरफ से क्या कहा गया?

कंबोडिया की तरफ से जारी स्पेशल जनरल बॉर्डर कमेटी के बयान के अनुसार, “दोनों पक्षों ने यह तय किया है कि सभी तरह के हथियारों के इस्तेमाल पर रोक रहेगी. इसमें नागरिकों, नागरिक ठिकानों, बुनियादी ढांचे और सैन्य लक्ष्यों पर किसी भी तरह के हमले शामिल हैं. सीजफायर सभी इलाकों में और हर स्थिति में लागू रहेगा.”

इस सीजफायर के बाद संघर्ष प्रभावित सीमा क्षेत्रों के निवासी अब धीरे-धीरे अपने घर लौट सकेंगे. इससे हजारों परिवारों को राहत मिलेगी. 

थाईलैंड-कंबोडिया के बीच क्या है विवाद?

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच विवाद एक हिंदू मंदिर को लेकर है. कंबोडिया ने विवादित प्रिया (प्रिहा)-विहार मंदिर पर हथियारबंद सैनिकों को तैनात कर दिया जबकि थाईलैंड इस मंदिर को हमेशा से अपनी सीमा के भीतर मानता आया है, जबकि कब्जा कंबोडिया का है.  

यूनेस्को की धरोहर लिस्ट में भगवान शिव के इस मंदिर का निर्माण 9-12 शताब्दी के बीच कंबोडिया के खमेर साम्राज्य के राजाओं ने कराया था.बॉर्डर पर विवादित मंदिर होने के चलते, थाईलैंड और कंबोडिया के सैनिक, पेट्रोलिंग के वक्त यहां भिड़ जाते हैं, जिसके चलते समय-समय पर सैन्य टकराव की स्थिति बन जाती है. दोनों देशों के बीच पिछले 100 वर्षों से इस मंदिर को लेकर तकरार रही है.

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