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यूरोप तक मिडिल ईस्ट की आग, ब्रिटेन-फ्रांस-जर्मन आए अमेरिका के साथ

खाड़ी देशों के अलावा ईरान का हमला यूरोप तक पहुंच गया है. साइप्रस में ब्रिटेन के सैन्य बेस पर ईरान की ओर से ड्रोन अटैक की कोशिश हुई है. मिडिल ईस्ट देश साइप्रस में ब्रिटिश सैनिकों की तैनाती है. सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद ईरानी सेना ने ब्रिटिश सैनिकों को मारने की कोशिश की है, जिसके बाद ब्रिटेन भड़क गया है.

पहले न कहने वाले ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिका को अपने मिलिट्री बेस के इस्तेमाल की इजाजत दे दी है. सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं, फ्रांस और जर्मनी ने भी ईरान के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए अमेरिकी सैन्य एक्शन में साथ देने की घोषणा की है. जिसके बाद ईरान अलग-थलग पड़ चुका है, क्योंकि गल्फ देशों पर हमले के बाद खाड़ी देश विरोध में थे ही, अब ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने भी ईरान के खिलाफ मिसाइलें तान दी हैं,

साइप्रस में ब्रिटिश एयरबेस पर ईरान का हमला

साइप्रस में रॉयल एयरफोर्स (आरएएफ) के एयरबेस पर ड्रोन हमले किए गये हैं. हमले के दौरान धमाकों की तेज आवाजें सुनाई दी हैं. साइप्रस के इस ब्रिटिश एयरबेस पर सैकड़ों ब्रिटिश एयरफोर्स के अधिकारी अपने परिवार के साथ रहते हैं. बताया जा रहा है कि यह हमला आधी रात को किया गया. हमले के बाद एयर सायरन बजने लगे जिसके बाद रॉयल एयरफोर्स के टाइफून और एफ-35 बी लाइटनिंग जेट को हवा से हवा में ईंधन भरने वाले टैंकरों के साथ भेजा गया. बताया जाता है कि एक ड्रोन रनवे से टकराया, जिससे एयरफील्ड को नुकसान हुआ है. इस हमले के पीछे सीधे ईरान या फिर उसके प्रॉक्सी पर हमले का शक है.

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने कहा कि “खामेनेई के मौत पर शोक मनाने वाले बहुत कम लोग होंगे क्योंकि उनका शासन बुराई का स्रोत था. इसने अपने ही नागरिकों की हत्या की है, इसने ब्रिटेन सहित आतंकवाद का निर्यात किया है. ब्रिटेन के हवाई अभियान क्षेत्रीय स्थिरता को सुदृढ़ करने के लिए हैं और रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) ऐसा करना जारी रखेगी और भविष्य में तनाव बढ़ने के जोखिम को कम करने का प्रयास करेगी.”

हीली ने कहा कि “आरएएफ के जेट कतर और साइप्रस से उड़ान भर रहे हैं और इन दोनों देशों की ओर भेजे गए ईरानी मिसाइलों या ड्रोनों से सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं.”

साइप्रस में ब्रिटिश एयरबेस की अहमियत जानिए

साइप्रस बेस पर ब्रिटिश सेना के 800 से ज्यादा परिवार और 3000 से ज्यादा कॉन्ट्रैक्टर रहते हैं. इस बेस का इस्तेमाल यमन, इराक और सीरिया पर हवाई हमलों के लिए लॉन्च पैड के तौर पर किया गया था और 7 अक्टूबर को हमास के आतंकी हमलों के बाद गाजा में बंधकों के निशान ढूंढने के लिए स्पेशल फोर्स के जासूसी प्लेन वहां से भेजे गए थे. ब्रिटिश एयरफोर्स के टायफून फाइटर जेट और एफ-35 लड़ाकू विमानों की यहां तैनाती है. साइप्रस में ब्रिटिश सॉवरेन बेस एरिया (अक्रोटिरी और डेकेलिया) में एक बड़ा जासूसी हब भी है जो पूरे इलाके से सिग्नल इंटेलिजेंस को इंटरसेप्ट करता है.

भड़के ब्रिटिश पीएम ने अमेरिका को मदद का ऐलान किया

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की मदद देने की घोषणा की है. ब्रिटिश पीएम की ओर से कहा गया है कि हमने ईरान पर हमला करने के लिए और मिडिल ईस्ट में अपने सहयोगियों पर होने वाले ईरानी मिसाइलों को रोकने के लिए अपने एयरबेस के इस्तेमाल की इजाजत दे दी है, हालांकि ब्रिटेन ने पहले मना कर दिया था. लेकिन ब्रिटिश एयरबेस पर हुए हमले के बाद ब्रिटेन, ईरान के खिलाफ खड़ा हो गया है.

ब्रिटिश पीएम ने कहा कि “हमने अमेरिका के अनुरोध को स्वीकार कर लिया ताकि ईरान पूरे इलाके में मिसाइलें न दागे, बेगुनाह आम लोगों को न मारे, ब्रिटिश लोगों की जान को खतरे में न डाले और उन देशों पर हमला न करे जो इसमें शामिल नहीं हैं.”

फ्रांस, जर्मनी भी ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के साथ आए

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वे अपने सहयोगियों पर ईरान के लापरवाह हमलों से स्तब्ध हैं, जो क्षेत्र में उनके सैनिकों और नागरिकों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं.

बयान में कहा गया, “हम क्षेत्र में अपने और अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएंगे, संभवतः ईरान की मिसाइलों और ड्रोन दागने की क्षमता को नष्ट करने के लिए आवश्यक और रक्षात्मक कार्रवाई को सक्षम बनाकर. हमने इस मामले पर क्षेत्र में अमेरिका और सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई है.”

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