अपनी शर्तों और अपनी कूटनीति के आगे अमेरिका को झुका ले गया है भारत. यूरोपीय यूनियन के साथ हुई मदर ऑफ ऑल डील, चीन और रूस से करीबी, फ्रांस, इजरायल, ब्राजील, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों संग भारत की रणनीतिक बातचीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पता चल गया कि ये अब वो भारत नहीं रहा है. ये नया भारत है, सशक्त भारत है, ये किसी के आगे झुकता नहीं, आत्मनिर्भर है.
यही कारण है कि भारत के खिलाफ बोलने वाले ट्रंप के सुर नरम पड़े और उन्होंने भारत के टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया और कहा है कि आगे आने वाले समय में टैरिफ शून्य भी हो सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस ट्रेड डील का ऐलान किया है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता पूरा हो गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को खुद एनडीए संसदीय दल की बैठक में कहा, कि लोग आलोचना कर रहे थे पर हमने धैर्य रखा उसका परिणाम निकला
आज वर्ल्ड ऑर्डर भारत के पक्ष में है: पीएम मोदी
सोमवार देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बात हुई और इस दौरान ट्रंप ने टैरिफ घटाने की घोषणा की. साथ ही भारत के साथ मजबूत संबंधों पर जोर दिया.
मंगलवार को इसका असर शेयर बाजार पर दिखा और स्टॉक मार्केट में बढ़त देखी गई. इस बीच पीएम मोदी ने संसदीय दल की बैठक में कहा, “मैंने कहा था कि वर्ल्ड ऑर्डर चेंज हो रहा है. कोविड के बाद वो दिख रहा है और आज वर्ल्ड ऑर्डर भारत के पक्ष में ट्विस्ट हो रहा है. हमारी राजनीतिक सोच की देश और विदेश में कितनी स्वीकार्यता है.”
दुनिया के सेंटर स्टेज में है भारत: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, “दुनिया में भारत की पूछ हो रही है. दुनिया के संतुलन में भारत की भूमिका अहम है. भारत दुनिया के सेंटर स्टेज में है और ये इस सदी की सबसे बड़ी घटना है. कुछ लोग टैरिफ के फैसले से टूट पड़े थे. जब भारत पर टैरिफ लगा तो विपक्षी कटघरे में खड़ा करने लगे अलग-अलग सवाल पूछने लगे थे.”
पीएम ने कहा कि “एक बडी ट्रेड डील हुई है. ये हमारी कूटनीति की एक बड़ी जीत है, और यह दिखाता है कि धैर्य का फल हमेशा मिलता है.”
ईयू डील के एक सप्ताह के अंदर घट गया टैरिफ
केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “हाल ही में भारत-यूरोपीय यूनियन, भारत और यूएई, भारत और मॉरीशस, भारत और ऑस्ट्रेलिया, भारत और यूके, भारत और न्यूजीलैंड, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील हुई हैं. ये साधारण उपलब्धि नहीं है. विश्वभर नें भारत की पहचान बनी है, कद बढ़ा है कि उसी का नतीजा है कि इतने देशों ने विश्वास करके ट्रेड डील भारत के साथ किया. ये देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती से आगे ले जाएगा. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुई ऐतिहासिक व्यापारिक डील पर चर्चा हुई. उनके नेतृत्व में नौ व्यापारिक समझौते, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, पूरे हुए हैं. भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सिर्फ एक सप्ताह पहले ही हस्ताक्षर हुए थे अभी पूरा एक सप्ताह भी नहीं बीता है. ये एक हफ्ते के अंदर ही, अमेरिका के साथ समझौतों की घोषणा की गई. इसमें टैरिफ में कटौती की घोषणा भी शामिल है.”
भारत-अमेरिका के रिश्तों पर जमीं बर्फ पिघल रही: अमेरिकी सीनेटर्स
अमेरिकी सांसद और ‘इंडिया कॉकस’ के अध्यक्ष रो खन्ना ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वे महीनों से दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए काम कर रहे थे.
सीनेट की विदेश संबंध समिति के अध्यक्ष ने राष्ट्रपति ट्रंप को बधाई देते हुए कहा कि “भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और भारत से ये समझौता होना अमेरिका के लिए फायदे का है.”
हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी ने भी इसे एक नई द्विपक्षीय व्यापार संधि बताया है, जो इंडो-पैसिफिक सेक्टर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने में भारत और अमेरिका की साझेदारी को और मजबूत करेगी.
कैसे काम आई कूटनीति, पिछले साल से ही होल्ड थी भारत-अमेरिका डील
दरअसल पिछले साल जब पहलगाम आतंकी हमले का जवाब देते हुए भारत ने सैन्य एक्शन लिया था. तो पस्त पड़े पाकिस्तान ने अमेरिका, सऊदी अरब समेत कई देशों से भारत को रोकने की गुहार लगाई थी. लेकिन भारत ने हमेशा से कहा है कि उसे किसी मध्यस्थ की जरूरत नहीं. ऐसे में पाकिस्तान के डीजीएमओ ने गिड़गिड़ाते हुए भारत से सैन्य एक्शन रोकने की अपील की.
इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सीजफायर के लिए खुद को क्रेडिट देने की कोशिश की. बार-बार हर मंच से ट्रंप भारत-पाकिस्तान युद्ध रोकने के लिए अपनी पीठ थपथपाते रहे.
लेकिन जब पीएम मोदी ने संसद में खड़े होकर ये बयान दे दिया कि किसी भी राष्ट्राध्यक्ष से ऑपरेशन सिंदूर रोकने के लिए नहीं कहा, तो ट्रंप को मिर्ची लग गई. पीएम मोदी के इस बयान के कुछ ही घंटे बाद ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत और फिर 50 प्रतिशत मनमाना टैरिफ थोप दिया.
टैरिफ थोपने के पीछे ट्रंप ने कहा कि भारत, रूस से तेल खरीदता है जिसके जरिए युद्ध में मॉस्को को आर्थिक फंडिंग करता है.
दरअसल ट्रंप को लगा था कि भारत टैरिफ के दबाव में आ जाएगा. लेकिन भारत की ओर से अमेरिका के टैरिफ को अन्यायपूर्ण बताया गया. इसके अलावा अमेरिका को संदेश दे दिया कि वो मॉस्को से तेल खरीदता रहेगा, क्योंकि इसमें राष्ट्रीय हित है.
ट्रंप कई बार पीएम मोदी की तारीफ करते रहे, उन्हें अपना अच्छा दोस्त बताते रहे, लेकिन न दबाव की नीति काम आई ना चापलूसी की.
उल्टा भारत की नजदीकी चीन से बढ़ गई और रूस से और गहरी हो गई. अमेरिका को पिछले साल उस वक्त और झटका लगा, जब पीएम मोदी ने 07 साल बाद चीन का दौरा किया और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. इस मंच पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी पीएम मोदी के साथ थे.
इसके बाद से ट्रंप को अपनी गलती का अहसास होना शुरु हुआ. इसके अलावा ट्रंप ने पीएम मोदी को कनाडा से वॉशिंगटन आने का न्योता दिया, लेकिन उस वक्त भी बेहद चतुराई से पीएम मोदी ने अमेरिका आने से मना कर दिया.
इस बीच अमेरिका-भारत की बीच ट्रेड डील को लेकर बात होती रही, लेकिन भारत की ओर से हमेशा से ये संदेश दिया गया कि ये डील भारत की शर्तों के मुताबिक होगा. ट्रंप भारत पर दबाव बनाते रहे, लेकिन कुछ हुआ नहीं.
ट्रंप ने पीएम मोदी को गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण दिया, भारत की चुप्पी ने उसे भी टाल दिया.
वहीं 26 जनवरी को भारत ने ईयू लीडर्स को गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य अतिथि बना दिया और अगले ही दिन भारत-ईयू के बीच मदर्स ऑफ ऑल डील हो गई, जो अमेरिका के लिए पछताने जैसा साबित हुआ.
ट्रंप लगातार अपने देश में घिरे रहे. सीनेटर्स ने अमेरिका को भारत जैसा भरोसेमंद दोस्त खोने पर सवाल दागने शुरु कर दिए. जिसके बाद ट्रंप ने भारत के साथ एक बार फिर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है.
अमेरिका द्वारा टैरिफ कम किया जाना भारत की बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक जीत है, जिसे पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है.

