अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के 24वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक शिगूफा छोड़ा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है ईरान के साथ बातचीत हुई है. ईरान ने खुद बातचीत की पहल की है और वह समझौता करना चाहता है. इसी बातचीत के बाद अमेरिका अगले 5 दिन ईरान पर हमले नहीं करेगा.
लेकिन ईरानी स्पीकर ने ट्रंप के दावे को फेक न्यूज बता दिया है. ईरानी स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया है. गलीबाफ ने कहा, ये प्रोपेगेंडा ट्रंप ने अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया है.
हमने नहीं किया अमेरिका से संपर्क, कोई बातचीत नहीं हुई: ईरान
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने अमेरिका के साथ संभावित बातचीत की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. गालिबाफ ने साफ तौर पर कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है. इस तरह की खबरें ‘फेक न्यूज’ हैं. गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘ईरानी लोग हमलावरों (अमेरिका और इजरायल) के लिए पूर्ण और कठोर दंड की मांग करते हैं. जब तक यह टारगेट हासिल नहीं हो जाता, तब तक सभी ईरानी अधिकारी अपने सर्वोच्च नेता और जनता के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं.
गालिबाफ ने इस बात की पुष्टि की है कि’अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है. ट्रंप द्वारा फेक न्यूज का इस्तेमाल वित्तीय और तेल बाजारों में हेरफेर करने और उस दलदल से बाहर निकलने के लिए किया जा रहा है, जिसमें अमेरिका और इजरायल फंसे हुए हैं.’
आपको बता दें कि मोहम्मद बगेर गालिबाफ का नाम आ रहा था कि ईरान की तरफ से अमेरिका से बातचीत कर रहे हैं. अब गालिबाफ ने खुद साफ मना कर दिया है कि ट्रंप के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है.
तेहरान के रुख में नहीं आया है कोई बदलाव: ईरानी विदेश मंत्रालय
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया है कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है. प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान का रुख पहले जैसा ही है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है. कुछ मित्र देशों के जरिए अमेरिका की तरफ से बातचीत के संकेत जरूर आए थे, लेकिन ईरान ने इस पर कोई औपचारिक बातचीत नहीं की है.
हम अडिग, शर्तें पहले जैसी हैं, लक्ष्य हासिल करेंगे: ईरानी विदेश मंत्रालय
ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा, कि “होर्मुज जलडमरूमध्य और युद्ध खत्म करने को लेकर ईरान की शर्तें पहले जैसी ही हैं. अगर ईरान के अहम ढांचे पर हमला हुआ, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.
सवाल है कि आखिर सच कौन बोल रहा है. ट्रंप ने बातचीत किए जाने का दावा किया है, तो दूसरी तरफ ईरान ने ट्रंप को झूठा करार दे दिया है. हालात बेहद तनावपूर्ण हैं और दुनिया के सभी देश चाहे यूरोप हो या एशिया, मिडिल ईस्ट के इस तनाव को संवाद और कूटनीतिक माध्यम से खत्म करने की अपील कर चुके हैं.

