ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई सरकार के खिलाफ चल रहे व्यापक प्रदर्शन में अमेरिका की एंट्री हो गई है. ईरान और अमेरिका में कुछ दिनों के ब्रेक के बाद फिर से जुबानी जंग तेज हो गई है.
ईरानी सरकार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकाया तो ईरान की ओर से ट्रंप पर पलटवार किया गया है. प्रेसिडेंट ट्रंप ने कहा, कि अगर प्रदर्शनकारियों को कुचला गया तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा. तो ईरान ने अमेरिका को जवाब देते हुए कहा है कि, अमेरिका को दूसरों को छोड़कर अपने सैनिकों पर ध्यान देना चाहिए.
ट्रंप ने ईरान को धमकाया, कहा, छोड़ेंगे नहीं
ईरान की जनता इन दिनों सड़कों पर उतर गई है. महंगाई और अधिकारों को लेकर जनता ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. लगातार कई दिनों से चल रहे प्रदर्शन के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है.
ट्रंप ने कहा है कि “अगर ईरानी सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई और उन्हें हिंसक तरीके से कुचला, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा.”
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर ईरान प्रदर्शनकारियों की हिंसक तरीके से हत्या करता है, जैसा कि उनकी आदत रही है, तो अमेरिका उन्हें बचाने आएगा. हम पूरी तरह तैयार हैं. ट्रंप की यह चेतावनी ऐसे वक्त आई है, जब ईरान के कई शहर पिछले पांच दिनों से हिंसक प्रदर्शनों की चपेट में हैं.”
अमेरिका अपने सैनिकों को देखे: सुप्रीम लीडर के सलाहकार
ट्रंप की धमकी पर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव और अयातुल्ला खामेनेई के करीबी सलाहकार अली लारिजानी ने कहा, “अमेरिका को पता होना चाहिए कि हमारे आंतरिक मामलों में दखल देना पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी फैलाने जैसा है और ट्रंप ने यह शुरू कर दिया है. उन्हें अपने सैनिकों की चिंता करनी चाहिए.”
“इजरायली अधिकारियों और डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से यह साफ है कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा था. हम वास्तव में प्रदर्शन कर रहे लोगों और तोड़फोड़ करने वाले तत्वों के बीच स्पष्ट अंतर करते हैं. ट्रंप को यह समझना चाहिए कि इस घरेलू मामले में अमेरिका का हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचेगा. अमेरिकी जनता को यह जानना चाहिए कि इस मुहिम की शुरुआत ट्रंप ने ही की है और उन्हें अपने सैनिकों की सुरक्षा का ख्याल रखना चाहिए.”
ट्रंप का बयान खतरनाक, ईरानी सेना तैयार: अब्बास अराघची
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप के बयान को “लापरवाह और खतरनाक” बताया और कहा कि देश की सेना अलर्ट पर है. अराघची ने यह भी कहा कि प्रदर्शन अधिकतर शांतिपूर्ण रहे हैं, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे.
अब्बास अराघची ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अमेरिकी सीमाओं के भीतर नेशनल गार्ड की तैनाती को देखते हुए, उन्हें सबसे अच्छी तरह पता होना चाहिए कि सार्वजनिक संपत्ति पर आपराधिक हमले बर्दाश्त नहीं किए जा सकते.”
ईरान में तख्तापलट की साजिश, खुफिया एजेंसी के पास सबूत !
ईरानी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक ऐसे प्रदर्शन और हिंसक प्रदर्शनों को जानबूझकर हवा दी गई है, ताकि सुप्रीम लीडर का तख्तापलट किया जा सके.
खामेनेई से जुड़ी खुफिया एजेंसी ने इसको लेकर कुछ सबूत भी मीडिया के सामने रखे हैं. ईरान का कहना है कि “पश्चिमी देश आंदोलन की आड़ में इस्लामिक शासन को सत्ता से हटाना चाहते हैं.”
आपको बता दें कि ईरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में पांच से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. राजधानी तेहरान में हालात कंट्रोल में हैं, लेकिन इस्फहान, शिराज, यज्द और केरमानशाह जैसे शहरों में आंदोलन भड़का हुआ है.

