ईरान की जिस खास फ्लीट ने दुनिया की सबसे पावरफुल यूएस नेवी के छक्के छुड़ा दिए, जिसकी तारीफ रूस के राष्ट्रपति पुतिन तक ने कर दी, उस पर अमेरिका ने बड़ी एयर स्ट्राइक कर बड़ा नुकसान पहुंचाया है.
पिछले पांच महीने से ईरान ने अमेरिका की नौसेना को होर्मुज स्ट्रेट में घुसने से रोका है तो उसके पीछे आईआरजीसी की ‘मॉस्किटो फ्लीट’ है. बिल्कुल सही सुना आपने, मॉस्किटो फ्लीट यानी मच्छरों का जंगी बेड़ा. क्योंकि ये एक ऐसी फ्लीट है, जो दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर के सामने एक मच्छर की तरह दिखाई पड़ती है.
ईरान की मॉस्किटो फ्लीट के बारे में जानिए
दरअसल ईरान की ‘मॉस्किटो फ्लीट’ बड़े-बड़े युद्धपोतों और विमान वाहक पोतों वाली पारंपरिक नेवी से बिलकुल अलग है. इसमें दरअसल, सैकड़ों छोटी, हल्की और तेज रफ्तार से समंदर में दौड़ने वाली बोट्स हैं. इन बोट्स का इस्तेमाल कर ईरान अपने से कई ज्यादा बड़े दुश्मनों को पीछे हटने पर मजबूर कर देता है, जैसा कि हालिया मिडिल-ईस्ट जंग और खासतौर से होर्मुज स्ट्रेट में देखने को मिला है.
ईरान की इस मॉस्किटो फ्लीट में गदीर-क्लास की छोटी पनडुब्बियां, आत्मघाती बोट्स और बड़ी संख्या में मिसाइल बोट्स हैं. ये मिसाइल बोट्स एक तरह से असॉल्ट बोट्स हैं. ये एक साथ मच्छरों के झुंड की तरह दुश्मन के युद्धपोत, ऑयल टैंकर्स और कमर्शियल शिप्स पर हमला करती हैं. जब तक दुश्मन संभल पाता है, ये काम तमाम कर वापस अपनी समुद्री सीमा में लौट जाती हैं. क्योंकि ये दुश्मन की रडार में भी दूर से नहीं आती हैं. जब तक आती हैं, तब तक समुद्री-तट पर बनी गुफाओं में छिप जाती हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही बार-बार करें कि ईरान की नेवी समाप्त हो चुकी है, लेकिन दुनिया जानती है कि होर्मुज पर अभी भी ईरान का कब्जा है. इस बेड़े की खासियत ये है कि हल्के और फुर्तीले होने के कारण, इन जहाजों को ईरान के पथरीले तट पर बनी सुरंगों में छिपाया जा सकता है, जिससे अमेरिका के लिए लंबी दूरी के हथियारों से इन्हें नष्ट करना मुश्किल हो जाता है.
इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की ये छोटी बोट्स, अमेरिकी सेना के लिए एक बहुत बड़ी रणनीतिक चुनौती बने हुई हैं, क्योंकि इन छोटी नावों पर मिसाइलें, बंदूकें और दूसरे हथियार तैनात हैं, जो दुश्मन को समय-समय पर मात देती रहती हैं. यह फ्लीट समुद्र में एक छापामार बल या यूं कहें तो गुरिल्ला युद्ध करती है, दुश्मनों पर अटैक करती है और फौरन भागने में सक्षम है. ये बोट्स करीब 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आती हैं, युद्धपोत को घेर लेती हैं, ड्रोन या मिसाइल दागती हैं और फिर रडार पर बिना दिखे, छिप जाती हैं. इन्हें पथरीले समुद्री तटों पर नाई गई गहरी गुफाओं के अंदर बने तटों पर बांधकर रखा जाता है. जरूरत पड़ने पर इन्हें तुरंत उतार दिया जाता है. आत्मघाती ड्रोन और मिसाइलों से लैस ये नावें दुश्मनों का काम तमाम करके ही दम लेती हैं.
पुतिन को रास आया ईरान का असैमिट्रिक वॉरफेयर
अमेरिका के खिलाफ जंग में ईरान के असैमिट्रिक वॉरफेयर यानी गुरिल्ला युद्ध की रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भी जमकर तारीफ की है. मिडिल ईस्ट में भड़की जंग और अपने पारंपरिक मित्र ईरान से यूक्रेन के हुए टकराव के बाद रूसी राष्ट्रपति एक्शन में हैं. पुतिन ने अपने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ एक बैठक की. इस बैठक में ईरान की मॉस्किटो फ्लीट चर्चा का केंद्र रही. ईरान की मॉस्किटो फ्लीट की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जमकर तारीफ की है.
मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध में जिस तरह से अमेरिकी को ईरान ने छकाया है, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी तेहरान के कायल हो गए हैं. पुतिन ने अपने एडमिरल्स को यहां तक आदेश दे दिया है कि रशियन नेवी को भी ऐसी मॉस्किटो फ्लीट को तैयार करना चाहिए. क्योंकि रूस भी अमेरिका, भारत और चीन जैसी बड़ी नौसेनाओं की तरह बड़े युद्धपोत ऑपरेट करता है.
अमेरिका ने कैसे किया मॉस्किटो फ्लीट पर अटैक
पुतिन की तारीफ के महज दो दिनों के भीतर, अमेरिका ने ईरान की इस मॉस्किटो फ्लीट पर जबरदस्त हमला बोल दिया है. गुरूवार को अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने दक्षिणी ईरान के बुशहर और खुजेस्तान प्रांत में जो हमले किए, उनमें ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य ठिकानों के साथ, बंदरगाहों पर खड़ी छोटी बोट्स भी शामिल थी. सेंटकॉम ने हमले की ड्रोन फुटेज भी जारी की, जिसमें साफ तौर से छोटी बोट्स पर डायरेक्ट अटैक दिखाई पड़ रहा है.
सेंटकॉम के मुताबिक, इस हमले को यूएस नेवी के एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात F-18 सुपरहोरनेट लड़ाकू विमानों ने अंजाम दिया. ईरान के खिलाफ जंग के राउंड-2 में सेंटकॉम खास तौर से ईरानी नौसेना की ताकत बनी Mosquito Fleet पर हमला कर रही है. ऐसे में क्या ये मान लिया जाए कि होर्मुज स्ट्रेट को ईरान के चंगुल से जल्द आजाद करा सकता है अमेरिका. क्या फिर, होर्मुज स्ट्रेट में युद्ध से पहले की खुली आवाजाही संभव हो पाएगी.

