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अपाचे Down, ईरान डील का टर्निंग पॉइंट

ईरान से डील करने के लिए बैचेन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध शुरु होने के 100 दिन बाद आखिर क्यों किया दिया होर्मुज में बड़े अटैक का ऑर्डर, ये एक बड़ा सवाल है. क्या महज एक हेलीकॉप्टर के गिरने से ट्रंप का गुस्सा सांतवे आसमान पर पहुंच गया कि ईरान में एक बार फिर ताबड़तोड़  हमले बोल दिए. वर्षों से अमेरिकी की नीति बेहद साफ और सपाट है. ना तो हमारे देश के नागरिकों को हाथ लगाएं और ना हमारे किसी मिलिट्री प्लेटफॉर्म को.

लेकिन अपाचे हेलीकॉप्टर के गिरने से ट्रंप ने एक तीर से दो निशाने लगा दिए. पहला ये कि अमेरिका ने दो महीने बाद एक बार फिर ईरान पर जबरस्त हमला बोलकर पूरी दुनिया को दिखा दिया कि सुपरपावर की ताकत कम नहीं हुई है. दूसरा, ईरान को डील के लिए मजबूर कर दिया. क्योंकि इस बार अमेरिका ने हमला मिलिट्री ठिकानों के साथ-साथ सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी किया था.

ईरान की मिलिशिया आईआरजीसी ने जिस हेलीकॉप्टर पर हमला करने की जुर्रत की थी, वो कोई ऐसा वैसा हेलीकॉप्टर नहीं था. वो था अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर. अपाचे यानी दुनियाभर में अमेरिकी की मिलिट्री पावर का प्रतीक. यही वजह है कि ‘अपाचे डाउन’ ने ट्रंप सहित पूरी सेंटकॉम यानी सेंट्रल कमांड को आग बबूला कर दिया. अमेरिका की वही सेंटकॉम जिसकी जिम्मेदारी ईरान के खिलाफ जंग लड़कर ट्रंप को जीत का सेहरा पहनाना है.

जब अपाचे में धंस गया शाहेद ड्रोन

8 जून को जब ईरान और इजरायल के बीच एक बार घमासान युद्ध चल रहा था, उसी दौरान यूएस नेवी का अपाचे हेलीकॉप्टर होर्मुज स्ट्रेट में निगरानी गश्त कर रहा था. होर्मुज में घुसे अपाचे हेलीकॉप्टर पर ईरान की इस्लामिक रेवोलेयशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने शाहेद ड्रोन से अटैक कर दिया. जानकारी के मुताबिक, इस शाहेद ड्रोन का निशाना बेहद अचूक था, लेकिन ये फट नहीं पाया. शाहेद ड्रोन जाकर अपाचे हेलीकॉप्टर में धंस गया. अपाचे उस वक्त कई सौ फीट की ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था. धंसा भी ऐसी जगह कि अपाचे हेलीकॉप्टर पर सवार पायलट और को-पायलट की सांस अटक गई. ये कॉम्बेट ड्रोन पायलट और को-पायलट की सीट के बीच में जाकर फंस गया था और इसका वॉरहेड फटा नहीं था. इसके चलते दोनों पायलट की जान तो फौरी तौर पर बच गई थी, लेकिन ये कभी भी फट सकता था. 

लैंडिंग के वक्त खतरा अधिक था. क्योंकि, ये अपाचे हेलीकॉप्टर, ओमान की खाड़ी में तैनात यूएस नेवी के एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात था. ऐसे में डेक पर लैंडिंग के वक्त हेलीकॉप्टर और पायलट की जान को खतरा तो था ही, एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात करीब चार हजार नौसैनिक और दर्जनों फाइटर जेट और दूसरे हेलीकॉप्टर को भी था. ऐसे में दोनों पायलट ने मे-डे मैसेज यानी एसओएस मैसेज जारी कर हेलीकॉप्टर से छलांग लगा दी. हेलीकॉप्टर समंदर में समा गया और दोनों पायलट करीब दो घंटे तक समंदर में तैरते रहे. दो घंटे बाद यूएस नेवी की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और दोनों को सुरक्षित बचा लिया.

ट्रंप ने अपाचे पर हमले के बदला का किया ऐलान

अमेरिका ने अपाचे डाउन की खबर को दुनिया से छिपाकर रखा था. लेकिन मंगलवार को अमेरिकी मीडिया को इसकी भनक लग गई और ट्रंप को बयान जारी करना पड़ा. उस वक्त ट्रंप ने ऐलान कर दिया कि अपाचे पर हमले का ईरान से बदला लिया जाएगा. क्योंकि ईरान ने युद्धविराम के समय में अमेरिकी हेलीकॉप्टर पर हमला किया था. ईरान ने हमले को भूलवश बताया. लेकिन तब तक पेंटागन और सेंटकॉम ने हमले की तैयारी कर ली थी. ऐसे में 10 जून को सेंटकॉम ने होर्मुज स्ट्रेट से सटे ईरान के पश्चिम और दक्षिणी इलाकों में आईआरजीसी के अहम ठिकानों पर हमले किए. 

सेंटकॉम ने केशम द्वीप, सिरिक आईलैंड, बंदर अब्बास, बुशहर, इस्फहान, जस्क और अहवाज़ शहरों को निशाना बनाया. यूएस एयरफोर्स और नेवल एविएशन के लड़ाकू विमानों ने आईआरजीसी के एयर डिफेंस सिस्टम, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और सर्विलांस रडार साइट्स को निशाना बनाया. अहवाज़ को ईरान की ऑय़ल कैपिटल के नाम से जाना जाता है. भन्नाए सेंटकॉम ने सिरिक आईलैंड में ईरान के दो-दो वॉटर प्लांट पर एयर स्ट्राइक कर तबाह कर दिया. इससे सिरिक आईलैंड पर 20 हजार लोगों के साफ पानी की सप्लाई पूरी तरह से बाधित हो गई. जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने भी कुवैत, बहरीन और यूएई में हमले किए लेकिन अमेरिका ने 11 जून को भी अटैक जारी रखे. ईरान को जबरदस्त  नुकसान पहुंचाने के बाद ही सेंटकॉम ने सांस ली. अपाचे डाउन का बदला पूरा हो चुका था. ट्रंप तक मैसेज पहुंचा दिया गया था. 

भारत भी ऑपरेट करता है अपाचे

70 के दशक से अमेरिका की एयरफोर्स, नेवी और मरीन्स अपाचे हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करते आ रहे हैं. दुनिया की टॉप ग्लोबल एविएशन कंपनी बोइंग इन हेलीकॉप्टर का निर्माण करती है. समंदर से लेकर पहाड़ों तक में ऑपरेशन करने वाले इन कॉम्बैट हेलीकॉप्टर की खूबियों को देखते हुए भारत ने भी अमेरिका से वर्ष 2015 में इन अपाचे हेलीकॉप्टर का सौदा किया था. भारतीय वायुसेना के लिए 22 अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदे गए थे, जिनकी पहली खेप 2019 में मिली थी. पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर अपाचे हेलीकॉप्टर की इंडक्शन सेरेमनी का आयोजन किया गया था.

अपाचे हेलीकॉप्टर की ताकत

1. लॉन्गबो रडार: यह रडार प्रणाली एक साथ 128 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है और कुछ ही सेकंड में 16 लक्ष्यों पर हमला कर सकती है.

2. हेलफायर मिसाइल: ये मिसाइल टैंक जैसे बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने में सक्षम हैं.

3. एयर-टू-ग्राउंड रॉकेट: ये रॉकेट जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाने में मदद करते हैं.

4. चेन गन: 30 एमएम-एम230 तोप उच्च गति से गोलीबारी कर सकती है, जो निकट युद्ध में उपयोगी होती है.

समंदर के साथ-साथ अपाचे हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल दुश्मन की सीमा में घुसकर हमला करने के लिए किया जाता है. क्योंकि ये हेलीकॉप्टर थोड़ा लो फ्लाइंग करते हैं और ऐसे में दुश्मन की रडार की जद से बचने में कामयाब रहते हैं. साथ ही जंग के मैदान में दुश्मन के टैंक, आर्मर्ड व्हीकल्स और मिलिट्री गाड़ियों पर अटैक करने के लिए किया जाता है.  पहाड़ी क्षेत्रों में भी इन हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल दुश्मन की चौकियों और गुफाओं में छिपे आतंकियों को मार गिराने के लिए किया जाता है.

भारतीय वायुसेना ने अपाचे हेलीकॉप्टर की दो अलग-अलग स्क्वॉड्रन को पठानकोट और जोरहाट में तैनात कर रखी हैं. वायुसेना के साथ-साथ थलसेना भी पिछले एक साल से अपाचे हेलीकॉप्टर ऑपरेट कर रही है.

वर्ष 2020 में रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका से थलसेना के लिए छह (06) अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदने का सौदा किया था. इस सौदे की कुल कीमत 800 मिलियन डॉलर (करीब 7000 हजार करोड़ थी). करीब 15 महीने की देरी से भारतीय सेना को ये छह अपाचे हेलीकॉप्टर मिले थे, जिन्हें जोधपुर की एविएशन कोर का हिस्सा बनाया गया है.  

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