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अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबोया ईरानी युद्धपोत, भारत से लौट रहा था जंग के मैदान में

मिडिल ईस्ट देशों से बढ़कर हिंद महासागर तक पहुंच गई है ईरान-अमेरिका की जंग. भारत में नेवल एक्सरसाइज में हिस्सा लेने के बाद स्वदेश लौट रहे ईरान का जंगी जहाज आईआरआईएस डेना पर टॉरपीडो का इस्तेमाल करके अमेरिका ने लिया है एक्शन, 44 साल बाद किसी पनडुब्बी ने जंगी जहाज को डुबोया है. अमेरिकी नौसेना ने श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 नॉटिकल मील दूर एक मार्क 48 टॉरपीडो से डुबो दिया.

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, फ्रिगेट डेना युद्धपोत को समुद्र में डुबो कर महा-क्रूर अपराध किया है क्योंकि फ्रिगेट डेना भारत की अतिथि थी.

बताया जा रहा है कि एक धमाके के बाद आईआरआईएस डेना पानी में समा गया. ये घटना श्रीलंका के बेहद करीब हुई. जिस वक्त धमाका हुआ इस जंगी जहाज में 180 नौसैनिक सवार थे. नौसैनिकों को बचाने के लिए श्रीलंकाई नेवी उतर चुकी है.

हालांकि श्रीलंका ने इस एक दुर्घटना बताते हुए कहा था कि दुर्घटना से पहले जहाज में सवार नौसैनिकों ने श्रीलंका से मदद की गुहार लगाई थी. बताया जा रहा है कि करीब 100 नौसैनिक लापता हैं, जिनके डूबने की आशंका है. कई नौसैनिकों के शव बरामद कर लिए गए हैं जबकि कईयों को बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. श्रीलंका ने अपने 02 जंगी जहाज और एयरक्राफ्ट को सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया है.

भारत से लौट रहे युद्धपोत पर अमेरिका का हमला, भड़के ईरानी विदेश मंत्री

फ्रिगेट डेना पर लिए गए एक्शन के बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची मे अमेरिका को महाक्रूर अपराध वाला करार दिया है, अराघची ने कहा, “अमेरिका ने ईरान के तट से 2,000 मील दूर समुद्र में एक क्रूरता की है, फ्रिगेट डेना भारतीय नौसेना की अतिथि थी और लगभग 130 नाविकों को लेकर जा रही थी. अमेरिका द्वारा उस पर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में बिना चेतावनी के हमला किया गया. मेरे शब्दों को याद रखें: अमेरिका को जिस मिसाल का उसने निर्माण किया है, उसका उसे कड़वा पछतावा होगा.”

इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने पहुंचा था ईरानी युद्धपोत

पिछले महीने 18 फरवरी को विशाखापट्टनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने आया था डेना जहाज. अमेरिकी नौसेना ने भी इस एक्सरसाइज में हिस्सा लिया था.  अमेरिका और ईरान के अलावा, 70 से ज्यादा देशों ने मिलन एक्सरसाइज में भाग लिया था. यह एक भव्य समुद्री आयोजन था जिसने वैश्विक नौसैनिक सहयोग, पेशेवर सौहार्द और भारत की समुद्री क्षमता का प्रदर्शन किया. ये आयोजन बेहद सफल था.

श्रीलंका के बेहद करीब इस युद्धपोत पर हमला हुआ. इस अटैक से पहले जहाज से क्रू (नौसैनिकों) ने श्रीलंका से मदद की गुहार लगाई. ईरान के 30 नौसैनिकों को श्रीलंका के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 87 शव बरामद हुए, 32 नाविकों को बचाया गया, जबकि 60 से अधिक लापता हैं.

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहला युद्धपोत डुबोया गया, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने बताया शांत मौत

44 साल बाद किसी पनडुब्बी ने बनाया जंगी जहाज को डुबोया है. साल 1982 के फॉकलैंड युद्ध में ब्रिटिश सबमरीन ने अर्जेंटीना के युद्धपोत में धमाका कर डुबोया था जिसके बाद अर्जेंटीना ने सरेंडर कर दिया था.

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में ईरानी युद्धपोत डेना को डुबोने की पुष्टि की और इसे “शांत मौत”  करार दिया. हेगसेथ ने कहा, “यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दुश्मन जहाज पर पहला टॉरपीडो हमला है.”

पीट हेगसेथ ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का हिस्सा बताया, जो 28 फरवरी 2026 से इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ चलाया जा रहा है.

भारत का मेहमान नहीं था ईरानी फ्रिगेट !

भारत ने अभी तक आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन घटना भारतीय नौसेना के अभ्यास से जुड़ी होने के कारण क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकती है. ईरान की ओर से कहा गया है कि वो युद्धपोत भारत का मेहमान था. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत को अमेरिका ने डुबो दिया वो भारत का ‘मेहमान’ नहीं था. क्योंकि उसने भारत से कोई मदद नहीं मांगी थी.

डेना ने 16 से 25 फरवरी 2026 तक विशाखापत्तनम में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू  में हिस्सा लिया. बताया जा रहा है कि शुक्रवार, 25 फरवरी को निकलने के बाद जहाज भारतीय इलाके से बाहर और अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में था. ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमला 28 फरवरी को हुआ. इस दौरान कभी भी ईरानी क्रू ने भारत से मदद नहीं मांगी थी.

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