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चीन-ब्रिटेन का क्या काम…नौसिखिए नेपाली PM को भारत ने हड़काया

भारत ने नेपाल के साथ सीमा विवाद में किसी तीसरे मध्यस्थ की भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया है. नेपाल के साथ सीमा विवाद पर भारत सरकार ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि यह एक द्विपक्षीय मामला है, जिसमें किसी तीसरे पक्ष (जैसे चीन या ब्रिटेन) की कोई भूमिका नहीं है. 

हाल ही में नेपाल के नए नौसिखिए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में बयान दिया था कि नेपाल ने भारत की कुछ जमीन कब्जाई है और भारत ने नेपाल की कुछ जमीन. बालेन शाह ने ये भी कहा कि उन्होंने चीन-ब्रिटेन से समझौते के लिए संपर्क किया है ताकि भारत के साथ विवाद सुलझाया जा सके.

हालांकि अपने बयान से पीएम बालेन खुद नेपाल में घिर चुके हैं. इस बयान के बाद नेपाल में बालेन के खिलाफ जमकर विरोध किया जा रहा है.

भारत-नेपाल विवाद द्विपक्षीय मामला, तीसरे की जरूरत नहीं: विदेश मंत्रालय

भारत ने मंगलवार को बालेन शाह के बयान पर कड़ी और सीधी प्रतिक्रिया दी है. भारत सरकार की ओर से कहा गया है कि “भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय मामले में किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है और दोनों देशों ने सीमा संबंधी मामलों के सभी पहलुओं से निपटने के लिए द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं.”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने भारत-नेपाल सीमा के संबंध में नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों के साथ-साथ इस मामले पर नेपाली विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए बाद के बयान को भी देखा है. जबकि भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 फीसद हिस्सा निर्धारित किया जा चुका है, कुछ हिस्से अभी भी अनसुलझे हैं.”

रणधीर जायसवाल ने बताया कि “गंडक नदी के मार्ग बदलने के कारण ऐसा हुआ है. इसके अलावा सीमा के निर्धारित हिस्सों में सीमा पार कब्जे और ‘नो मैन्स लैंड’ (किसी के अधिकार क्षेत्र में न आने वाली जमीन) पर अतिक्रमण के मामले हैं, जिनकी वर्तमान में संयुक्त रूप से मैपिंग की जा रही है.”

रणधीर जायसवाल ने कहा, “सभी पक्षों के लिए यह साफ होना चाहिए कि भारत और नेपाल के बीच एक द्विपक्षीय मामले में किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है.”

रैपर से राजनेता बने नेपाली पीएम को चाहिए चीन-ब्रिटेन का साथ

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने जब से सत्ता संभाली है, उनका कुछ न कुछ बयान विवादों में रहा है. बालेन शाह ने नेपाली संसद में कहा कि “सिर्फ भारत ने ही नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी भारत के साथ कई जगहों पर ऐसा ही किया है. आपको एक बात जानकर हैरानी होगी, जिसके बारे में मुझे हाल ही में प्रधानमंत्री बनने के बाद ही पता चला है. अब दोनों देशों को तथ्यों का अध्ययन करना चाहिए. और दोस्तों की तरह साथ बैठकर इस मामले को सुलझाना चाहिए.”

बालेन शाह बोले, कि “सीमा विवाद पर भारत के साथ चर्चा के अलावा नेपाल, चीन और ब्रिटेन के भी संपर्क में है. चूंकि यह समस्या उस समय से चली आ रही है जब ब्रिटिश भारत ने इस क्षेत्र को छोड़ा था, इसलिए हमारा मानना ​​है कि इस मामले में इंग्लैंड को भी शामिल किया जाना चाहिए.”

इतिहास का जिक्र करते हुए बालेन ने कहा, “सीमा विवाद केवल भारत और नेपाल के बीच का नहीं है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक जड़ें ब्रिटिश इंडिया के दौर से जुड़ी हुई हैं. नेपाल ने इस मुद्दे पर चीन और ब्रिटेन के साथ भी कूटनीतिक बातचीत की है, क्योंकि यह विवाद 1947 में ब्रिटिश शासन के अंत के समय से जुड़ा हुआ है. नेपाल सरकार ने भारत और चीन दोनों को इस मुद्दे पर कूटनीतिक नोट भेजे हैं. उन्होंने यह भी सूचित किया कि ब्रिटेन से भी इस मामले में संवाद जारी रखा जाएगा ताकि एक स्थायी और स्वीकार्य समाधान निकल सके.”

अपने घर में घिरे बालेन शाह

नेपाल की राजनीतिक पार्टियों ने भी बालेन शाह की इन विवादित टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की है. जिसके बाद शाह के बयान पर नेपाल के विदेश मंत्रालय ने उनकी टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण जारी किया है.

नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल छेत्री ने कहा कि “प्रधानमंत्री की टिप्पणियां सीमा स्तंभों, नो-मैन्स लैंड (दशगजा) और सीमा पार भूमि उपयोग से संबंधित मुद्दों का जिक्र करती हैं. उन्होंने समझाया कि तकनीकी अध्ययनों के आधार पर, ऐसे कुछ क्षेत्र हैं जहां वर्तमान में नेपाल द्वारा उपयोग की जा रही भूमि भारतीय पक्ष में पड़ सकती है और इसके विपरीत भी.”

आपको बता दें कि नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर एक पुराना सीमा विवाद रहा है. भारत ने लगातार कहा है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा है.

बालेन ने मानसरोवर यात्रा पर भी लगाया था अड़ंगा

भारत के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में घोषणा की है कि तिब्बत में कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की पवित्र तीर्थयात्रा, 2026 कैलाश मानसरोवर यात्रा, चीन के सहयोग से जून से अगस्त के बीच आयोजित की जाएगी.

कुल 1,000 तीर्थयात्री, 50-50 के समूहों में यात्रा करते हुए, दो मार्गों का उपयोग करेंगे: एक मार्ग सिक्किम में नाथू ला दर्रा होगा, तो दूसरा मार्ग उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे का होगा.

लेकिन नेपाली विदेश मंत्रालय ने लिपुलेख दर्रे को अपना बताते हुए पुराना विवाद फिर से उठाने की कोशिश की थी. नेपाल के विदेश मंत्रालय ने लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा कराने की भारत और चीन की योजना पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है.

नेपाल का कहना है कि हिमालय का यह ऊंचाई वाला दर्रा नेपाली भूमि पर स्थित है और काठमांडू की सहमति के बिना किसी भी पड़ोसी देश को इसका इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है.

जिसके बाद भारत ने नेपाल के बयान पर अपना विरोध पत्र भेजा था.

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